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महज कागजों में लहलहा रहे पौधे
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लगाए गए पौधे
- फोटो : demo pic
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एटा। एक बार फिर से हरियाली रोपने की तैयारी शुरू हो गई है। जिले को स्वतंत्रता दिवस पर 20 लाख से ज्यादा पौधे लगाने का लक्ष्य दिया है, लेकिन पिछले सालों में रोपे गए पौधों का कोई नामोनिशान तक नहीं है। जिले में पिछले साल 7.80 लाख पौधों में से 50 फीसद से अधिक पौधे तो कागजों में रोप दिए गए हैं। ऐसे में एक बार फिर से पौधरोपण अभियान की तैयारी सवालों के घेरे में है।
पिछले साल शासन के निर्देश पर जिले को 7.80 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य मिला था। हर विभाग को पौधरोपण का लक्ष्य देकर जोर-शोर से अभियान चला था। इसके बाद प्रशासन ने दावा किया कि जिले की पूरी धरती का पौधों से शृंगार किया जा चुका है, लेकिन कुछ दिन पूर्व जब शासन ने पिछले साल लगाए पौधों की स्थिति की जानकारी मांगी, तो प्रशासन को जवाब नहीं सूझ रहा है।
पिछले साल 3239 स्थानों पर रोपे गए पौधों में से महज 103 स्थानों पर पौधे लगाने की रिपोर्ट मिली है। इनमें भी अधिकतर स्थान ऐसे हैं, जहां पौधे सूख या मर गए हैं। इससे साफ है कि पौधरोपण अभियान को लेकर किस तरह औपचारिकता की गईं। इस बार भी कुछ ऐसा ही होने की आशंका है।
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ढाई गुना बढ़ गया लक्ष्य
जिले को इस बार पिछले साल की अपेक्षा ढाई गुना अधिक लक्ष्य मिला है। स्वतंत्रता दिवस तक प्रशासन को यह लक्ष्य पूरा करना है।
20 करोड़ रुपये मिला बजट
जिला प्रशासन को पौधरोपण अभियान के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट भी मिला है। पिछले साल भी अभियान के लिए करोड़ों रुपये का बजट मिला था, लेकिन स्थिति से कागजों में किए गए दावों से साफ है कि बजट में जरूर कोई खेल किया गया।
पौधरोपण अभियान को लेकर बैठक की गई है। अधिकारियों को पिछले साल लगाए गए पौधों की जियो टैगिंग के निर्देश दिए हैं। इस बार 10 जून तक अधिकारियों को गड्ढ़े खुदवाकर उनकी जियो टैगिंग पौधरोपण से पहले ही करानी पड़ेगी।
- उग्रसेन पांडेय, सीडीओ एटा।
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पिछले साल शासन के निर्देश पर जिले को 7.80 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य मिला था। हर विभाग को पौधरोपण का लक्ष्य देकर जोर-शोर से अभियान चला था। इसके बाद प्रशासन ने दावा किया कि जिले की पूरी धरती का पौधों से शृंगार किया जा चुका है, लेकिन कुछ दिन पूर्व जब शासन ने पिछले साल लगाए पौधों की स्थिति की जानकारी मांगी, तो प्रशासन को जवाब नहीं सूझ रहा है।
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पिछले साल 3239 स्थानों पर रोपे गए पौधों में से महज 103 स्थानों पर पौधे लगाने की रिपोर्ट मिली है। इनमें भी अधिकतर स्थान ऐसे हैं, जहां पौधे सूख या मर गए हैं। इससे साफ है कि पौधरोपण अभियान को लेकर किस तरह औपचारिकता की गईं। इस बार भी कुछ ऐसा ही होने की आशंका है।
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ढाई गुना बढ़ गया लक्ष्य
जिले को इस बार पिछले साल की अपेक्षा ढाई गुना अधिक लक्ष्य मिला है। स्वतंत्रता दिवस तक प्रशासन को यह लक्ष्य पूरा करना है।
20 करोड़ रुपये मिला बजट
जिला प्रशासन को पौधरोपण अभियान के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट भी मिला है। पिछले साल भी अभियान के लिए करोड़ों रुपये का बजट मिला था, लेकिन स्थिति से कागजों में किए गए दावों से साफ है कि बजट में जरूर कोई खेल किया गया।
पौधरोपण अभियान को लेकर बैठक की गई है। अधिकारियों को पिछले साल लगाए गए पौधों की जियो टैगिंग के निर्देश दिए हैं। इस बार 10 जून तक अधिकारियों को गड्ढ़े खुदवाकर उनकी जियो टैगिंग पौधरोपण से पहले ही करानी पड़ेगी।
- उग्रसेन पांडेय, सीडीओ एटा।