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Deoria News: दंत रोग विभाग में पर्ची लिखवाइए, जांच बाहर से कराइए
Sat, 06 May 2023 11:26 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 06 May 2023 11:26 PM IST
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मेडिकल कॉलेज में दंत रोगियों के लिए इलाज का है आधा-अधूरा इंतजाम, बाहर से उपचार कराने में करनी पड़ रही है जेब ढीली
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में दंत रोगियों के लिए इलाज का आधा-अधूरा इंतजाम है। पर्ची कटवाने के बाद उनके दांत निकालने और सफाई की जा रही है। अन्य मरीजों को बाहरी इलाज और जांच का ही सहारा लेना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज से निजी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही है। महंगे इलाज में फंसकर वह फीस और दवा में मोटी रकम खर्च कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में संसाधन की कमी के कारण दंत रोगियों की पीड़ा दूर नहीं हो पा रही है। उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। दंत विभाग में प्रतिदिन करीब 80 मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। इसमें दांत में पस, सड़न, सूजन, पायरिया सहित अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज होते हैं, जिसमें आरसीटी, मसाला भरने पायरिया के मरीज अधिक होते हैं। डॉक्टर ओपीजी (आर्थों पेटोग्राम) जांच, एक्स-रे जांच लिखते हैं। पर सुविधा न होने से मरीजों को निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है। कंप्रेशर न होने से दांत की कटाई, दांत के नसों के इलाज के लिए आरसीटी (रूट केनाल ट्रीटमेंट) नहीं होता है। सड़े दांत भरने के लिए मसाला तथा चांदी भी नहीं है। इसके लिए मरीजों को निजी अस्पताल का सहारा लेेना पड़ रहा है, जिससे अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
पुराने संसाधनों से काम चलाया जा रहा है। इलेक्ट्रानिक की जगह डेंटल चेयर हाइड्रोलिक है। उसे ऊपर, नीचे करना पड़ता है। अल्ट्रासोनिक स्केल भी पुराना है, जो ठीक से काम नहीं करता है। औजार भी पुराने हैं, जो कुछ कम ही हैं। उन्हें हर बार ब्वॉयल करना पड़ता है।
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यह नहीं है सुविधा
मेडिकल कॉलेज के दंत विभाग में जांच के साथ ही कई रोग के इलाज की सुविधा नहीं है। जबड़े के लिए ओपीजी जांच, दांत के एक्स-रे, आरटीसी, दांत की कैपिंग, दांत में तार बांधने, दांत लगाने, ट्यूटमर, सिस्ट, दुर्घटना में जबड़ा टूटने, होंठ कटने सहित अन्य इलाज की व्यवस्था नहीं है। टांका लगाने का भी इंतजाम नहीं है। इसके लिए मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है।
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दांत के इलाज के लिए अस्पताल पहुंची। डॉक्टर ने दांत सड़ना बताया और एक्स-रे के बाद कैपिंग कराने को कहा, लेकिन यहां व्यवस्था नहीं है। मैं बाहर से जांच और इलाज कराने में असमर्थ हूं।
रीता मिश्र, रामनाथ देवरिया
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परिवार की महिला के दांत का इलाज कराने पहुंचा। दांत को बचाने के लिए आरसीटी कराने को कहा गया। पर यहां सुविधा नहीं है। बाहर ढाई से पांच हजार रुपये खर्च करना पड़ेगा।
शारदा यादव, खुखुंदू-- -- -- -- -- -- -- -- -- -
कोट
- दंत विभाग में मशीनों, उपकरणों और सामग्री मंगाने की प्रक्रिया की जा रही है। जल्द उपलब्ध हो जाएंगे। आने वाले दिनों में और सुविधाएं मिलने लगेंगी।
- डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में दंत रोगियों के लिए इलाज का आधा-अधूरा इंतजाम है। पर्ची कटवाने के बाद उनके दांत निकालने और सफाई की जा रही है। अन्य मरीजों को बाहरी इलाज और जांच का ही सहारा लेना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज से निजी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही है। महंगे इलाज में फंसकर वह फीस और दवा में मोटी रकम खर्च कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में संसाधन की कमी के कारण दंत रोगियों की पीड़ा दूर नहीं हो पा रही है। उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। दंत विभाग में प्रतिदिन करीब 80 मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। इसमें दांत में पस, सड़न, सूजन, पायरिया सहित अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज होते हैं, जिसमें आरसीटी, मसाला भरने पायरिया के मरीज अधिक होते हैं। डॉक्टर ओपीजी (आर्थों पेटोग्राम) जांच, एक्स-रे जांच लिखते हैं। पर सुविधा न होने से मरीजों को निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है। कंप्रेशर न होने से दांत की कटाई, दांत के नसों के इलाज के लिए आरसीटी (रूट केनाल ट्रीटमेंट) नहीं होता है। सड़े दांत भरने के लिए मसाला तथा चांदी भी नहीं है। इसके लिए मरीजों को निजी अस्पताल का सहारा लेेना पड़ रहा है, जिससे अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
पुराने संसाधनों से काम चलाया जा रहा है। इलेक्ट्रानिक की जगह डेंटल चेयर हाइड्रोलिक है। उसे ऊपर, नीचे करना पड़ता है। अल्ट्रासोनिक स्केल भी पुराना है, जो ठीक से काम नहीं करता है। औजार भी पुराने हैं, जो कुछ कम ही हैं। उन्हें हर बार ब्वॉयल करना पड़ता है।
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यह नहीं है सुविधा
मेडिकल कॉलेज के दंत विभाग में जांच के साथ ही कई रोग के इलाज की सुविधा नहीं है। जबड़े के लिए ओपीजी जांच, दांत के एक्स-रे, आरटीसी, दांत की कैपिंग, दांत में तार बांधने, दांत लगाने, ट्यूटमर, सिस्ट, दुर्घटना में जबड़ा टूटने, होंठ कटने सहित अन्य इलाज की व्यवस्था नहीं है। टांका लगाने का भी इंतजाम नहीं है। इसके लिए मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है।
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दांत के इलाज के लिए अस्पताल पहुंची। डॉक्टर ने दांत सड़ना बताया और एक्स-रे के बाद कैपिंग कराने को कहा, लेकिन यहां व्यवस्था नहीं है। मैं बाहर से जांच और इलाज कराने में असमर्थ हूं।
रीता मिश्र, रामनाथ देवरिया
परिवार की महिला के दांत का इलाज कराने पहुंचा। दांत को बचाने के लिए आरसीटी कराने को कहा गया। पर यहां सुविधा नहीं है। बाहर ढाई से पांच हजार रुपये खर्च करना पड़ेगा।
शारदा यादव, खुखुंदू
कोट
- दंत विभाग में मशीनों, उपकरणों और सामग्री मंगाने की प्रक्रिया की जा रही है। जल्द उपलब्ध हो जाएंगे। आने वाले दिनों में और सुविधाएं मिलने लगेंगी।
- डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस