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प्रोजेक्ट सारथी के माध्यम से सशक्त हो रहीं महिलाएं : अंशुमाली
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देवरिया। प्रोजेक्ट सारथी के संयोजक अंशुमाली द्विवेदी ने भोजपुरी और संस्कृत भाषा के विकास के लिए बड़ा अभियान चलाने की ठानी है। उन्होंने कारपोरेट जगत को साथ लाने और भोजपुरिया भाषी लोगों से भी सक्रिय होने की अपील की है।
कनाडा में एक भारतीय कंपनी में सीईओ रहे अंशुमान द्विवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर जहां कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ दी, वहीं देश की सेवा में अपने को समर्पित करने का संकल्प लिया है। विभिन्न कार्यक्रमों, स्वास्थ्य शिविर, महिला सशक्तीकरण, स्टार्टअप शुरू करने तथा अनेक सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से पूर्वांचल में खास पैठ बनाने की कोशिश शुरू की है। लार के इटहुरा हजाम निवासी अंशुमाली द्विवेदी ने बुधवार को सिविल लाइंस स्थित एक होटल में पत्रकारों से कहा कि उन्होंने एक कृषि स्टार्टअप की स्थापना की, जिसके माध्यम से वो उत्तर प्रदेश के लगभग 70 हजार किसानों से जुड़े हैं। इसी के साथ वो मां विंध्यवासिनी सेवा संस्थान के तत्वाधान में शुरू किए गए प्रोजेक्ट सारथी के माध्यम से जनपद में युवाओं और महिलाओं से जुड़ कर कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि हाल ही में अपनी माता स्व. रितु द्विवेदी के नाम पर छात्रवृत्ति शुरू की, जिसमें 10 वीं और 12वीं के मेधावी छात्रों को लेख प्रतियोगिता के माध्यम से चयनित किया जाता है। 10 वीं के छात्रों को पांच हजार रुपये तथा 12 वीं के छात्रों को दो वर्षों के लिए दस हजार रुपये प्रति वर्ष की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। संस्था की ओर से छात्रवृत्ति के लिए चयनित बच्चों की माताओं को भी सम्मानित किया गया, क्योंकि उनका मानना है कि किसी भी बच्चे की प्रथम शिक्षक उसकी माता ही होती है। तो बच्चे की सफलता में उनका योगदान ज्यादा होता है। आगे कहा कि महिलाओं को सशक्त करने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने प्रोजेक्ट सारथी के माध्यम से उन्होंने बैग सिलने का कार्य शुरू करवाया, जिसके लिए उन्होंने दिल्ली स्थित एक फैशन हाउस फबनेस्ट के संस्थापक दिवम जैन और उनकी टीम को अपने गांव पर आमंत्रित कर महिलाओं का प्रशिक्षण कार्यक्रम कराया।
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इस कार्यक्रम से सैकड़ों महिलाएं जुड़कर काम कर रही हैं और इनकी कार्य कुशलता को देखते हुए उन्हें अभी तक हजारों बैग के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। अंशुमाली का मानना है की युवाओं में सांस्कृतिक चेतना को उजागर करने का काम अगर अभी नहीं करेंगे तो युवा भटक जाएंगे। उनका सपना है कि किसान सशक्त बनें एवं युवाओं को भारतीय संस्कृति से पुनः जोड़ा जाए।
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कनाडा में एक भारतीय कंपनी में सीईओ रहे अंशुमान द्विवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर जहां कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ दी, वहीं देश की सेवा में अपने को समर्पित करने का संकल्प लिया है। विभिन्न कार्यक्रमों, स्वास्थ्य शिविर, महिला सशक्तीकरण, स्टार्टअप शुरू करने तथा अनेक सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से पूर्वांचल में खास पैठ बनाने की कोशिश शुरू की है। लार के इटहुरा हजाम निवासी अंशुमाली द्विवेदी ने बुधवार को सिविल लाइंस स्थित एक होटल में पत्रकारों से कहा कि उन्होंने एक कृषि स्टार्टअप की स्थापना की, जिसके माध्यम से वो उत्तर प्रदेश के लगभग 70 हजार किसानों से जुड़े हैं। इसी के साथ वो मां विंध्यवासिनी सेवा संस्थान के तत्वाधान में शुरू किए गए प्रोजेक्ट सारथी के माध्यम से जनपद में युवाओं और महिलाओं से जुड़ कर कार्य कर रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि हाल ही में अपनी माता स्व. रितु द्विवेदी के नाम पर छात्रवृत्ति शुरू की, जिसमें 10 वीं और 12वीं के मेधावी छात्रों को लेख प्रतियोगिता के माध्यम से चयनित किया जाता है। 10 वीं के छात्रों को पांच हजार रुपये तथा 12 वीं के छात्रों को दो वर्षों के लिए दस हजार रुपये प्रति वर्ष की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। संस्था की ओर से छात्रवृत्ति के लिए चयनित बच्चों की माताओं को भी सम्मानित किया गया, क्योंकि उनका मानना है कि किसी भी बच्चे की प्रथम शिक्षक उसकी माता ही होती है। तो बच्चे की सफलता में उनका योगदान ज्यादा होता है। आगे कहा कि महिलाओं को सशक्त करने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने प्रोजेक्ट सारथी के माध्यम से उन्होंने बैग सिलने का कार्य शुरू करवाया, जिसके लिए उन्होंने दिल्ली स्थित एक फैशन हाउस फबनेस्ट के संस्थापक दिवम जैन और उनकी टीम को अपने गांव पर आमंत्रित कर महिलाओं का प्रशिक्षण कार्यक्रम कराया।
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इस कार्यक्रम से सैकड़ों महिलाएं जुड़कर काम कर रही हैं और इनकी कार्य कुशलता को देखते हुए उन्हें अभी तक हजारों बैग के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। अंशुमाली का मानना है की युवाओं में सांस्कृतिक चेतना को उजागर करने का काम अगर अभी नहीं करेंगे तो युवा भटक जाएंगे। उनका सपना है कि किसान सशक्त बनें एवं युवाओं को भारतीय संस्कृति से पुनः जोड़ा जाए।