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Deoria News: पांच हजार में बता देंगे लड़का है या लड़की, पर हमारे बारे में किसी को न बताना

Tue, 22 Aug 2023 11:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Tue, 22 Aug 2023 11:25 PM IST
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Will tell in five thousand whether it is a boy or a girl, but do not tell anyone about us
देवरिया। भाई... गर्भ में लड़की है या लड़का, बता तो देंगे, लेकिन किसी से बताना मत। तुम्हारा काम हो जाएगा, इसके लिए अलग से फीस लगेगी। पांच हजार में बिल्कुल सही से पता चल जाएगा। शहर के कुछ अल्ट्रासाउंड केंद्रों के बाहर दलाल दंपतियों से कुछ इस तरह से ही सेटिंग कर रहे हैं। रकम देने के बाद अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है। लिंग के बारे में मौखिक सूचना दे दी जा रही है। लड़की होने पर गर्भ को गिराने का तरीका भी बता दिया जा रहा है। इस पूरे खेल में आशाओं और निजी अस्पतालों की भूमिका सबसे अधिक है।
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मंगलवार को कुछ अल्ट्रासाउंड केंद्रों की अमर उजाला ने पड़ताल की तो यह गंदी हकीकत निकल कर सामने आई। चंद रुपयों के लालच में मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रेग्नेंसी एक्ट की अनदेखी कर भ्रूण का लिंग परीक्षण और गर्भपात का खेल चलता मिला। दोपहर करीब एक बजे एक आशा कार्यकर्ता की मुलाकात गेट पर एक महिला से हुई। महिला के साथ दो छोटी बच्चियां भी थीं और पति भी साथ में था। बात-बात में आशा ने दंपती की नीयत समझ ली। महिला ने बताया कि दो लड़कियां हैं, दीदी इस बार डर लग रहा है, पता नहीं क्या होगा। इस पर आशा कार्यकर्ता अल्ट्रासाउंड कराने के लिए महिला को मेडिकल काॅलेज से कुछ दूरी पर एक मोहल्ले में लेकर चली गई। रास्ते में ही अल्ट्रासाउंड संचालक से मोबाइल के जरिए पांच हजार रुपये में लड़की या लड़का बताने का सौदा तय हो गया।
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करीब दो बजे शहर के एक प्रमुख मार्ग पर स्थित अल्ट्रासाउंड केंद्र में कुर्सी पर बैठा युवक एक महिला से लिंग परीक्षण के लिए पांच हजार रुपये की मांग करता मिला। रुपये कम होने का हवाला महिला ने दिया तो सौदा 3500 में तय हो गया। थोड़ी देर जांच के बाद महिला को बाहर भेज दिया गया। इसके बाद एक युवक अंदर से आया और उसने बता दिया कि गर्भ में क्या पल रहा है।
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कस्बों में भी हो रही है जांच
- बघौचघाट कस्बे में तीन अल्ट्रा साउंड केंद्रों की पड़ताल की गई तो पता चला कि बिहार के गोपालगंज जनपद की दो महिलाएं आईं थीं। जिन्हें एक बिचौलिए ने पहुंचाया था। इसमें एक को जांच में लड़की होने की बात बताई गई और उसे गर्भपात कराने की सलाह दी गई। इसके लिए बाकायदा एक निजी अस्पताल का पता भी बताया गया।









सिर्फ विषम परिस्थितियों में करा सकते हैं गर्भपात

पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) के नोडल अधिकारी डॉ. कार्तिकेय पांडेय के मुताबिक, एमटीपी एक्ट के तहत 12 सप्ताह तक की गर्भवती गर्भपात का निर्णय स्वयं ले सकती है। इसके अलावा कई शर्तें हैं। 12 से लेकर 24 सप्ताह के बीच गर्भवती को शर्तों के साथ गर्भपात कराने का अधिकार है। लेकिन, इसके लिए वाजिब वजह सीएमओ और उनकी कमेटी को बतानी होती है। अविवाहित के लिए यह समय सीमा 24 सप्ताह है।

जनपद में सिर्फ 42 अल्ट्रासाउंड केंद्र पंजीकृत
देवरिया। जिले में सिर्फ 42 अल्ट्रासाउंड केंद्र ही पंजीकृत हैं। इसके अलावा तकरीबन इतने ही बिना पंजीकरण के चल रहे हैं। गड़बड़ियां पंजीकृत और अपंजीकृत दोनों जगहों पर हो रहीं हैं। सबसे अधिक गड़बड़ी गली व मोहल्लों में खुले अल्ट्रासाउंड केंद्र वाले कर रहे हैं। जहां चंद रुपयों के लालच में लिंग परीक्षण किया जा रहा है।







जुर्माना और आजीवन कारावास तक हो सकती है
गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 के तहत गर्भधारण के पूर्व या बाद में लिंग चयन और जन्म से पहले कन्या भ्रूण हत्या के लिए लिंग परीक्षण कराना गुनाह है। भ्रूण परीक्षण के लिए सहयोग देना व विज्ञापन करना कानूनी अपराध है। इसके तहत तीन से पांच साल तक की जेल व दस हजार से एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। गर्भवती स्त्री का जबरदस्ती गर्भपात करवाना अपराध है। ऐसा करने पर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। धारा 313 के तहत गर्भवती महिला की मर्जी के बिना गर्भपात करवाने वाले को आजीवन कारावास या जुर्माने से भी दंडित किया जा सकता है। धारा 314 के तहत गर्भपात करने के मकसद से किए गए कार्यों से अगर महिला की मौत हो जाती है तो दस साल की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है। आईपीसी की धारा 315 के तहत शिशु को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के बाद उसकी मृत्यु मकसद से किया गया कार्य अपराध है, इस पर दस साल की सजा या जुर्माना दोनों हो सकता है।


अल्ट्रा साउंड केंद्रों की नियमित जांच की जाती है। एक सप्ताह पहले ही अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्र को पकड़ा गया था, जिसके खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इस तरह के कार्य में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. राजेश झा, सीएमओ
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