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Deoria News: सिलिंडर की किल्लत बढ़ी तो उपले बने सहारा
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देवरिया। ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे युद्ध का असर गांवों पर भी पड़ने लगा है। गैस सिलिंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और समय पर उपलब्ध न होने की समस्या ने ग्रामीण परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में जिले के अधिकांश गांवों में एक बार फिर से लोग पारंपरिक ईंधन गोबर के उपले पर भोजन बनाना शुरू कर दिया है।
गांवों में जगह-जगह उपलों के ढेर नजर आ रहे हैं। यह नजारा न सिर्फ अलग दिखता है, बल्कि एक बड़ी जरूरत की कहानी भी बयां करता है। बरहज के सोनाड़ी गांव की निशा देवी, दुर्गावती देवी, कबूतरी देवी, गायत्री देवी ने बताया कि आने वाले दिनों की चिंता में अभी से ईंधन का भंडारण कर रहे हैं, ताकि रसोई की आग बुझने न पाए। आने वाले दिनों में किसी भी घर में ईंधन के लिए किसी तरह की कोई समस्या न आने पाए। ग्रामीणों का कहना है कि सिलिंडर महंगा हो गया है और समय पर नहीं मिल रहा है। ऐसे में उपले ही सबसे सस्ता और भरोसेमंद सहारा हैं। कई परिवारों ने तो बड़े पैमाने पर उपले बनाकर जमा करना शुरू कर दिया है। यह ईंधन के लिए एक आत्मनिर्भर गांव की मिसाल हैं। खेतों के किनारे सजी उपलों की ये दीवारें आज आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन रही हैं। यह दृश्य दिखाता है कि कैसे गांव के लोग हर परिस्थिति में खुद को ढाल लेते हैं और अपने संसाधनों से समाधान निकाल लेते हैं।
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गांवों में जगह-जगह उपलों के ढेर नजर आ रहे हैं। यह नजारा न सिर्फ अलग दिखता है, बल्कि एक बड़ी जरूरत की कहानी भी बयां करता है। बरहज के सोनाड़ी गांव की निशा देवी, दुर्गावती देवी, कबूतरी देवी, गायत्री देवी ने बताया कि आने वाले दिनों की चिंता में अभी से ईंधन का भंडारण कर रहे हैं, ताकि रसोई की आग बुझने न पाए। आने वाले दिनों में किसी भी घर में ईंधन के लिए किसी तरह की कोई समस्या न आने पाए। ग्रामीणों का कहना है कि सिलिंडर महंगा हो गया है और समय पर नहीं मिल रहा है। ऐसे में उपले ही सबसे सस्ता और भरोसेमंद सहारा हैं। कई परिवारों ने तो बड़े पैमाने पर उपले बनाकर जमा करना शुरू कर दिया है। यह ईंधन के लिए एक आत्मनिर्भर गांव की मिसाल हैं। खेतों के किनारे सजी उपलों की ये दीवारें आज आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन रही हैं। यह दृश्य दिखाता है कि कैसे गांव के लोग हर परिस्थिति में खुद को ढाल लेते हैं और अपने संसाधनों से समाधान निकाल लेते हैं।
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