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Independence Day: अंग्रेजों का अत्याचार बढ़ा तो विश्वनाथ उपाध्याय ने उठा लिया था विद्रोह का झंडा

Mon, 15 Aug 2022 10:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया।
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 15 Aug 2022 10:15 AM IST
सार

20 जुलाई 1942 को बरहज में मुखबिर की सूचना से गिरफ्तार हो गए। मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए गए। मजिस्ट्रेट ने उन्हें माफी मांगने को कहा, लेकिन उन्होंने माफी मांगने से इन्कार कर दिया। उनको गोरखपुर जेल भेज दिया गया। जेल में 6 माह 23 दिन सजा काटने के बाद रिहा कर दिए गए।

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vishwa nath upadhyay revolted against of britishers when torture ncreased
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विश्वनाथ उपाध्याय (फाइल) - फोटो : SALEMPUR

विस्तार

आजादी की लड़ाई में सलेमपुर क्षेत्र का भी अविस्मरणीय योगदान है। जब इस इलाके में अंग्रेजों का अत्याचार बढ़ने लगा तो मनिहारी गांव के जमींदार परिवार के नौजवान विश्वनाथ उपाध्याय इसको सहन नहीं कर सके। बाबा राघवदास के नेतृत्व में आजादी की लड़ाई में कूद पड़े और अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजा दिया था।
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पिता पंडित दुर्गा प्रसाद उपाध्याय व माता रेशमा देवी के इकलौते पुत्र विश्वनाथ उपाध्याय ने देश की आजादी के लिए सभी सुख-सुविधाओं का त्याग कर दिया। एकमात्र बहन कमला देवी ने भी भाई का हौसला कम नहीं होने दिया। अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान विश्वनाथ उपाध्याय ने साथियों के साथ सलेमपुर में रेल की पटरी उखाड़ दी। अंग्रेज सिपाही उनको खोजने लगे। कई बार घर पर छापा मारा गया, लेकिन वह पकड़ में नहीं गए।
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20 जुलाई 1942 को बरहज में मुखबिर की सूचना से गिरफ्तार हो गए। मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए गए। मजिस्ट्रेट ने उन्हें माफी मांगने को कहा, लेकिन उन्होंने माफी मांगने से इन्कार कर दिया। उनको गोरखपुर जेल भेज दिया गया। जेल में 6 माह 23 दिन सजा काटने के बाद रिहा कर दिए गए।
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उनके पुत्र प्रधानाध्यापक अतुल उपाध्याय बताते हैं कि कवि हृदय व बाबा राघवदास के सानिध्य का उनके जीवन पर भरपूर असर था। शिक्षा के प्रति लगाव के कारण उन्होंने कई शिक्षण संस्थान खोले व कई किताबें लिखीं। युग संधान उनकी प्रमुख कृति रही।


आजादी के वीर योद्धा विश्वनाथ उपाध्याय 15 अगस्त 2007 को अपने विद्यालय पर झंडारोहण के समय राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देते हुए चिर निद्रा में सो गए। उनके देहावसान के बाद विद्यालय में स्थापित प्रतिमा का कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी ने अनावरण कर वीर सेनानी के त्याग व तपस्या को नमन किया।


 
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