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यूरिया कालाबाजारी: गलती एक जैसी कार्रवाई अलग-अलग
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यूरिया कालाबाजारी: गलती एक जैसी कार्रवाई अलग-अलग
देवरिया। जिले में यूरिया कालाबाजारी करने वाले 20 उर्वरक विक्रेताओं और सचिव की गलती एक जैसी है, लेकिन कार्रवाई अलग-अलग हुई है। सचिवों पर जहां केस दर्ज कराया गया है, वहीं तीन दुकानदारों को छोड़ बाकी की दुकानें निलंबित कर खानापूर्ति की गई है। यह जिम्मेदार अफसरों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है।
भूमिहीन, अपने परिवार और खेती किसानी से नाता नहीं रखने वालों को जिले में यूरिया बेच दिया गया। बड़े पैमाने पर जिले में हुई यूरिया की कालाबाजारी की जानकारी यहां के अफसरों को नहीं हुई। यूरिया की कालाबाजारी करने वाले 20 दुकानदारों और समिमियों की सूची केंद्रीय टीम ने जिला प्रशासन को भेजा। डीएम के निर्देश पर पांच सदस्यीय टीम ने जांच की तो यूरिया की कालाबाजारी की पुष्टि हुई। इसमें पांच साधन सहकारी समिति के सचिव भी शामिल हैं और बाकी उर्वरक विक्रेता हैं।
अफसरों ने पांच सचिव और सिर्फ तीन दुकानदारों पर केस दर्ज कराया। बाकी दुकानदारों में पांच का लाइसेंस निरस्त और 15 उर्वरक विक्रेताओं की दुकानें निलंबित कर दी गईं। दो तरह की कार्रवाई से साधन सहकारी समिति के सचिव लामबंद हो गए और सामूहिक रूप से 45 सचिव ने इस्तीफा दे दिया, हालांकि इनका इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं हुआ है। सचिवों का कहना है कि जब सभी उर्वरक विक्रेता और सचिव एक जैसी गलती किए हैं तो कार्रवाई में भेदभाव क्यों किया गया है। बुढ़ापे में सचिव जेल जाएंगे और दुकानदारों की सिर्फ लाइसेंस निरस्त हुई है। सचिव को भी निलंबित कर दिया गया होता। यूरिया की कालाबाजारी में कृषि विभाग के अफसर की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
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-केंद्र सरकार की ओर से जो सूची आई थी। उसी आधार पर जांच कर कार्रवाई की गई। कार्रवाई जो भी हुई है वह डीएम के निर्देश पर हुई है। कोई भेदभाव नहीं किया गया है। सचिवों की ओर से लगाए गए आरोप निराधार हैं।
- मुहम्मद मोजम्मिल, जिला कृषि अधिकारी
-कार्रवाई में भेदभाव हुई है। रजिस्टर पर किसानों का नाम-पता सचिव दर्ज किए हैं। इसका भी सत्यापन होना चाहिए। जिला कृषि अधिकारी डीएम को गुमराह कर सिर्फ सचिवों पर केस दर्ज कराएं हैं। बाकी दुकानदारों को बचाने के लिए सिर्फ खानापूर्ति की गई है। सचिवों पर दर्ज केस को वापस कराया जाए।
- भूपेंद्र नाथ यादव, जिलाध्यक्ष, संयुक्त सहकारी समिति कर्मचारी संघ
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देवरिया। जिले में यूरिया कालाबाजारी करने वाले 20 उर्वरक विक्रेताओं और सचिव की गलती एक जैसी है, लेकिन कार्रवाई अलग-अलग हुई है। सचिवों पर जहां केस दर्ज कराया गया है, वहीं तीन दुकानदारों को छोड़ बाकी की दुकानें निलंबित कर खानापूर्ति की गई है। यह जिम्मेदार अफसरों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है।
भूमिहीन, अपने परिवार और खेती किसानी से नाता नहीं रखने वालों को जिले में यूरिया बेच दिया गया। बड़े पैमाने पर जिले में हुई यूरिया की कालाबाजारी की जानकारी यहां के अफसरों को नहीं हुई। यूरिया की कालाबाजारी करने वाले 20 दुकानदारों और समिमियों की सूची केंद्रीय टीम ने जिला प्रशासन को भेजा। डीएम के निर्देश पर पांच सदस्यीय टीम ने जांच की तो यूरिया की कालाबाजारी की पुष्टि हुई। इसमें पांच साधन सहकारी समिति के सचिव भी शामिल हैं और बाकी उर्वरक विक्रेता हैं।
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अफसरों ने पांच सचिव और सिर्फ तीन दुकानदारों पर केस दर्ज कराया। बाकी दुकानदारों में पांच का लाइसेंस निरस्त और 15 उर्वरक विक्रेताओं की दुकानें निलंबित कर दी गईं। दो तरह की कार्रवाई से साधन सहकारी समिति के सचिव लामबंद हो गए और सामूहिक रूप से 45 सचिव ने इस्तीफा दे दिया, हालांकि इनका इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं हुआ है। सचिवों का कहना है कि जब सभी उर्वरक विक्रेता और सचिव एक जैसी गलती किए हैं तो कार्रवाई में भेदभाव क्यों किया गया है। बुढ़ापे में सचिव जेल जाएंगे और दुकानदारों की सिर्फ लाइसेंस निरस्त हुई है। सचिव को भी निलंबित कर दिया गया होता। यूरिया की कालाबाजारी में कृषि विभाग के अफसर की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
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-केंद्र सरकार की ओर से जो सूची आई थी। उसी आधार पर जांच कर कार्रवाई की गई। कार्रवाई जो भी हुई है वह डीएम के निर्देश पर हुई है। कोई भेदभाव नहीं किया गया है। सचिवों की ओर से लगाए गए आरोप निराधार हैं।
- मुहम्मद मोजम्मिल, जिला कृषि अधिकारी
-कार्रवाई में भेदभाव हुई है। रजिस्टर पर किसानों का नाम-पता सचिव दर्ज किए हैं। इसका भी सत्यापन होना चाहिए। जिला कृषि अधिकारी डीएम को गुमराह कर सिर्फ सचिवों पर केस दर्ज कराएं हैं। बाकी दुकानदारों को बचाने के लिए सिर्फ खानापूर्ति की गई है। सचिवों पर दर्ज केस को वापस कराया जाए।
- भूपेंद्र नाथ यादव, जिलाध्यक्ष, संयुक्त सहकारी समिति कर्मचारी संघ