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13 दिन चुनौतियों से जूझकर यूक्रेन से घर लौटीं उपासना

Tue, 08 Mar 2022 10:41 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 10:41 PM IST
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Upasana returned home from Ukraine after battling challenges for 13 days
यूक्रेन से लौटी उपासना पांडेय। - फोटो : DEORIA
13 दिन चुनौतियों से जूझकर यूक्रेन से घर लौटीं उपासना
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देवरिया। मेडिकल की पढ़ाई करने गई उपासना पांडेय यूक्रेन के खारकीव में फंस गई थीं। तकरीबन 13 दिन बाद वह चुनौतियों से जूझते हुए मंगलवार को घर पहुंचीं। घर पर मां ने आरती उतारकर बेटी का स्वागत किया। उपासना का कहना है कि वह तो घर आ गईं, लेकिन उनकी तरह कई विद्यार्थी अभी यूक्रेन के विभिन्न शहरों में फंसे हैं। कोई घायल है तो किसी ने बंकर में शरण ली है। उनकी मदद केंद्र सरकार को करनी चाहिए। साथ ही मेडिकल विद्यार्थियों के लिए अपने देश में पढ़ाई का इंतजाम होना चाहिए।
बीआरडी इंटर कॉलेज की शिक्षक अन्नपूर्णा पांडेय की बेटी उपासना पांडेय यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थीं। उन्हें पता लगा कि युद्ध के आसार हैं तो उन्होंने दूतावास में और अपने प्रोफेसर से बात की और घर वापस आने के लिए हवाई जहाज का टिकट 26 फरवरी का कराया। 24 फरवरी को ही बमबारी होने लगी। उसके कारण मेडिकल विश्वविद्यालय के हास्टल के बंकर में करीब 700 छात्र एकत्रित हो गए। खाने का संकट भी पैदा हो गया है। किसी तरह दो मार्च तक विद्यार्थी बंकर में छिपे रहे। विश्वविद्यालय के ऊपर दोबारा बम गिरने के बाद बमबारी के बीच में ही किसी तरह दस किमी दूर रेलवे स्टेशन पैदल छिप-छिपकर पहुंचे, लेकिन वहां ट्रेन में भारतीय विद्यार्थियों को धक्का देकर उतार दिया गया। ऐसे में विद्यार्थी रेलवे स्टेशन पर फंस गए। उपासना ने बताया कि समझ में नहीं आ रहा था कि हम लोग क्या करें। भय में समय काट रहे थे। बमों की आवाज से उन्हें अपने जीवन का भय सता रहा था।
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इसी बीच दो मार्च को एंबेसी की एडवाइजरी में कहा गया है कि तुरंत आप लोग खारकीव छोड़ दें। ऐसे में पैदल 700 विद्यार्थी पिसोचिन पहुंचे, जहां रास्ते में आर्मी ने फायरिंग की। दो चेक प्वाइंट से वह किसी तरह होकर गुजरे। वहां एक दिन ठहरने के बाद वह बस रिजर्व कर रोमानिया बार्डर पर 36 घंटे बिना खाएं पिए किसी तरह पहुंचे, जहां पीयूष वर्मा नामक एक आईएसएफ अफसर ने मदद कर दूसरी बस से बार्डर पर विद्यार्थियों को भेजवाया। बार्डर पर पहुंचने के बाद उनसे मिलने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, रोमानिया बार्डर पर मिले। वहां केंद्र सरकार ने जहाज से दिल्ली भेजा, वहां से बस से बुधवार को वह गोरखपुर पहुंचीं, जहां से परिवार के लोग घर लेकर आए। उपासना पांडेय का कहना है कि दो वर्ष का कोर्स पूरा हो चुका है। अब मेडिकल की पढ़ाई के भविष्य की चिंता सता रही है।
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