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Deoria News: ट्रेन से घूमने की इच्छा में घर से भागे दो नाबालिग
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संवाद न्यूज एजेंसी
भाटपाररानी।
क्षेत्र के शंकरपुरा गांव से रविवार दोपहर गायब हुए दो नाबालिग छात्रों को खोजने में जहां पुलिस और परिवार वाले घंटों हलकान रहे वे ट्रेन से घूमने की इच्छा से घरवालों को बिना बताए चले गए थे। वे ट्रेन से गोरखपुर और सिवान होते हुए वापस सलेमपुर पहुंच थे, जहां उन्हें बरामद कर लिया गया।
किशोर छात्र सत्यम मणि तिवारी और विजय कुमार चौहान ने बताया कि उन्हें बहुत दिनों से ट्रेन में घूमने का मन कर रहा था। इसलिए वे रविवार को साइकिल से भाटपाररानी आए। वहां गांव के एक दुकानदार के यहां साइकिल रखकर स्टेशन पर गए। स्टेशन पर ट्रेन खड़ी थी। उसमें बैठ गए। पूछने पर यात्रियों ने बताया कि यह मौर्य एक्सप्रेस ट्रेन है और गोरखपुर तक ही जाएगी। फिर हम लोग शाम को गोरखपुर पहुंचे। वहां उतरे और पूछे कि कौन ट्रेन सलेमपुर, भटनी जाएगी। लोगों ने बताया कि 6:30 बजे एक ट्रेन खुलेगी। हम लोग उस ट्रेन का पता कर उसमें बैठ गए। थोड़ी देर में सो गए, जब नींद खुली तो पता चला कि सिवान पहुंच गए हैं। दूसरे दिन सिवान से हम लोग भटनी आए और वहां से सलेमपुर जाने वाली ट्रेन में बैठकर सलेमपुर चले गए। वहां इधर-उधर घूम रहे थे और भूजा खा रहे थे। इसी बीच उन्हें तलाश रहे गांव के लड़कों की निगाह पड़ी और उसके बाद वे लोग घर पहुंच गए। परिजनों ने बताया कि थाने में मुकदमा दर्ज हो गया था। इसलिए हम लोग बयानहल्फी देकर थाने से मुकदमा वापस ले लिए।
भाटपाररानी।
क्षेत्र के शंकरपुरा गांव से रविवार दोपहर गायब हुए दो नाबालिग छात्रों को खोजने में जहां पुलिस और परिवार वाले घंटों हलकान रहे वे ट्रेन से घूमने की इच्छा से घरवालों को बिना बताए चले गए थे। वे ट्रेन से गोरखपुर और सिवान होते हुए वापस सलेमपुर पहुंच थे, जहां उन्हें बरामद कर लिया गया।
किशोर छात्र सत्यम मणि तिवारी और विजय कुमार चौहान ने बताया कि उन्हें बहुत दिनों से ट्रेन में घूमने का मन कर रहा था। इसलिए वे रविवार को साइकिल से भाटपाररानी आए। वहां गांव के एक दुकानदार के यहां साइकिल रखकर स्टेशन पर गए। स्टेशन पर ट्रेन खड़ी थी। उसमें बैठ गए। पूछने पर यात्रियों ने बताया कि यह मौर्य एक्सप्रेस ट्रेन है और गोरखपुर तक ही जाएगी। फिर हम लोग शाम को गोरखपुर पहुंचे। वहां उतरे और पूछे कि कौन ट्रेन सलेमपुर, भटनी जाएगी। लोगों ने बताया कि 6:30 बजे एक ट्रेन खुलेगी। हम लोग उस ट्रेन का पता कर उसमें बैठ गए। थोड़ी देर में सो गए, जब नींद खुली तो पता चला कि सिवान पहुंच गए हैं। दूसरे दिन सिवान से हम लोग भटनी आए और वहां से सलेमपुर जाने वाली ट्रेन में बैठकर सलेमपुर चले गए। वहां इधर-उधर घूम रहे थे और भूजा खा रहे थे। इसी बीच उन्हें तलाश रहे गांव के लड़कों की निगाह पड़ी और उसके बाद वे लोग घर पहुंच गए। परिजनों ने बताया कि थाने में मुकदमा दर्ज हो गया था। इसलिए हम लोग बयानहल्फी देकर थाने से मुकदमा वापस ले लिए।
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