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Deoria News: सरयू की रेत हाथ में लेकर राममंदिर निर्माण की खाई थी कसम, उसी दिन गिरा ढांचा
Sun, 14 Jan 2024 02:33 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 14 Jan 2024 02:33 PM IST
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-बस्ती जेल में 28 दिन सही यातनाएं, श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा पर जताई प्रसन्नता
भटनी।
क्षेत्र के चर्चित संत व कट्टर हिंदूवादी नेता श्रद्धानंद तिवारी ने अपनी पूरी जिंदगी श्रीराम के कामकाज व सेवा में गुजार दी। राम मंदिर की लड़ाई में परिवार की चिंता छोड़ साधु-संतों के साथ लग गए। कारसेवकों के साथ पुलिस की लाठियां खाईं, जेल में भी बंद रहे। इसके बाद भी मंदिर निर्माण की लड़ाई में हमेशा आगे रहे। अब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण ने उनकी आंखों में एक अलग ही लौ जगा दी है। वह अपनी टोली के साथ 24 को रामलला के दर्शन को जाने की तैयारी कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि 6 दिसंबर 1992 की सुबह उन्होंने और अन्य संतों ने अयोध्या में कारसेवकों के साथ सरयू नदी के बालू को हाथों में लेकर मंदिर निर्माण की शपथ ली थी। इसके बाद नदी के किनारे चबूतरे पर बैठ कर पूजा करने लगे। इसी बीच करीब 11 बजे कारसेवकों ने विवादित ढांचा ध्वस्त कर दिया। इसके बाद श्रद्धानंद छह-सात साथियों के साथ ईंट लेकर वापस चल दिए। जिस समय गुंबज पर झंडारोहण हुआ उस समय श्रद्धानंद बस्ती जेल में थे। वे 28 दिन जेल में रहे इस दौरान तमाम यातनाएं झेली, लेकिन अब श्रीराम मंदिर बनने पर चेहरे पर खुशी है। वहीं नगर के हरिकीर्तन मोहल्ला निवासी मोहन लाल वर्मा ने बताया कि मंदिर आंदोलन की गवाही उनका शरीर आज भी देता है जिसपर पुलिस की लाठियों के निशान हैं। लेकिन अब श्रीराम मंदिर बनने से बहुत खुशी है।
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भटनी।
क्षेत्र के चर्चित संत व कट्टर हिंदूवादी नेता श्रद्धानंद तिवारी ने अपनी पूरी जिंदगी श्रीराम के कामकाज व सेवा में गुजार दी। राम मंदिर की लड़ाई में परिवार की चिंता छोड़ साधु-संतों के साथ लग गए। कारसेवकों के साथ पुलिस की लाठियां खाईं, जेल में भी बंद रहे। इसके बाद भी मंदिर निर्माण की लड़ाई में हमेशा आगे रहे। अब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण ने उनकी आंखों में एक अलग ही लौ जगा दी है। वह अपनी टोली के साथ 24 को रामलला के दर्शन को जाने की तैयारी कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि 6 दिसंबर 1992 की सुबह उन्होंने और अन्य संतों ने अयोध्या में कारसेवकों के साथ सरयू नदी के बालू को हाथों में लेकर मंदिर निर्माण की शपथ ली थी। इसके बाद नदी के किनारे चबूतरे पर बैठ कर पूजा करने लगे। इसी बीच करीब 11 बजे कारसेवकों ने विवादित ढांचा ध्वस्त कर दिया। इसके बाद श्रद्धानंद छह-सात साथियों के साथ ईंट लेकर वापस चल दिए। जिस समय गुंबज पर झंडारोहण हुआ उस समय श्रद्धानंद बस्ती जेल में थे। वे 28 दिन जेल में रहे इस दौरान तमाम यातनाएं झेली, लेकिन अब श्रीराम मंदिर बनने पर चेहरे पर खुशी है। वहीं नगर के हरिकीर्तन मोहल्ला निवासी मोहन लाल वर्मा ने बताया कि मंदिर आंदोलन की गवाही उनका शरीर आज भी देता है जिसपर पुलिस की लाठियों के निशान हैं। लेकिन अब श्रीराम मंदिर बनने से बहुत खुशी है।
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