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यूक्रेन से लौटा छात्र, बोला- हर तरफ दिख रहा था तबाही का मंजर’
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यूक्रेन से लौटा छात्र, बोला- हर तरफ दिख रहा था तबाही का मंजर’
बघौचघाट। यूक्रेन के खारकीव से शनिवार की रात घर लौटे जनपद निवासी व एमबीबीएस के छात्र ताहिर ने बताया कि मौत के मुंह से हम बच कर आए हैं। यूक्रेन में वह ऐसा लम्हा था, जिसे हम कभी भूल नहीं पाएंगे। हर तरफ तबाही का मंजर आंखों के सामने दिखाई पड़ रहा था। बिस्कुट, नमकीन खाकर कई दिन गुजारे और 25 किलोमीटर पैदल चलकर रेलवे स्टेशन पहुंचा। उन्होंने कहा कि एमबीबीएस की डिग्री मिले या न मिले, जिंदगी बच गई, यह बड़ी बात है।
तरकुलवा थाना क्षेत्र के रामपुर शुक्ल गांव निवासी ताहिर अंसारी पुत्र मोहम्मद हनीफ यूक्रेन के खारकीव शहर से एमबीबीएस कर रहे थे। उनकी चार साल की पढ़ाई हो गई है। अंतिम साल बचा है। उन्होंने बताया कि सायरन बजते ही बंकर में भागना पड़ता था। एक हाथ में शैक्षिक अभिलेख और दूसरे में पानी और जीने भर का खाना होता था। घंटे तक भूखे-प्यासे बंकर में गुजारना पड़ा। बंकर में मोबाइल के सिग्नल नहीं मिलते थे। चारों तरफ से बंद होने के कारण घुटन महसूस होती थी।
ताहिर, यूक्रेन-रूस युद्ध के बारे में बताते हुए कांप उठे। उन्होंने बताया कि जब बम, गोले गिर रहे थे तो सिर्फ यही लगता था कि मौत करीब आ रही है। दस दिनों से बिस्कुट, नमकीन खाकर जीवन बिता रहे थे। जहाजों की आवाज और बम धमाकों से दिल दहल जाता था। सिर्फ यही लग रहा था कि अब परिवार से मुलाकात नहीं हो पाएगी। कमरे में रो-रोकर आंखें सूज गई थीं। फिर भी हमने ठान लिया कि मौत सामने है तो क्यों न जीवन बचाने के लिए जोर लगाएं। फिर रात के अंधेरे में खारकीव से पैदल ही निकल लिए और 25 किलोमीटर चलने के बाद बोमजाल रेलवे स्टेशन पहुंचा गया। वहां से लबीब पहुंचा। लबीब से चोप स्टेशन पहुंचकर, मिनी बस से हंगरी पहुंच गया। हंगरी से फ्लाइट से दिल्ली पहुंचकर परिजनों को बताया कि मैं भारत आ गया।
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बघौचघाट। यूक्रेन के खारकीव से शनिवार की रात घर लौटे जनपद निवासी व एमबीबीएस के छात्र ताहिर ने बताया कि मौत के मुंह से हम बच कर आए हैं। यूक्रेन में वह ऐसा लम्हा था, जिसे हम कभी भूल नहीं पाएंगे। हर तरफ तबाही का मंजर आंखों के सामने दिखाई पड़ रहा था। बिस्कुट, नमकीन खाकर कई दिन गुजारे और 25 किलोमीटर पैदल चलकर रेलवे स्टेशन पहुंचा। उन्होंने कहा कि एमबीबीएस की डिग्री मिले या न मिले, जिंदगी बच गई, यह बड़ी बात है।
तरकुलवा थाना क्षेत्र के रामपुर शुक्ल गांव निवासी ताहिर अंसारी पुत्र मोहम्मद हनीफ यूक्रेन के खारकीव शहर से एमबीबीएस कर रहे थे। उनकी चार साल की पढ़ाई हो गई है। अंतिम साल बचा है। उन्होंने बताया कि सायरन बजते ही बंकर में भागना पड़ता था। एक हाथ में शैक्षिक अभिलेख और दूसरे में पानी और जीने भर का खाना होता था। घंटे तक भूखे-प्यासे बंकर में गुजारना पड़ा। बंकर में मोबाइल के सिग्नल नहीं मिलते थे। चारों तरफ से बंद होने के कारण घुटन महसूस होती थी।
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ताहिर, यूक्रेन-रूस युद्ध के बारे में बताते हुए कांप उठे। उन्होंने बताया कि जब बम, गोले गिर रहे थे तो सिर्फ यही लगता था कि मौत करीब आ रही है। दस दिनों से बिस्कुट, नमकीन खाकर जीवन बिता रहे थे। जहाजों की आवाज और बम धमाकों से दिल दहल जाता था। सिर्फ यही लग रहा था कि अब परिवार से मुलाकात नहीं हो पाएगी। कमरे में रो-रोकर आंखें सूज गई थीं। फिर भी हमने ठान लिया कि मौत सामने है तो क्यों न जीवन बचाने के लिए जोर लगाएं। फिर रात के अंधेरे में खारकीव से पैदल ही निकल लिए और 25 किलोमीटर चलने के बाद बोमजाल रेलवे स्टेशन पहुंचा गया। वहां से लबीब पहुंचा। लबीब से चोप स्टेशन पहुंचकर, मिनी बस से हंगरी पहुंच गया। हंगरी से फ्लाइट से दिल्ली पहुंचकर परिजनों को बताया कि मैं भारत आ गया।
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