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Deoria News: दूसरी मौत के बाद सहम गए हैं नाविकों के परिवार वाले
Fri, 25 Sep 2026 12:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 25 Sep 2026 12:08 AM IST
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पैकौली। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के दौरान समुद्री जहाजों पर काम करने वाले कर्मचारी दहशत में नौकरी कर रहे हैं। जहाजों पर कभी भी हमला होने की आशंका से कई कर्मचारी घर लौट आए हैं। युद्ध पूरी तरह थमने के बाद ही दोबारा जहाज पर जाने की बात कह रहे हैं। वहीं कई लोग ऐसे भी हैं जो इन्हीं चुनौतियों के बीच काम कर रहे हैं। बटुलही गांव निवासी इंद्रजीत चौहान समुद्री जहाज पर फिटर का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि जून 2026 में वे लोग सऊदी अरब से राशन लेकर होर्मुज की ओर जा रहे थे। अभी रास्ते में थे, तभी पता चला कि अमेरिका ने एक जहाज पर हमला कर दिया है। इसके बाद वे लोग अपने जहाज को आगे ले जाने के बजाय रास्ते से ही वापस लौट आए।
इंद्रजीत चाैहान ने बताया कि उनकी कंपनी के चार-पांच जहाज होर्मुज में फंसे थे। उनके साथ पाकिस्तान और बांग्लादेश के कर्मचारी भी थे। सभी ने रास्ते में ही उतारने की मांग की, जिसके बाद वे घर लौट आए। अब युद्ध समाप्त होने के बाद ही दोबारा जाएंगे। सुरौली गांव निवासी अंकित शाही ने बताया कि वह दिसंबर 2025 में मुंबई से समुद्री जहाज पर नौकरी करने गए थे। जून में जब अमेरिकी हमला हुआ, उस समय उनका जहाज होर्मुज में फंसा था। हर समय डर लगा रहता था कि कहीं जहाज पर हमला न हो जाए। युद्धविराम की घोषणा के बीच कुछ राहत मिली थी मगर दोबारा तनाव बढ़ने पर दहशत हो जाती है।
अंकित ने बताया कि जहाज पर काम करने वाले सभी लोग जल्द से जल्द घर लौटना चाहते थे। उनके साथ काम करने वाले कई कर्मचारी इस समय घर आ चुके हैं और युद्ध बंद होने का इंतजार कर रहे हैं।
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इंद्रजीत चाैहान ने बताया कि उनकी कंपनी के चार-पांच जहाज होर्मुज में फंसे थे। उनके साथ पाकिस्तान और बांग्लादेश के कर्मचारी भी थे। सभी ने रास्ते में ही उतारने की मांग की, जिसके बाद वे घर लौट आए। अब युद्ध समाप्त होने के बाद ही दोबारा जाएंगे। सुरौली गांव निवासी अंकित शाही ने बताया कि वह दिसंबर 2025 में मुंबई से समुद्री जहाज पर नौकरी करने गए थे। जून में जब अमेरिकी हमला हुआ, उस समय उनका जहाज होर्मुज में फंसा था। हर समय डर लगा रहता था कि कहीं जहाज पर हमला न हो जाए। युद्धविराम की घोषणा के बीच कुछ राहत मिली थी मगर दोबारा तनाव बढ़ने पर दहशत हो जाती है।
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अंकित ने बताया कि जहाज पर काम करने वाले सभी लोग जल्द से जल्द घर लौटना चाहते थे। उनके साथ काम करने वाले कई कर्मचारी इस समय घर आ चुके हैं और युद्ध बंद होने का इंतजार कर रहे हैं।
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