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मंडियां खत्म होने से आढ़तियों की रोजी-रोटी छीन जाएगी : धर्मेंद्र
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मंडियां खत्म होने से आढ़तियों की रोजी-रोटी छीन जाएगी : धर्मेंद्र
देवरिया। लोकसभा व राज्यसभा से पास हो चुके कृषि बिल के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शनिवार को जिले भर में विरोध-प्रदर्शन किया। शहर में जिलाध्यक्ष की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपकर कृषि कानून वापस लेने की मांग की। कार्यकर्ताओं ने कहा कि मंडियां खत्म होने से आढ़तियों, मजदूर, मुनीम, ढुलाईदार की की रोजी-रोटी छीन जाएगी।
जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार तीन काले कानून के माध्यम से देश की हरित क्रांति को हराने की साजिश कर रही है। देश के अन्नदाताओं की मेहनत को चंद पूंजीपतियों के हाथों गिरवी रखने का प्रयास किया जा रहा है। देश भर के 62 करोड़ किसान, मजदूर व 250 से अधिक किसान संगठन काले कानून के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। सरकार किसानों के एतराज को दरकिनार कर देश को बरगलाने में जुटी है। अनाज और सब्जी मंडी को खत्म करने से कृषि उपज खरीद व्यवस्था पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। किसानों को न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा न ही बाजार भाव के अनुसार फसल की कीमत। मंडियां खत्म होने से अनाज-सब्जी मंडी में काम करने वाले मजदूर, आढ़तियों, मुनीम, ढुलाईदार आदि की रोजी-रोटी छीन जाएगी। इस दौरान सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी, बृजनारायण मिश्र, कृष्णकांत शुक्ल, प्रेमलाल भारती, धर्मेंद्र कुमार पांडेय, राजकुमार जायसवाल, दयाशंकर पति द्विवेदी, सुबाष राय, जयदीप त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
उधर, भाटपाररानी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शनिवार को कृषि बिल के खिलाफ राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम ध्रुव कुमार शुक्ला को सौंपा। जिला महासचिव जगन्नाथ यादव ने कहा कि भारत सरकार की ओर से पारित कृषि बिल किसान विरोधी है। केंद्र सरकार इसे जबरन किसानों पर थोप रही है। आंदोलनकारी किसानों पर दिल्ली कूच करते समय पानी की बौछार और आंसू गैस के गोले दागना सरकार के किसान विरोधी मानसिकता को दर्शा रहा है। किसानों के साथ इस तरह का व्यवहार खेदजनक और लोकतंत्र के लिए कलंक है। इस दौरान सलीम अली नगर अध्यक्ष, जनार्दन, लल्लन ,मनीष ,गोविंद, इमरान, पवन कुमार आदि मौजूद रहे।
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देवरिया। लोकसभा व राज्यसभा से पास हो चुके कृषि बिल के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शनिवार को जिले भर में विरोध-प्रदर्शन किया। शहर में जिलाध्यक्ष की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपकर कृषि कानून वापस लेने की मांग की। कार्यकर्ताओं ने कहा कि मंडियां खत्म होने से आढ़तियों, मजदूर, मुनीम, ढुलाईदार की की रोजी-रोटी छीन जाएगी।
जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार तीन काले कानून के माध्यम से देश की हरित क्रांति को हराने की साजिश कर रही है। देश के अन्नदाताओं की मेहनत को चंद पूंजीपतियों के हाथों गिरवी रखने का प्रयास किया जा रहा है। देश भर के 62 करोड़ किसान, मजदूर व 250 से अधिक किसान संगठन काले कानून के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। सरकार किसानों के एतराज को दरकिनार कर देश को बरगलाने में जुटी है। अनाज और सब्जी मंडी को खत्म करने से कृषि उपज खरीद व्यवस्था पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। किसानों को न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा न ही बाजार भाव के अनुसार फसल की कीमत। मंडियां खत्म होने से अनाज-सब्जी मंडी में काम करने वाले मजदूर, आढ़तियों, मुनीम, ढुलाईदार आदि की रोजी-रोटी छीन जाएगी। इस दौरान सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी, बृजनारायण मिश्र, कृष्णकांत शुक्ल, प्रेमलाल भारती, धर्मेंद्र कुमार पांडेय, राजकुमार जायसवाल, दयाशंकर पति द्विवेदी, सुबाष राय, जयदीप त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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उधर, भाटपाररानी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शनिवार को कृषि बिल के खिलाफ राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम ध्रुव कुमार शुक्ला को सौंपा। जिला महासचिव जगन्नाथ यादव ने कहा कि भारत सरकार की ओर से पारित कृषि बिल किसान विरोधी है। केंद्र सरकार इसे जबरन किसानों पर थोप रही है। आंदोलनकारी किसानों पर दिल्ली कूच करते समय पानी की बौछार और आंसू गैस के गोले दागना सरकार के किसान विरोधी मानसिकता को दर्शा रहा है। किसानों के साथ इस तरह का व्यवहार खेदजनक और लोकतंत्र के लिए कलंक है। इस दौरान सलीम अली नगर अध्यक्ष, जनार्दन, लल्लन ,मनीष ,गोविंद, इमरान, पवन कुमार आदि मौजूद रहे।
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