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90 प्रतिशत आवेदन केवल 10 फीसदी ने दिए : राज्य सूचना आयुक्त
Wed, 22 Feb 2023 11:40 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 22 Feb 2023 11:40 PM IST
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राज्य सूचना आयुक्त ने कलक्ट्रेट सभागार में की आरटीआई प्रकरणों की सुनवाई।संवाद
कहा-व्यक्तिगत हित के आवेदनों की अधिकता से व्यापक लोकहित से जुड़े आवेदनों की प्रभावित होती है सुनवाई
पहले दिन 130 प्रकरणों की सुनवाई, 80 मामले निस्तारित, 23 व 24 फरवरी को भी होगी सुनवाई
एक ही व्यक्ति ने किए हैं दो दर्जन से अधिक विभागों में 485 आरटीआई आवेदन
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। राज्य सूचना आयुक्त सुभाष चंद्र सिंह ने बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में आरटीआई मामलों की सुनवाई की। उन्होंने 130 प्रकरणों की सुनवाई की। इसमें 80 का निस्तारण किया गया। दस मामलों का निस्तारण विलंब से सूचना देने पर जुर्माना के साथ किया गया। शेष प्रकरणों को निस्तारित करने के लिए सुरक्षित रखा गया है।
उन्होंने कहा कि गोरखपुर मंडल में आने वाले लगभग 90 प्रतिशत आरटीआई आवेदन गैरजरूरी हैं। इनका लोकहित से कोई सरोकार नहीं होता है। व्यक्तिगत हित साधने एवं प्रशासन पर अनुचित दबाव बनाने के इरादे से अधिकांश आरटीआई आवेदन डाले जा रहे हैं। ऐसे आरटीआई आवेदनों की अधिकता से व्यापक लोकहित से जुड़े आवेदनों की सुनवाई प्रभावित होती है। मंडल में 90 प्रतिशत से अधिक आरटीआई आवेदन महज दस लोगों ने डाले हैं।
राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि 24 फरवरी को जनपद में 485 आरटीआई आवेदनों की सुनवाई करेंगे। सभी आरटीआई आवेदन एक ही व्यक्ति द्वारा दो दर्जन से अधिक विभागों में दिए गए हैं। इन आवेदनों की वजह से विभागों को अपनी ऊर्जा एवं संसाधन बेवजह खर्च करना पड़ता है, जिससे विभागों का मूल कार्य प्रभावित होता है। ऐसे गैर जरूरी आरटीआई के आवेदनकर्ताओं को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न जनपदों में जाकर गुणदोष के आधार पर सुनवाई की जा रही है।
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उन्होंने कहा कि जन सूचना अधिकार अधिनियम-2005 की मूल भावना के तहत व्यापक जनहित, शासन-प्रशासन में पारदर्शिता लाने तथा भ्रष्टाचार में कमी लाने के लिए दिए गए आरटीआई आवेदनों की सुनवाई की जा रही है। ऐसे सकारात्मक आरटीआई आवेदनकर्ताओं ने शासन-प्रशासन की पारदर्शिता एवं कार्यकुशलता में वृद्धि की है। कहा कि सूचना अधिकार अधिनियम 2005 में निहित प्रावधानों के अनुसार 30 दिन के भीतर सूचना देना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि यह देखने में आता है कि जन सूचना अधिकार के तहत दिए जाने वाले आवेदन सही कार्यालय में नहीं पहुंचते है, जिससे सूचना मिलने में समस्या आती है। ऐसे आवेदनों का निपटारा पांच दिन में संबंधित विभाग को कर देना चाहिए। सूचना देते समय व्यापक लोकहित का ध्यान रखा जाए।
राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि वह माह में कम से कम दस दिन जनपदों में सुनवाई करेंगे। यहां 24 फरवरी तक तथा 25 फरवरी को कुशीनगर, 27 फरवरी को गोरखपुर एवं 28 फरवरी को महराजगंज जनपद में आरटीआई प्रकरणों की सुनवाई करेंगे।
इस दौरान एडीएम वित्त एवं राजस्व नागेंद्र कुमार सिंह, एसडीएम सौरभ सिंह, डीडीओ रविशंकर राय, बीएसए हरिश्चंद्र नाथ, ईओ रोहित सिंह, डीपीआरओ अविनाश कुमार, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी आरके सिंह, श्रम प्रवर्तन अधिकारी शशि सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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पहले दिन 130 प्रकरणों की सुनवाई, 80 मामले निस्तारित, 23 व 24 फरवरी को भी होगी सुनवाई
एक ही व्यक्ति ने किए हैं दो दर्जन से अधिक विभागों में 485 आरटीआई आवेदन
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। राज्य सूचना आयुक्त सुभाष चंद्र सिंह ने बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में आरटीआई मामलों की सुनवाई की। उन्होंने 130 प्रकरणों की सुनवाई की। इसमें 80 का निस्तारण किया गया। दस मामलों का निस्तारण विलंब से सूचना देने पर जुर्माना के साथ किया गया। शेष प्रकरणों को निस्तारित करने के लिए सुरक्षित रखा गया है।
उन्होंने कहा कि गोरखपुर मंडल में आने वाले लगभग 90 प्रतिशत आरटीआई आवेदन गैरजरूरी हैं। इनका लोकहित से कोई सरोकार नहीं होता है। व्यक्तिगत हित साधने एवं प्रशासन पर अनुचित दबाव बनाने के इरादे से अधिकांश आरटीआई आवेदन डाले जा रहे हैं। ऐसे आरटीआई आवेदनों की अधिकता से व्यापक लोकहित से जुड़े आवेदनों की सुनवाई प्रभावित होती है। मंडल में 90 प्रतिशत से अधिक आरटीआई आवेदन महज दस लोगों ने डाले हैं।
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राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि 24 फरवरी को जनपद में 485 आरटीआई आवेदनों की सुनवाई करेंगे। सभी आरटीआई आवेदन एक ही व्यक्ति द्वारा दो दर्जन से अधिक विभागों में दिए गए हैं। इन आवेदनों की वजह से विभागों को अपनी ऊर्जा एवं संसाधन बेवजह खर्च करना पड़ता है, जिससे विभागों का मूल कार्य प्रभावित होता है। ऐसे गैर जरूरी आरटीआई के आवेदनकर्ताओं को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न जनपदों में जाकर गुणदोष के आधार पर सुनवाई की जा रही है।
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उन्होंने कहा कि जन सूचना अधिकार अधिनियम-2005 की मूल भावना के तहत व्यापक जनहित, शासन-प्रशासन में पारदर्शिता लाने तथा भ्रष्टाचार में कमी लाने के लिए दिए गए आरटीआई आवेदनों की सुनवाई की जा रही है। ऐसे सकारात्मक आरटीआई आवेदनकर्ताओं ने शासन-प्रशासन की पारदर्शिता एवं कार्यकुशलता में वृद्धि की है। कहा कि सूचना अधिकार अधिनियम 2005 में निहित प्रावधानों के अनुसार 30 दिन के भीतर सूचना देना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि यह देखने में आता है कि जन सूचना अधिकार के तहत दिए जाने वाले आवेदन सही कार्यालय में नहीं पहुंचते है, जिससे सूचना मिलने में समस्या आती है। ऐसे आवेदनों का निपटारा पांच दिन में संबंधित विभाग को कर देना चाहिए। सूचना देते समय व्यापक लोकहित का ध्यान रखा जाए।
राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि वह माह में कम से कम दस दिन जनपदों में सुनवाई करेंगे। यहां 24 फरवरी तक तथा 25 फरवरी को कुशीनगर, 27 फरवरी को गोरखपुर एवं 28 फरवरी को महराजगंज जनपद में आरटीआई प्रकरणों की सुनवाई करेंगे।
इस दौरान एडीएम वित्त एवं राजस्व नागेंद्र कुमार सिंह, एसडीएम सौरभ सिंह, डीडीओ रविशंकर राय, बीएसए हरिश्चंद्र नाथ, ईओ रोहित सिंह, डीपीआरओ अविनाश कुमार, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी आरके सिंह, श्रम प्रवर्तन अधिकारी शशि सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।