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जेल में बंद गिरोह के सदस्यों से एसआईटी ने दर्ज किया बयान
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जेल में बंद गिरोह के सदस्यों से एसआईटी ने दर्ज किया बयान
देवरिया। अनुदानित विद्यालयों में फर्जी अनुमोदन पत्र के जरिए नियुक्ति कराने वाले गिरोह के तीन सदस्यों का बयान दर्ज करने के लिए एसआईटी (विशेष जांच दल) बृहस्पतिवार को जेल पहुंची। एसआइटी के प्रभारी व सदर सीओ श्रीयश ने तीनों आरोपियों का बयान दर्ज करने के बाद उनको पुलिस कस्टडी रिमांड का नोटिस भी दिया। रिमांड पर शुक्रवार को सीजेएम न्यायालय में सुनवाई होगी।
एसआईटी के प्रभारी ने सीजेएम न्यायालय में जेल में आरोपियों के बयान दर्ज करने और पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए प्रार्थना पत्र दिया। सीजेएम ने आरोपियों का बयान दर्ज करने के लिए आदेश दिया। एसआईटी के प्रभारी श्रीयश त्रिपाठी और कोतवाल राजू सिंह दोपहर 12 बजे जेल पहुंचे। फर्जी अनुमोदन पत्र तैयार कर वेतन व एरियर भुगतान करने के आरोपी ओमप्रकाश मिश्र निवासी अहिलवार बुजुर्ग, अजीत उपाध्याय निवासी पंचवटी नगर शिवपुर गोरखपुर, राजकुमार मणि निवासी बौरडीह थाना गौरी बाजार का बयान दर्ज किया। एसआईटी ने बीएसए आफिस से गायब हुए कागजात की बरामदगी के लिए रिमांड नोटिस तीनों को दिया। पुलिस कस्टडी रिमांड पर सीजेएम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई होगी। इसके बाद पुलिस इन सभी को रिमांड मिलने पर बीएसए आफिस के रजिस्टर व अभिलेखों के बारे में जानकारी लेगी, क्योंकि इससे जुड़े डिस्पैच पंजिका में जमकर हेराफेरी की गई है। 1 अप्रैल 1984 से पूर्व की डिस्पैच पंजिका व 1 अप्रैल 1987 से 13 मार्च 1989 तक की डिस्पैच पंजिका और 2010-11 तक का डिस्पैच पंजिका को इस गिरोह ने गायब कर दिया है।
अभिलेखों को बरामद करने को बीएसए आफिस जा सकती है एसआईटी
देवरिया। एसआईटी और एसटीएफ फर्जीवाड़े से जुड़े अभिलेखों की बरामदगी के लिए पुन: बीएसए कार्यालय कभी भी धमक सकती है। डिस्पैच से संबधित कुछ अभिलेखों के यहां के कर्मचारियों की मिलीभगत से गायब कर दिए जाने से जांच का दायरा प्रभावित हो रहा है। ऐसे में सभी आवश्यक कागजात की तलाश में टीमें लगी हैं। रिमांड मिलने पर आरोपियों की निशानदेही पर इस मामले से जुड़े कागजातों के बारे में सही जानकारी मिल सकेगी।
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लेखाधिकारी की गिरफ्तारी से खुलेगा मामला
इस मामले में बीएसए कार्यालय के लेखाधिकारी रहे जगदीश श्रीवास्तव फरार चल रहे हैं। उनका मोबाइल भी घटना के खुलासे के बाद से ही स्वीच ऑफ बता रहा है। जांच पड़ताल में जुटी एसआईटी को उनके मोबाइल का लोकेशन गैर प्रांत में मिला है। जबकि रिमांड पर लिए गए आरोपियों की पूछताछ में आशंका है कि इस मामले से जुड़े अन्य आरोपियों के नाम भी प्रकाश में आएंगे, जिससे गिरोह की जड़ तक पहुंचने में सफलता मिलेगी।
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देवरिया। अनुदानित विद्यालयों में फर्जी अनुमोदन पत्र के जरिए नियुक्ति कराने वाले गिरोह के तीन सदस्यों का बयान दर्ज करने के लिए एसआईटी (विशेष जांच दल) बृहस्पतिवार को जेल पहुंची। एसआइटी के प्रभारी व सदर सीओ श्रीयश ने तीनों आरोपियों का बयान दर्ज करने के बाद उनको पुलिस कस्टडी रिमांड का नोटिस भी दिया। रिमांड पर शुक्रवार को सीजेएम न्यायालय में सुनवाई होगी।
एसआईटी के प्रभारी ने सीजेएम न्यायालय में जेल में आरोपियों के बयान दर्ज करने और पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए प्रार्थना पत्र दिया। सीजेएम ने आरोपियों का बयान दर्ज करने के लिए आदेश दिया। एसआईटी के प्रभारी श्रीयश त्रिपाठी और कोतवाल राजू सिंह दोपहर 12 बजे जेल पहुंचे। फर्जी अनुमोदन पत्र तैयार कर वेतन व एरियर भुगतान करने के आरोपी ओमप्रकाश मिश्र निवासी अहिलवार बुजुर्ग, अजीत उपाध्याय निवासी पंचवटी नगर शिवपुर गोरखपुर, राजकुमार मणि निवासी बौरडीह थाना गौरी बाजार का बयान दर्ज किया। एसआईटी ने बीएसए आफिस से गायब हुए कागजात की बरामदगी के लिए रिमांड नोटिस तीनों को दिया। पुलिस कस्टडी रिमांड पर सीजेएम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई होगी। इसके बाद पुलिस इन सभी को रिमांड मिलने पर बीएसए आफिस के रजिस्टर व अभिलेखों के बारे में जानकारी लेगी, क्योंकि इससे जुड़े डिस्पैच पंजिका में जमकर हेराफेरी की गई है। 1 अप्रैल 1984 से पूर्व की डिस्पैच पंजिका व 1 अप्रैल 1987 से 13 मार्च 1989 तक की डिस्पैच पंजिका और 2010-11 तक का डिस्पैच पंजिका को इस गिरोह ने गायब कर दिया है।
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अभिलेखों को बरामद करने को बीएसए आफिस जा सकती है एसआईटी
देवरिया। एसआईटी और एसटीएफ फर्जीवाड़े से जुड़े अभिलेखों की बरामदगी के लिए पुन: बीएसए कार्यालय कभी भी धमक सकती है। डिस्पैच से संबधित कुछ अभिलेखों के यहां के कर्मचारियों की मिलीभगत से गायब कर दिए जाने से जांच का दायरा प्रभावित हो रहा है। ऐसे में सभी आवश्यक कागजात की तलाश में टीमें लगी हैं। रिमांड मिलने पर आरोपियों की निशानदेही पर इस मामले से जुड़े कागजातों के बारे में सही जानकारी मिल सकेगी।
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लेखाधिकारी की गिरफ्तारी से खुलेगा मामला
इस मामले में बीएसए कार्यालय के लेखाधिकारी रहे जगदीश श्रीवास्तव फरार चल रहे हैं। उनका मोबाइल भी घटना के खुलासे के बाद से ही स्वीच ऑफ बता रहा है। जांच पड़ताल में जुटी एसआईटी को उनके मोबाइल का लोकेशन गैर प्रांत में मिला है। जबकि रिमांड पर लिए गए आरोपियों की पूछताछ में आशंका है कि इस मामले से जुड़े अन्य आरोपियों के नाम भी प्रकाश में आएंगे, जिससे गिरोह की जड़ तक पहुंचने में सफलता मिलेगी।