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Deoria News: ड्रोन के सहारे सपनों को उड़ान दे रहीं सीमा
Sun, 14 Sep 2025 12:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 14 Sep 2025 12:03 AM IST
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कृषि ड्रोन के साथ सीमा गुप्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। सलेमपुर क्षेत्र के मझवलिया गांव निवासी सीमा गुप्ता ड्रोन के जरिये खेतों में दवा का छिड़काव कर अपनी आजीविका चला रही हैंं। इनका कहना है कि घर की मालकिन मैं हूं तो पूरे घर का खर्च भी उठाऊंगी।
सीमा का आम गृहिणी से आत्मनिर्भर बनने का सफर महिलाओं के लिए एक मिसाल है। कभी घर के खर्च की चिंता में डूबी सीमा आज न सिर्फ अपने परिवार का आर्थिक बोझ उठा रही हैं, बल्कि अतिरिक्त कमाई भी कर रही हैं। सीमा के पति गांव में किराना दुकान चलाते हैं। तीन बच्चों की परवरिश और घर का खर्च संभालना उनके लिए आसान नहीं था।
सीमा के मन में कुछ कर गुजरने की ललक थी। इसी चाह में साल 2020 में वह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ीं। जल्द ही वह एक स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष बनीं और फिर 22 समूहों की जिम्मेदारी संभालने वाली ‘’समूह सखी’’ भी हैं। अपने काम को लेकर वह अब भी दुविधा में थीं।
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सीमा की जिंदगी में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब 11 मार्च 2024 को उन्हें ‘’नमो ड्रोन दीदी योजना’’ के तहत एक कृषि ड्रोन मिला। इस ड्रोन की मदद से उन्होंने किसानों के खेतों में कीटनाशक और उर्वरक छिड़काव का काम शुरू किया।
शुरुआत में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनके पास सिर्फ एक ही बैटरी थी, जो डेढ़ एकड़ में छिड़काव के बाद खत्म हो जाती थी। इसे चार्ज करने में 45 मिनट लगते और बिजली की कमी भी काम में बाधा डालती।
कुछ दिन बाद अक्तूबर 24 में उनकी मुलाकात जागृति उद्यम केंद्र की टीम से हुई। इस टीम ने तकनीकी जानकारी और एक अतिरिक्त बैटरी दी। सीमा बताती हैं कि पहले वह अपने व्यवसाय को लेकर असमंजस में थी, मगर सही मार्गदर्शन मिलने के बाद उनका हौसला बढ़ गया।
सही दिशा मिलने से उन्हें अपने काम में सफलता मिली। आज सीमा अपने ड्रोन से सालाना एक से डेढ़ लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई कर रही हैं। उनकी सफलता ने न सिर्फ उनके परिवार को आर्थिक मजबूती दी है, बल्कि आसपास की महिलाओं को भी प्रेरित किया है। सीमा की यह कहानी दिखाती है कि अगर हौसला और सही मार्गदर्शन हो, तो हर सपने पूरे हो सकते हैं।
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देवरिया। सलेमपुर क्षेत्र के मझवलिया गांव निवासी सीमा गुप्ता ड्रोन के जरिये खेतों में दवा का छिड़काव कर अपनी आजीविका चला रही हैंं। इनका कहना है कि घर की मालकिन मैं हूं तो पूरे घर का खर्च भी उठाऊंगी।
सीमा का आम गृहिणी से आत्मनिर्भर बनने का सफर महिलाओं के लिए एक मिसाल है। कभी घर के खर्च की चिंता में डूबी सीमा आज न सिर्फ अपने परिवार का आर्थिक बोझ उठा रही हैं, बल्कि अतिरिक्त कमाई भी कर रही हैं। सीमा के पति गांव में किराना दुकान चलाते हैं। तीन बच्चों की परवरिश और घर का खर्च संभालना उनके लिए आसान नहीं था।
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सीमा के मन में कुछ कर गुजरने की ललक थी। इसी चाह में साल 2020 में वह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ीं। जल्द ही वह एक स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष बनीं और फिर 22 समूहों की जिम्मेदारी संभालने वाली ‘’समूह सखी’’ भी हैं। अपने काम को लेकर वह अब भी दुविधा में थीं।
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सीमा की जिंदगी में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब 11 मार्च 2024 को उन्हें ‘’नमो ड्रोन दीदी योजना’’ के तहत एक कृषि ड्रोन मिला। इस ड्रोन की मदद से उन्होंने किसानों के खेतों में कीटनाशक और उर्वरक छिड़काव का काम शुरू किया।
शुरुआत में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनके पास सिर्फ एक ही बैटरी थी, जो डेढ़ एकड़ में छिड़काव के बाद खत्म हो जाती थी। इसे चार्ज करने में 45 मिनट लगते और बिजली की कमी भी काम में बाधा डालती।
कुछ दिन बाद अक्तूबर 24 में उनकी मुलाकात जागृति उद्यम केंद्र की टीम से हुई। इस टीम ने तकनीकी जानकारी और एक अतिरिक्त बैटरी दी। सीमा बताती हैं कि पहले वह अपने व्यवसाय को लेकर असमंजस में थी, मगर सही मार्गदर्शन मिलने के बाद उनका हौसला बढ़ गया।
सही दिशा मिलने से उन्हें अपने काम में सफलता मिली। आज सीमा अपने ड्रोन से सालाना एक से डेढ़ लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई कर रही हैं। उनकी सफलता ने न सिर्फ उनके परिवार को आर्थिक मजबूती दी है, बल्कि आसपास की महिलाओं को भी प्रेरित किया है। सीमा की यह कहानी दिखाती है कि अगर हौसला और सही मार्गदर्शन हो, तो हर सपने पूरे हो सकते हैं।