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मनरेगा फर्जीवाड़ा: धुल गए दाग निलंबित सेक्रेट्री की हुई बहाली
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धुल गए दाग, निलंबित सेक्रेटरी की हुई बहाली
मनरेगा फर्जीवाड़ा : बनकटा ब्लॉक में बिना काम के 35 लाख भुगतान का मामला
अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद हुआ था पर्दाफाश
आरोपी पंचायत सचिव को फिर आवंटित हुए वही गांव
संवाद न्यूूज एजेंसी
देवरिया। बनकटा ब्लॉक में मनरेगा योजना के तहत हुए फर्जी भुगतान मामले की लीपापोती शुरू हो गई है। जिन कार्यों को कराए बिना लाखों की धनराशि भुगतान की गई थी, उन्हें जिम्मेदारों के निलंबन के दौरान पूरा करा दिया गया। उसी कार्य को आधार मानकर एक आरोपी ग्राम पंचायत अधिकारी मेहताब आलम को क्लीन चिट दे दी गई है। दोबारा तैनाती में छह ग्राम पंचायत आवंटित किए गए हैं। इनमें रामपुर और नियरवां गांव भी शामिल हैं, जहां सेक्रेटरी पर मनरेगा योजना के तहत 4.28 लाख रुपये फर्जी भुगतान कराने के आरोप लगे थे। इन्होंने इन गांवों में एसबीएम (ग्रामीण) के तहत व्यय धनराशि के सापेक्ष शौचालयों का निर्माण कराए बिना फर्जी तरीके से फोटो भी सत्यापित करा लिया था।
बता दें कि बनकटा ब्लॉक में 30 मार्च को मनरेगा योजना के तहत एक करोड़ 70 लाख रुपये भुगतान किया गया था। इसमें ज्यादातर भुगतान बिना काम के हुए थे। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद हुई जांच में करीब 35 लाख रुपये फर्जी भुगतान का मामला प्रकाश में आया तो अधिकारियों के कान खड़े हो गए। ग्राम प्रधान, मनरेगा कर्मी, पंचायत सचिव समेत 20 पर मुकदमा दर्ज हुआ। सेक्रेटरी मेहताब आलम के निलंबन प्रकरण की जांच एडीपीआरओ को सौंपी गई। इसमें उन्होंने कुछ कार्य निलंबन के बाद पूरा होने की पुष्टि की है। बावजूद इसके आरोपी सचिव को पुन: उसी ग्राम पंचायत में डीपीआरओ ने बहाल कर दिया है। इससे अन्य आरोपियों की बहाली का रास्ता साफ होने लगा है।
वर्जन
सेक्रेटरी मेहताब आलम के निलंबन प्रकरण की जांच एडीपीआरओ को दी गई थी। उनकी जांच आख्या के आधार पर सेक्रेटरी को बहाल किया गया है। इसमें मानवीय त्रुटि हो सकती है। मैं एक बार फिर जांच रिपोर्ट की समीक्षा करूंगा। किसी प्रकार का संदेह होने पर निलंबन को बरकरार रखा जाएगा।
विज्ञापन
- आनंद प्रकाश, डीपीआरओ।
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मनरेगा फर्जीवाड़ा : बनकटा ब्लॉक में बिना काम के 35 लाख भुगतान का मामला
अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद हुआ था पर्दाफाश
आरोपी पंचायत सचिव को फिर आवंटित हुए वही गांव
संवाद न्यूूज एजेंसी
देवरिया। बनकटा ब्लॉक में मनरेगा योजना के तहत हुए फर्जी भुगतान मामले की लीपापोती शुरू हो गई है। जिन कार्यों को कराए बिना लाखों की धनराशि भुगतान की गई थी, उन्हें जिम्मेदारों के निलंबन के दौरान पूरा करा दिया गया। उसी कार्य को आधार मानकर एक आरोपी ग्राम पंचायत अधिकारी मेहताब आलम को क्लीन चिट दे दी गई है। दोबारा तैनाती में छह ग्राम पंचायत आवंटित किए गए हैं। इनमें रामपुर और नियरवां गांव भी शामिल हैं, जहां सेक्रेटरी पर मनरेगा योजना के तहत 4.28 लाख रुपये फर्जी भुगतान कराने के आरोप लगे थे। इन्होंने इन गांवों में एसबीएम (ग्रामीण) के तहत व्यय धनराशि के सापेक्ष शौचालयों का निर्माण कराए बिना फर्जी तरीके से फोटो भी सत्यापित करा लिया था।
बता दें कि बनकटा ब्लॉक में 30 मार्च को मनरेगा योजना के तहत एक करोड़ 70 लाख रुपये भुगतान किया गया था। इसमें ज्यादातर भुगतान बिना काम के हुए थे। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद हुई जांच में करीब 35 लाख रुपये फर्जी भुगतान का मामला प्रकाश में आया तो अधिकारियों के कान खड़े हो गए। ग्राम प्रधान, मनरेगा कर्मी, पंचायत सचिव समेत 20 पर मुकदमा दर्ज हुआ। सेक्रेटरी मेहताब आलम के निलंबन प्रकरण की जांच एडीपीआरओ को सौंपी गई। इसमें उन्होंने कुछ कार्य निलंबन के बाद पूरा होने की पुष्टि की है। बावजूद इसके आरोपी सचिव को पुन: उसी ग्राम पंचायत में डीपीआरओ ने बहाल कर दिया है। इससे अन्य आरोपियों की बहाली का रास्ता साफ होने लगा है।
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सेक्रेटरी मेहताब आलम के निलंबन प्रकरण की जांच एडीपीआरओ को दी गई थी। उनकी जांच आख्या के आधार पर सेक्रेटरी को बहाल किया गया है। इसमें मानवीय त्रुटि हो सकती है। मैं एक बार फिर जांच रिपोर्ट की समीक्षा करूंगा। किसी प्रकार का संदेह होने पर निलंबन को बरकरार रखा जाएगा।
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- आनंद प्रकाश, डीपीआरओ।