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Deoria News: सड़क हादसा पीड़ितों को मिलेगा गोल्डन आवर में कैशलेस इलाज
Sun, 11 Jan 2026 12:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 11 Jan 2026 12:12 AM IST
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देवरिया। सड़क हादसों में घायलों की जान बचाने के लिए भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘कैशलेस ट्रीटमेंट ऑफ रोड एक्सीडेंट विक्टिम’ को प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से शनिवार को पुलिस लाइंस के सभागार में जनपद के सभी थानों के उप निरीक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें सड़क हादसा पीड़ितों को गोल्डन आवर में कैशलेस इलाज देने के बारे में बताया गया।
प्रशिक्षकों ने बताया कि टीएमएस और ई-डार पोर्टल के जरिए मिलने वाली इस सुविधा में सात दिन तक 1.5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज किया जाएगा। इससे घायलों की रुपये के अभाव में जाने वाली जान बचाई जा सकेगी।
एनआईसी कार्यालय के जिला रोल आउट मैनेजर सौरभ गुप्ता ने बताया कि सड़क दुर्घटना के बाद अस्पताल पहुंचने पर पीड़ित को तुरंत भर्ती कर टीएमएस पोर्टल पर उसकी पेशेंट आईडी बनाई जाती है, जिसकी सूचना संबंधित थाना प्रभारी की ई-डार आईडी पर जाती है। इसके बाद पुलिस अधिकारी दुर्घटना की जांच कर 24 घंटे के भीतर एक्सीडेंट आईडी (विक्टिम आईडी) जनरेट कर अस्पताल को अप्रूवल देता है, जिससे केस योजना में शामिल हो जाता है। अत्यंत गंभीर मामलों में सत्यापन के लिए 48 घंटे का समय निर्धारित है।
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योजना के तहत दुर्घटना के बाद पहले 60 मिनट यानी ‘गोल्डन आवर’ में बिना किसी भुगतान के इलाज सुनिश्चित किया जाता है। प्रत्येक पीड़ित को प्रति दुर्घटना अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज सात दिनों तक मिलता है। यह सुविधा सभी सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उपलब्ध है तथा इसके लिए किसी बीमा की अनिवार्यता नहीं है।
साथ ही ई-डार पोर्टल पर दुर्घटना की फीडिंग, वाहन के तकनीकी मुआयने के लिए एआरटीओ को और सड़क जांच के लिए पीडब्ल्यूडी को ऑनलाइन अनुरोध भेजने की प्रक्रिया की भी जानकारी दी गई। इस दौरान जिला सूचना विज्ञान अधिकारी कृष्णानंद यादव, टीएसआई गुलाब सिंह आदि उपस्थित रहे।
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प्रशिक्षकों ने बताया कि टीएमएस और ई-डार पोर्टल के जरिए मिलने वाली इस सुविधा में सात दिन तक 1.5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज किया जाएगा। इससे घायलों की रुपये के अभाव में जाने वाली जान बचाई जा सकेगी।
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एनआईसी कार्यालय के जिला रोल आउट मैनेजर सौरभ गुप्ता ने बताया कि सड़क दुर्घटना के बाद अस्पताल पहुंचने पर पीड़ित को तुरंत भर्ती कर टीएमएस पोर्टल पर उसकी पेशेंट आईडी बनाई जाती है, जिसकी सूचना संबंधित थाना प्रभारी की ई-डार आईडी पर जाती है। इसके बाद पुलिस अधिकारी दुर्घटना की जांच कर 24 घंटे के भीतर एक्सीडेंट आईडी (विक्टिम आईडी) जनरेट कर अस्पताल को अप्रूवल देता है, जिससे केस योजना में शामिल हो जाता है। अत्यंत गंभीर मामलों में सत्यापन के लिए 48 घंटे का समय निर्धारित है।
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योजना के तहत दुर्घटना के बाद पहले 60 मिनट यानी ‘गोल्डन आवर’ में बिना किसी भुगतान के इलाज सुनिश्चित किया जाता है। प्रत्येक पीड़ित को प्रति दुर्घटना अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज सात दिनों तक मिलता है। यह सुविधा सभी सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उपलब्ध है तथा इसके लिए किसी बीमा की अनिवार्यता नहीं है।
साथ ही ई-डार पोर्टल पर दुर्घटना की फीडिंग, वाहन के तकनीकी मुआयने के लिए एआरटीओ को और सड़क जांच के लिए पीडब्ल्यूडी को ऑनलाइन अनुरोध भेजने की प्रक्रिया की भी जानकारी दी गई। इस दौरान जिला सूचना विज्ञान अधिकारी कृष्णानंद यादव, टीएसआई गुलाब सिंह आदि उपस्थित रहे।