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स्वेटर वितरण का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाए जिम्मेदार
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स्वेटर वितरण का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाए जिम्मेदार
देवरिया। जनपद के परिषदीय स्कूलों में नामांकित 2.28 लाख विद्यार्थियों को स्वेटर देने का लक्ष्य समय से पूरा नहीं हो पाया है। कई विद्यालयों में तो अभी भी स्वेटर नहीं पहुंच पाया है। इसे लेकर अभिभावकों में विभाग के कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी है।
जिले के कुल 2114 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं संविलयन वाले विद्यालयों के नामांकित विद्यार्थियों को स्वेटर दिया जाना था। कुछ विद्यालयों पर स्वेटर वितरण किया गया, लेकिन बहुत से स्कूलों पर अभी स्वेटर नहीं पहुंचा है। शासनादेश था कि 31 अक्तूबर तक स्वेटर का क्रय कर इसे बांट देने एवं इसकी रिपोर्ट से अवगत कराया जाए। विभागीय लोगों का दावा है कि 90 प्रतिशत तक स्वेटर वितरित किया जा चुका है, हालांकि यह कहां और किन-किन स्कूलों में पूरा हो गया है, कहां बाकी है, इसका कोई आंकड़ा विभाग के पास नहीं है। थोड़ा पीछे जाएं तो जैम पोर्टल के जरिये 20 सितंबर तक स्वेटर खरीद की प्रक्रिया पूरी कर लिए जाने, पांच अक्तूबर तक आपूर्ति एवं 31 अक्तूबर तक शत-प्रतिशत बांटने का शासनादेश हुआ था। तय था कि स्वेटर का कलर मैरुन होगा तथा इसकी कीमत 200 रुपये अधिकतम होगी।
चयनित फर्मों में यूपिका हैंडलूम, एसएन ट्रेडर्स झांसी, मयूर सेल्स मध्य प्रदेश ने इससे भी कम में स्वेटर देने के लिए टेंडर प्रक्रिया को पूरा किया। लेटलतीफी का आलम यह रहा कि दिसंबर माह तक कई हिस्सों में स्वेटर की आपूर्ति की गई है। उधर, जिला समन्वयक सामुदायिक आलोक पांडेय ने बताया कि अधिकांश जगहों पर स्वेटर वितरण किया जा चुका है। उन्हीं स्कूलों में बाकी है जहां के बच्चें कहीं अन्य जगहों पर गए हुए हैं। जहां वितरण नहीं हुआ है वहां शीघ्र वितरण करने का निर्देश जारी किया गया है।
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स्वेटर की क्वालिटी को लेकर उठाए जा रहे हैं सवाल
जिन बच्चों को स्वेटर मिला है, उनके अभिभावक स्वेटर की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। किसी की बांह छोटी है तो किसी में साइज की समस्या है। स्वेटर क्रय करने के पहले अधिकारियों ने दावा किया था कि इस बार अन्य वर्षों से बेहतर गुणवत्ता का स्वेटर दिया जाएगा। हालांकि हकीकत यह है कि जो भी स्वेटर वितरित किया गया है उसकी क्वालिटी बेहद खराब है। इसे लेकर अधिकारियों व चयनित फर्मों के बीच कमीशनबाजी की भी चर्चा खूब हो रही है।
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देवरिया। जनपद के परिषदीय स्कूलों में नामांकित 2.28 लाख विद्यार्थियों को स्वेटर देने का लक्ष्य समय से पूरा नहीं हो पाया है। कई विद्यालयों में तो अभी भी स्वेटर नहीं पहुंच पाया है। इसे लेकर अभिभावकों में विभाग के कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी है।
जिले के कुल 2114 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं संविलयन वाले विद्यालयों के नामांकित विद्यार्थियों को स्वेटर दिया जाना था। कुछ विद्यालयों पर स्वेटर वितरण किया गया, लेकिन बहुत से स्कूलों पर अभी स्वेटर नहीं पहुंचा है। शासनादेश था कि 31 अक्तूबर तक स्वेटर का क्रय कर इसे बांट देने एवं इसकी रिपोर्ट से अवगत कराया जाए। विभागीय लोगों का दावा है कि 90 प्रतिशत तक स्वेटर वितरित किया जा चुका है, हालांकि यह कहां और किन-किन स्कूलों में पूरा हो गया है, कहां बाकी है, इसका कोई आंकड़ा विभाग के पास नहीं है। थोड़ा पीछे जाएं तो जैम पोर्टल के जरिये 20 सितंबर तक स्वेटर खरीद की प्रक्रिया पूरी कर लिए जाने, पांच अक्तूबर तक आपूर्ति एवं 31 अक्तूबर तक शत-प्रतिशत बांटने का शासनादेश हुआ था। तय था कि स्वेटर का कलर मैरुन होगा तथा इसकी कीमत 200 रुपये अधिकतम होगी।
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चयनित फर्मों में यूपिका हैंडलूम, एसएन ट्रेडर्स झांसी, मयूर सेल्स मध्य प्रदेश ने इससे भी कम में स्वेटर देने के लिए टेंडर प्रक्रिया को पूरा किया। लेटलतीफी का आलम यह रहा कि दिसंबर माह तक कई हिस्सों में स्वेटर की आपूर्ति की गई है। उधर, जिला समन्वयक सामुदायिक आलोक पांडेय ने बताया कि अधिकांश जगहों पर स्वेटर वितरण किया जा चुका है। उन्हीं स्कूलों में बाकी है जहां के बच्चें कहीं अन्य जगहों पर गए हुए हैं। जहां वितरण नहीं हुआ है वहां शीघ्र वितरण करने का निर्देश जारी किया गया है।
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स्वेटर की क्वालिटी को लेकर उठाए जा रहे हैं सवाल
जिन बच्चों को स्वेटर मिला है, उनके अभिभावक स्वेटर की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। किसी की बांह छोटी है तो किसी में साइज की समस्या है। स्वेटर क्रय करने के पहले अधिकारियों ने दावा किया था कि इस बार अन्य वर्षों से बेहतर गुणवत्ता का स्वेटर दिया जाएगा। हालांकि हकीकत यह है कि जो भी स्वेटर वितरित किया गया है उसकी क्वालिटी बेहद खराब है। इसे लेकर अधिकारियों व चयनित फर्मों के बीच कमीशनबाजी की भी चर्चा खूब हो रही है।