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Deoria News: मौसम बदलने से सांस के मरीजों काे हो रही दिक्कत, रहें सतर्क
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- एलर्जी से पीड़ित को लापरवाही पड़ रही भारी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मौसम बदलने से सांस की समस्या से ग्रसित मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। गर्म हवा के अंदर सांस की नली में सूजन से दिक्कत बढ़ रही है। साथ ही एलर्जी से लोग पीड़ित हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में मरीजों संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। पहले 50 मरीज आते थे, इस समय 100 से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। डॉक्टर इलाज के साथ सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।
मौसम में बदलाव का असर सांस और एलर्जी के मरीजों पर पड़ता है। थोड़ी सी लापरवाही उन पर भारी पड़ती है। बारिश के बाद गर्मी बढ़ने से नली में सूजन होने से सांस, अस्थमा के पीड़ितों की परेशानी बढ़ रही है। जबकि एलर्जी से पीड़ित को नाक से पानी, आंख में खुजली आदि की समस्या होती है। इधर बारिश न होने और गर्मी के कारण लोगों की दिक्कत बढ़ रही है। इस तरह के मरीजों की संख्या में इन दिनों बढ़ रही है। सांस से पीड़ित मरीजों को लेकर तीमारदार पहुंच रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के चेस्ट व टीबी विभाग की ओपीडी में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। सांस फूलने से पीड़ित लोगों को लेकर तीमारदार पहुंच रहे हैं, जबकि छींक, आंख से पानी आने की शिकायत लेकर भी लोग पहुंचे थे। विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराग शुक्ला ने बृहस्पतिवार को करीब 135 मरीजों का इलाज किया, जबकि सोमवार को 110, मंगलवार को 122, बुधवार को 131 मरीजों का इलाज किया। इसमें सांस, अस्थमा व एलर्जी से पीड़ित थे।
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गहरी सांस लेकर छोड़ने से फेफड़ा होता है मजबूत
स्वस्थ रहने के लिए हर व्यक्ति को योग व हल्का व्यायाम करना चाहिए। साथ ही गहरी सांस लेकर दस सेकेंड तक रोंके, उसके बाद नाक से उसे छोड़ें। इससे फेफड़ा मजबूत रहता है। सांस के मरीजों को यह जरूर करना चाहिए।
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मौसम बदलने से बारिश के बाद गर्मी बढ़ने पर पर सांस के मरीजों की दिक्कत बढ़ जाती है। वहीं ट्रिगर फैक्टर अटैक करते हैं। थोड़ी सी लापरवाही की वजह से अस्थमा के पुराने मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। गर्म हवा अंदर जाने से नली में सूजन हो जाता है, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। वहीं धूल, नमी, चिपचिपाहट, ठंडे पेय पदार्थ से एलर्जी पीड़ित लोगों को समस्या होती है। उनके नाक व आंख में खुजली, पानी आता है। कुछ के सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, कभी-कभी थकान भी महसूस होता है। पीड़ित से दूरी बनाकर रहना चाहिए। उसके छींकने से सामने वाला भी संक्रमित हो सकता है। इस मौसम में सावधानी बरतनी चाहिए। परेशानी होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराना चाहिए।
-डॉ. अनुराग शुक्ला, विभागाध्यक्ष, चेस्ट व टीबी विभाग, मेडिकल काॅलेज
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यह बरतें सावधानी
- गर्मी में काटन का ढीला कपड़ा पहनें
- सांस, एलर्जी के मरीज मास्क लगा कर बाहर निकलें
- परेशानी शुरू होने पर गुनगुना पानी पिएं
- छींकते समय मुंह पर रुमाल व हाथ लगाएं
- तला, मसाला, दही, घी का कम सेवन करें
- मरीज चाय, काफी, काढा न पीएं
-सांस के मरीज अचार, चटनी, पापड़, चिकन के सेवन से परहेज करें
- भोजन हाथ धोकर करें, सफाई पर ध्यान दें
- नियमित दवा व इन्हेलर लें
- योग, प्राणायाम करें
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मौसम बदलने से सांस की समस्या से ग्रसित मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। गर्म हवा के अंदर सांस की नली में सूजन से दिक्कत बढ़ रही है। साथ ही एलर्जी से लोग पीड़ित हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में मरीजों संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। पहले 50 मरीज आते थे, इस समय 100 से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। डॉक्टर इलाज के साथ सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।
मौसम में बदलाव का असर सांस और एलर्जी के मरीजों पर पड़ता है। थोड़ी सी लापरवाही उन पर भारी पड़ती है। बारिश के बाद गर्मी बढ़ने से नली में सूजन होने से सांस, अस्थमा के पीड़ितों की परेशानी बढ़ रही है। जबकि एलर्जी से पीड़ित को नाक से पानी, आंख में खुजली आदि की समस्या होती है। इधर बारिश न होने और गर्मी के कारण लोगों की दिक्कत बढ़ रही है। इस तरह के मरीजों की संख्या में इन दिनों बढ़ रही है। सांस से पीड़ित मरीजों को लेकर तीमारदार पहुंच रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज के चेस्ट व टीबी विभाग की ओपीडी में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। सांस फूलने से पीड़ित लोगों को लेकर तीमारदार पहुंच रहे हैं, जबकि छींक, आंख से पानी आने की शिकायत लेकर भी लोग पहुंचे थे। विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराग शुक्ला ने बृहस्पतिवार को करीब 135 मरीजों का इलाज किया, जबकि सोमवार को 110, मंगलवार को 122, बुधवार को 131 मरीजों का इलाज किया। इसमें सांस, अस्थमा व एलर्जी से पीड़ित थे।
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गहरी सांस लेकर छोड़ने से फेफड़ा होता है मजबूत
स्वस्थ रहने के लिए हर व्यक्ति को योग व हल्का व्यायाम करना चाहिए। साथ ही गहरी सांस लेकर दस सेकेंड तक रोंके, उसके बाद नाक से उसे छोड़ें। इससे फेफड़ा मजबूत रहता है। सांस के मरीजों को यह जरूर करना चाहिए।
मौसम बदलने से बारिश के बाद गर्मी बढ़ने पर पर सांस के मरीजों की दिक्कत बढ़ जाती है। वहीं ट्रिगर फैक्टर अटैक करते हैं। थोड़ी सी लापरवाही की वजह से अस्थमा के पुराने मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। गर्म हवा अंदर जाने से नली में सूजन हो जाता है, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। वहीं धूल, नमी, चिपचिपाहट, ठंडे पेय पदार्थ से एलर्जी पीड़ित लोगों को समस्या होती है। उनके नाक व आंख में खुजली, पानी आता है। कुछ के सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, कभी-कभी थकान भी महसूस होता है। पीड़ित से दूरी बनाकर रहना चाहिए। उसके छींकने से सामने वाला भी संक्रमित हो सकता है। इस मौसम में सावधानी बरतनी चाहिए। परेशानी होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराना चाहिए।
-डॉ. अनुराग शुक्ला, विभागाध्यक्ष, चेस्ट व टीबी विभाग, मेडिकल काॅलेज
यह बरतें सावधानी
- गर्मी में काटन का ढीला कपड़ा पहनें
- सांस, एलर्जी के मरीज मास्क लगा कर बाहर निकलें
- परेशानी शुरू होने पर गुनगुना पानी पिएं
- छींकते समय मुंह पर रुमाल व हाथ लगाएं
- तला, मसाला, दही, घी का कम सेवन करें
- मरीज चाय, काफी, काढा न पीएं
-सांस के मरीज अचार, चटनी, पापड़, चिकन के सेवन से परहेज करें
- भोजन हाथ धोकर करें, सफाई पर ध्यान दें
- नियमित दवा व इन्हेलर लें
- योग, प्राणायाम करें