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रामअवध जिंदा या मुर्दा : डीएम का आदेश भी डस्टबिन में
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नोट - 24 जुलाई की पीडीएफ लगा लें
- जुलाई में जिलाधिकारी ने संज्ञान लेते हुए 15 दिन में मामला निस्तारित करने के निर्देश दिए थे
- तहसीलदार को अब तक फाइल निकालने की फुरसत नहीं मिली, दो साल से नहीं हो रही सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। डाला गांव के रहने वाले रामअवध के जिंदा या मुर्दा के मामले में तहसील प्रशासन ने जिलाधिकारी के आदेश को भी डस्टबिन में डाल दिया है। रामअवध का कहना है कि तहसील प्रशासन की मिलीभगत से पट्टीदारों ने आठ साल पहले उसे कागज में मृतक बनाकर पुश्तैनी जमीन पर कब्जा कर लिया है। खुद को जिंदा साबित करने के लिए वह तीन साल से तहसील के चक्कर काट रहा है। जुलाई में जिलाधिकारी के संज्ञान में यह मामला आया तो उन्होंने 15 दिन में मामले का निस्तारण करने का आदेश दिया था। लेकिन रामअवध की फाइल अब भी नीचे दबी हुई है।
इस संबंध में पूछने पर तहसीलदार अभय राज ने टालने वाले अंदाज में कहा कि रामअवध के मामले का जल्दी निस्तारण करने का प्रयास हो रहा है। न्यायालय की कार्रवाई जल्दी निपटाने की कोशिश हो रही है।
रामअवध ने बताया कि वह 40 साल पहले रोजीरोटी के लिए ललितपुर जिला चले गए थे। वहां सैदपुर गांव में रह कर कमा रहे हैं। उनका एक बेटा भी है। यहां लंबे समय से आना नहीं हुआ, तो पट्टीदारों ने जमीन हड़पने की नियत से लेखपाल और कानूनगो की मदद से रामअवध को मुर्दा बताकर उनकी जमीन अपने नाम करा ली। पट्टीदार उनकी पहचान को लेकर केस को उलझा रहे हैं। जबकि रिश्तेदार कसम खाकर कह रहे हैं कि रामअवध जिंदा हैं। रामअवध भी अभिलेखीय साक्ष्य आधार कार्ड लेकर तहसील का चक्कर काट रहे हैं, पर तहसील प्रशासन उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। हालांकि अमर उजाला के 16 जुलाई के अंक में रामअवध की पीड़ा प्रकाशित होने के बाद डीएम ने मामले की जांच कर त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिए। मामले की जांच कर अधिकारी उनके जिंदा होने से संतुष्ट हो गए। लेकिन राजस्व अभिलेख में जिंदा करने के नाम पर टालामटोली कर दी जाती है।
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दो साल से नहीं बैठा कोर्ट
रुद्रपुर। नायब तहसीलदार रुद्रपुर के न्यायालय में चल रही रामअवध की फाइल पिछले दो साल से नहीं पलटी गई। अमर उजाला की पहल के बाद एसडीएम ने रामअवध को मामले को हर कार्यदिवस पर देखकर निपटाने का निर्देश दिए हैं। एसडीएम संजीव कुमार उपाध्याय ने कहा कि रामअवध के मामले में तहसीलदार से बात की गई। उन्हें कोर्ट के मामले का त्वरित निस्तारण करने का निर्देश दिया गया है।
मुख्यमंत्री से मिलने नहीं दिया
रामअवध के अधिवक्ता आनंद सिंह ने कहा कि अधिकारी सिर्फ आश्वासन की घुट्टी पिला रहें है। रामअवध के सीएम से मिलने पर रोक लगा दी गई। 24 जुलाई को मुख्यमंत्री देवरिया आए थे, तब पुलिस ने रामअवध को थाने में बैठा लिया था। रामअवध को तब छोड़ा गया, जब मुख्यमंत्री देवरिया से चले गए।
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- जुलाई में जिलाधिकारी ने संज्ञान लेते हुए 15 दिन में मामला निस्तारित करने के निर्देश दिए थे
- तहसीलदार को अब तक फाइल निकालने की फुरसत नहीं मिली, दो साल से नहीं हो रही सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। डाला गांव के रहने वाले रामअवध के जिंदा या मुर्दा के मामले में तहसील प्रशासन ने जिलाधिकारी के आदेश को भी डस्टबिन में डाल दिया है। रामअवध का कहना है कि तहसील प्रशासन की मिलीभगत से पट्टीदारों ने आठ साल पहले उसे कागज में मृतक बनाकर पुश्तैनी जमीन पर कब्जा कर लिया है। खुद को जिंदा साबित करने के लिए वह तीन साल से तहसील के चक्कर काट रहा है। जुलाई में जिलाधिकारी के संज्ञान में यह मामला आया तो उन्होंने 15 दिन में मामले का निस्तारण करने का आदेश दिया था। लेकिन रामअवध की फाइल अब भी नीचे दबी हुई है।
इस संबंध में पूछने पर तहसीलदार अभय राज ने टालने वाले अंदाज में कहा कि रामअवध के मामले का जल्दी निस्तारण करने का प्रयास हो रहा है। न्यायालय की कार्रवाई जल्दी निपटाने की कोशिश हो रही है।
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रामअवध ने बताया कि वह 40 साल पहले रोजीरोटी के लिए ललितपुर जिला चले गए थे। वहां सैदपुर गांव में रह कर कमा रहे हैं। उनका एक बेटा भी है। यहां लंबे समय से आना नहीं हुआ, तो पट्टीदारों ने जमीन हड़पने की नियत से लेखपाल और कानूनगो की मदद से रामअवध को मुर्दा बताकर उनकी जमीन अपने नाम करा ली। पट्टीदार उनकी पहचान को लेकर केस को उलझा रहे हैं। जबकि रिश्तेदार कसम खाकर कह रहे हैं कि रामअवध जिंदा हैं। रामअवध भी अभिलेखीय साक्ष्य आधार कार्ड लेकर तहसील का चक्कर काट रहे हैं, पर तहसील प्रशासन उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। हालांकि अमर उजाला के 16 जुलाई के अंक में रामअवध की पीड़ा प्रकाशित होने के बाद डीएम ने मामले की जांच कर त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिए। मामले की जांच कर अधिकारी उनके जिंदा होने से संतुष्ट हो गए। लेकिन राजस्व अभिलेख में जिंदा करने के नाम पर टालामटोली कर दी जाती है।
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दो साल से नहीं बैठा कोर्ट
रुद्रपुर। नायब तहसीलदार रुद्रपुर के न्यायालय में चल रही रामअवध की फाइल पिछले दो साल से नहीं पलटी गई। अमर उजाला की पहल के बाद एसडीएम ने रामअवध को मामले को हर कार्यदिवस पर देखकर निपटाने का निर्देश दिए हैं। एसडीएम संजीव कुमार उपाध्याय ने कहा कि रामअवध के मामले में तहसीलदार से बात की गई। उन्हें कोर्ट के मामले का त्वरित निस्तारण करने का निर्देश दिया गया है।
मुख्यमंत्री से मिलने नहीं दिया
रामअवध के अधिवक्ता आनंद सिंह ने कहा कि अधिकारी सिर्फ आश्वासन की घुट्टी पिला रहें है। रामअवध के सीएम से मिलने पर रोक लगा दी गई। 24 जुलाई को मुख्यमंत्री देवरिया आए थे, तब पुलिस ने रामअवध को थाने में बैठा लिया था। रामअवध को तब छोड़ा गया, जब मुख्यमंत्री देवरिया से चले गए।