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Deoria News: भूमि विवाद के मामले कैसे सुलझेंगे, जब अपनों की ही नियत में है खोट, भू माफिया की भी नजर
Thu, 11 May 2023 10:38 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 11 May 2023 10:38 PM IST
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कलक्ट्रेट स्थित राजस्व विभाग का कार्यालय। संवाद
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देवरिया। जिले में भूमि विवाद के मामले निपटाने की जिनके कंधों पर जिम्मेदारी है। वही उलझाने में लगे हैं। वरासत के मामले में हीलाहवाली और नामों में हेराफेरी करने का खेल राजस्व विभाग में चल रहा है। इसमें कुछ लेखपालों की भूमिका ने भूमि विवाद को जन्म दे दिया है। ऐसे कर्मियों की नजर सरकारी भूमि पर भी है। वह मौका मिलते ही सरकारी भूमि भी दूसरे के नाम कर देते हैं।
जिले की जमीनों का विवाद जिनके दर पर सुलझने के लिए पहुंचता है, वही पूरी चालाकी के साथ उलझाकर अपना मिशन साध रहे हैं। इसमें लेखपाल के अलावा तहसील के बड़े अफसरों तक की भूमिका संदिग्ध है। इन्हीं से जुड़े तथाकथित प्रापर्टी डीलर और भू-माफिया गठजोड़ कर मालामाल हो रहे हैं। जिले में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें जांच करने के लिए जिन्हें भेजा गया वही जमीन में हिस्सेदार बन गए और नियमों की अनदेखी कर बैनामा भी करा लिया।
सबसे गंभीर बात तो यह है कि अपनी वाजिब जमीन पाने के लिए वरासत के लिए लोग तहसीलों का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। खतौनी में गलत नाम दर्ज कर हेराफेरी कर जमीन की चौहद्दी भी बदल दी जा रही है। गलत करने वाले ने तो श्मशान और चारागाह की भूमि को भी नहीं छोड़ा और उसमें भी गोलमाल कर दिया है।
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जनपद में राजस्व के 39110 मामले हैं लंबित
- देवरिया सदर-11219
- सलेमपुर -8862
- भाटपाररानी- 4715
- बरहज - 4394
- रुद्रपुर - 5786
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सीलिंग की भूमि हथियाने के लिए सक्रिय हैं गिरोह
देवरिया। जनपद में सीलिंग की भूमि पर भू-माफियाओं की नजर है। वह तहसील के बड़े अफसर और छोटे तक से साठगांठ कर अपने नाम कराने का काम कर रहे हैं। कलक्ट्रेट बार के पूर्व अध्यक्ष बृज बांके तिवारी की शिकायत पर दो मामले उजागर हुए हैं। इसमें रुद्रपुर और सलेमपुर तहसील क्षेत्र की जमीन है। जिनका नामांतरण किया गया है। इस मामले की जांच सीआरओ ने की, तो खुलासा हुआ। अब इसमें शामिल अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
रुद्रपुर तहसील क्षेत्र में करोड़ों रुपये की सीलिंग की भूमि के मामले में वर्ष 2017 से लंबित रीकाल आवेदन में भी निर्णय पारित करने का निर्देश डीएम ने दिया है। उत्तर प्रदेश जोत सीमा आरोपण अधिनियम- 1960 तीन जनवरी 1961 को लागू हुआ था। इसके बाद अतिरिक्त भूमि निर्धारण की कार्रवाई में शुरू की गई। इस अधिनियम के तहत रुद्रपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम जंगल तरैनी में 35.18 एकड़, परसा जोकहा में 0.66 एकड़ भूमि 13 जनवरी 1989 को सरकारी घोषित हो गई।
इसके अलावा भी तहसील क्षेत्र के कुछ अन्य गांवों के 7.30 एकड़ से अधिक भूमि सीलिंग के तहत निकल गई। अफसरों की मिलीभगत से धारा - 34 और 229 बी के तहत उक्त भूमि दूसरे के नाम कर दिया गया है। कुल नौ वादों में वर्ष 1994 से लेकर जून 2022 तक नामांतरण करने का आदेश किया गया है। सलेमपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम मझौली में सीलिंग में अतिरिक्त घोषित हुई भूमि का क्रय-विक्रय किया गया है। इतना ही नहीं मुख्य राजस्व अधिकारी ने तहसीलदार को यह भी बताया है कि इस मामले में न्यायालय का स्थगन आदेश है। इसके बावजूद भी सीलिंग की भूमि का नामांतरण किया गया है।
ऐसे सभी नामांतरण नियमानुसार निरस्त कर खतौनी की प्रति 15 अंदर सीआरओ ने तलब किया है। इसी तरह जमुई तप्पा बरसीपार में चारागाह एवं श्मशान खाते की भूमि में हेराफेरी कर नामांतरण किया गया है। इसको देखते हुए सीआरओ ने बेदखली का भी आदेश दिया है।
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जांच में उजागर हो चुके हैं कुछ लेखपालों के कारनामे
देवरिया। शहर के एसएसबीएल इंटर कॉलेज के पास एक भूमि का विवाद था। तत्कालीन जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने जांच बैठाई तो पता चला कि देवरिया सदर, सलेमपुर, भाटपाररानी तहसील में तैनात लेखपालों ने दो कट्ठा भूमि अपने परिजनों के नाम ही बैनामा करा लिया है, जो करोड़ों रुपये की भूमि है।
तरकुलवा थाना क्षेत्र के गुद्दीजोर गांव निवासी त्रिगुणायक नारायण ने शिकायत की थी कि गांव की बंजर भूमि खतौनी में हेराफेरी कर गांव के एक दूसरे व्यक्ति के नाम कर दिया गया है। इस मामले में तत्कालीन लेखपाल रमाशंकर पति त्रिपाठी पर जालसाजी का केस दर्ज हुआ। रुद्रपुर तहसील क्षेत्र के बेलकुंडा निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर एसडीएम ने जांच बैठाई तो पता चला कि नायब तहसीलदार का फर्जी आदेश बनाकर एक व्यक्ति का गलत तरीके से दूसरे के नाम वरासत दर्ज कर लिया गया। अभी चार दिन पहले जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच हुई तो पता चला कि सदर तहसील के सूर्यपुरा निवासी एक व्यक्ति का लेखपाल ने गलत तरीके से वरासत दर्ज कर लिया था। इस मामले में लेखपाल ज्योति मल्ल को निलंबित कर दिया गया है।
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कोट:
कौला पांडेय निवासी शिवेंद्र पांडेय ने बताया कि करीब एक साल से तहसील का चक्कर काट रहा हूं, लेकिन अभी तक वरासत दर्ज नहीं हो पाया। नोएडा मेंं नौकरी करता हूं, बार-बार आना संभव नहीं है। लेखपाल को कई बार फोन किया, लेकिन वह बार-बार टालते रहे।
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कोट:
भू राजस्व के वादों को निपटाने का प्रयास किया जाता है। चुनावी व्यस्तता की वजह से प्रगति धीमी है। सीलिंग की भूमि प्रकरण में जो दोषी हैं उन पर कार्रवाई होगी। जांच आख्या आई है। वरासत के मामले में दोषी लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
-रजनीश राय, मुख्य राजस्व अधिकारी
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जिले की जमीनों का विवाद जिनके दर पर सुलझने के लिए पहुंचता है, वही पूरी चालाकी के साथ उलझाकर अपना मिशन साध रहे हैं। इसमें लेखपाल के अलावा तहसील के बड़े अफसरों तक की भूमिका संदिग्ध है। इन्हीं से जुड़े तथाकथित प्रापर्टी डीलर और भू-माफिया गठजोड़ कर मालामाल हो रहे हैं। जिले में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें जांच करने के लिए जिन्हें भेजा गया वही जमीन में हिस्सेदार बन गए और नियमों की अनदेखी कर बैनामा भी करा लिया।
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सबसे गंभीर बात तो यह है कि अपनी वाजिब जमीन पाने के लिए वरासत के लिए लोग तहसीलों का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। खतौनी में गलत नाम दर्ज कर हेराफेरी कर जमीन की चौहद्दी भी बदल दी जा रही है। गलत करने वाले ने तो श्मशान और चारागाह की भूमि को भी नहीं छोड़ा और उसमें भी गोलमाल कर दिया है।
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जनपद में राजस्व के 39110 मामले हैं लंबित
- देवरिया सदर-11219
- सलेमपुर -8862
- भाटपाररानी- 4715
- बरहज - 4394
- रुद्रपुर - 5786
सीलिंग की भूमि हथियाने के लिए सक्रिय हैं गिरोह
देवरिया। जनपद में सीलिंग की भूमि पर भू-माफियाओं की नजर है। वह तहसील के बड़े अफसर और छोटे तक से साठगांठ कर अपने नाम कराने का काम कर रहे हैं। कलक्ट्रेट बार के पूर्व अध्यक्ष बृज बांके तिवारी की शिकायत पर दो मामले उजागर हुए हैं। इसमें रुद्रपुर और सलेमपुर तहसील क्षेत्र की जमीन है। जिनका नामांतरण किया गया है। इस मामले की जांच सीआरओ ने की, तो खुलासा हुआ। अब इसमें शामिल अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
रुद्रपुर तहसील क्षेत्र में करोड़ों रुपये की सीलिंग की भूमि के मामले में वर्ष 2017 से लंबित रीकाल आवेदन में भी निर्णय पारित करने का निर्देश डीएम ने दिया है। उत्तर प्रदेश जोत सीमा आरोपण अधिनियम- 1960 तीन जनवरी 1961 को लागू हुआ था। इसके बाद अतिरिक्त भूमि निर्धारण की कार्रवाई में शुरू की गई। इस अधिनियम के तहत रुद्रपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम जंगल तरैनी में 35.18 एकड़, परसा जोकहा में 0.66 एकड़ भूमि 13 जनवरी 1989 को सरकारी घोषित हो गई।
इसके अलावा भी तहसील क्षेत्र के कुछ अन्य गांवों के 7.30 एकड़ से अधिक भूमि सीलिंग के तहत निकल गई। अफसरों की मिलीभगत से धारा - 34 और 229 बी के तहत उक्त भूमि दूसरे के नाम कर दिया गया है। कुल नौ वादों में वर्ष 1994 से लेकर जून 2022 तक नामांतरण करने का आदेश किया गया है। सलेमपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम मझौली में सीलिंग में अतिरिक्त घोषित हुई भूमि का क्रय-विक्रय किया गया है। इतना ही नहीं मुख्य राजस्व अधिकारी ने तहसीलदार को यह भी बताया है कि इस मामले में न्यायालय का स्थगन आदेश है। इसके बावजूद भी सीलिंग की भूमि का नामांतरण किया गया है।
ऐसे सभी नामांतरण नियमानुसार निरस्त कर खतौनी की प्रति 15 अंदर सीआरओ ने तलब किया है। इसी तरह जमुई तप्पा बरसीपार में चारागाह एवं श्मशान खाते की भूमि में हेराफेरी कर नामांतरण किया गया है। इसको देखते हुए सीआरओ ने बेदखली का भी आदेश दिया है।
जांच में उजागर हो चुके हैं कुछ लेखपालों के कारनामे
देवरिया। शहर के एसएसबीएल इंटर कॉलेज के पास एक भूमि का विवाद था। तत्कालीन जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने जांच बैठाई तो पता चला कि देवरिया सदर, सलेमपुर, भाटपाररानी तहसील में तैनात लेखपालों ने दो कट्ठा भूमि अपने परिजनों के नाम ही बैनामा करा लिया है, जो करोड़ों रुपये की भूमि है।
तरकुलवा थाना क्षेत्र के गुद्दीजोर गांव निवासी त्रिगुणायक नारायण ने शिकायत की थी कि गांव की बंजर भूमि खतौनी में हेराफेरी कर गांव के एक दूसरे व्यक्ति के नाम कर दिया गया है। इस मामले में तत्कालीन लेखपाल रमाशंकर पति त्रिपाठी पर जालसाजी का केस दर्ज हुआ। रुद्रपुर तहसील क्षेत्र के बेलकुंडा निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर एसडीएम ने जांच बैठाई तो पता चला कि नायब तहसीलदार का फर्जी आदेश बनाकर एक व्यक्ति का गलत तरीके से दूसरे के नाम वरासत दर्ज कर लिया गया। अभी चार दिन पहले जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच हुई तो पता चला कि सदर तहसील के सूर्यपुरा निवासी एक व्यक्ति का लेखपाल ने गलत तरीके से वरासत दर्ज कर लिया था। इस मामले में लेखपाल ज्योति मल्ल को निलंबित कर दिया गया है।
कोट:
कौला पांडेय निवासी शिवेंद्र पांडेय ने बताया कि करीब एक साल से तहसील का चक्कर काट रहा हूं, लेकिन अभी तक वरासत दर्ज नहीं हो पाया। नोएडा मेंं नौकरी करता हूं, बार-बार आना संभव नहीं है। लेखपाल को कई बार फोन किया, लेकिन वह बार-बार टालते रहे।
कोट:
भू राजस्व के वादों को निपटाने का प्रयास किया जाता है। चुनावी व्यस्तता की वजह से प्रगति धीमी है। सीलिंग की भूमि प्रकरण में जो दोषी हैं उन पर कार्रवाई होगी। जांच आख्या आई है। वरासत के मामले में दोषी लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
-रजनीश राय, मुख्य राजस्व अधिकारी