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Deoria News: न समय से खुलता है अस्पताल न पहुंचते हैं डॉक्टर
Sat, 08 Jun 2024 03:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 08 Jun 2024 03:18 AM IST
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खुलने के समय से डेढ़ घंटे बाद तक बंद राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल बैरौना। संवाद
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय बैरौना का हाल, मरीज करते हैं इंतजार
फोटो समाचार.......
सोनूघाट । सदर ब्लॉक के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय बैरौना में न तो डॉक्टरों के आने का समय निर्धारित है और न ही स्टाफ का। अस्पताल भी समय से नहीं खुलता है। मरीज अस्पताल खुलने के समय से पहले ही वहां पहुंच जाते हैं। कर्मी आकर अस्पताल खोल भी देते हैं तो डॉक्टर के लिए भी घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई ग्रामीण तो बिना डॉक्टर से दिखाए बैरंग लौट जाते है। शुक्रवार को रिपोर्टर ने राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल बैरौना का जायजा लिया तो हकीकत सामने आई। संवाद
सुबह 9:30 बजे अस्पताल में लटक रहा था ताला, मरीज कर रहे थे इंतजार
आए दिन राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल के समय से नहीं खुलने की शिकायत को संज्ञान में लेकर रिपोर्टर करीब 9:30 बजे अस्पताल पहुंचा। वहां देखा कि बाहर में करीब छह से सात की संख्या में मरीज जहां-तहां छांव में बैठे हुए हैं। अस्पताल के गेट पर ताला लटका हुआ है। मरीजों ने बताया कि सुबह आठ बजे से अस्पताल के खुलने व डॉक्टर के आने का इंतजार कर रहे हैं।
सुबह 8 बजे से 2 बजे तक संचालित होती है ओपीडी
आयुर्वेदिक अस्पताल के खुलने का इंतजार कर रहे बैरौना निवासी रामप्रवेश विश्वकर्मा, रियाजुद्दीन अंसारी, रामकिशोर भगत, सीताराम ने बताया कि अस्पताल के खुलने का समय आठ बजे निर्धारित है, लेकिन अस्पताल कभी भी आठ बजे नहीं खुलता है। जबकि ओपीडी आठ से दो बजे तक ही चलती है।
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रोजाना दर्जनों मरीज इंतजार कर लौट जाते हैं इलाज कराने आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंचे लोगों का कहना है कि रोजाना अस्पताल विलंब से खुलता है। दर्जनों लोग सुबह में पहुंचते हैं और डेढ़ से दो घंटे इंतजार करने के बाद बैरंग लौट जाते हैं। इसे लेकर कई बार मरीजों की नोकझोंक भी हो चुकी है।
9:45 पर खुला अस्पताल, दवाओं को रखने का नहीं था समुचित इंतजाम
करीब 9:45 पर एक वार्ड बॉय सीधा अस्पताल के मेन गेट पहुंचा। उसने हेलमेट तक नहीं उतारा और सीधा ताला खोलने लगा। उसे किसी के माध्यम से रिपोर्टर के पहुंचने की सूचना मिली तो वह भागता हुआ पहुंचा था। इसके बाद जब टीम ने अंदर जाकर देखा तो आयुर्वेद की महंगी और दुर्लभ दवाओं को रखने का समुचित इंतजाम नहीं था। इन दवाओं को बेतरतीब तरीके से रखा गया था।
अपना भवन बनकर तैयार, फिर भी ग्राम के अतिरिक्त भवन में चलता है अस्पताल
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय का स्वयं का भवन करीब 30 लाख की लागत से कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल ने डेढ़ साल पहले बनाकर कर तैयार कर दिया है। लेकिन, विभागीय उदासीनता के चलते अब तक आयुर्वेदिक अस्पताल को इसमें शिफ्ट नहीं किया गया है। अस्पताल ग्राम पंचायत के अतिरिक्त भवन में संचालित होता है।
यह कहते हैं जिम्मेदार
इस संबंध में क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. विशाल चौधरी ने बताया कि मैं विभागीय कार्य से लखनऊ में हूं। आने पर मामले की जांच कराऊंगा। जो भी दोषी होगा, कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जहां तक रही बनकर तैयार भवन में अस्पताल को शिफ्ट करने की बात तो एक सप्ताह के अंदर अस्पताल को शिफ्ट कराने की पहल करूंगा।
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फोटो समाचार.......
सोनूघाट । सदर ब्लॉक के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय बैरौना में न तो डॉक्टरों के आने का समय निर्धारित है और न ही स्टाफ का। अस्पताल भी समय से नहीं खुलता है। मरीज अस्पताल खुलने के समय से पहले ही वहां पहुंच जाते हैं। कर्मी आकर अस्पताल खोल भी देते हैं तो डॉक्टर के लिए भी घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई ग्रामीण तो बिना डॉक्टर से दिखाए बैरंग लौट जाते है। शुक्रवार को रिपोर्टर ने राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल बैरौना का जायजा लिया तो हकीकत सामने आई। संवाद
सुबह 9:30 बजे अस्पताल में लटक रहा था ताला, मरीज कर रहे थे इंतजार
आए दिन राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल के समय से नहीं खुलने की शिकायत को संज्ञान में लेकर रिपोर्टर करीब 9:30 बजे अस्पताल पहुंचा। वहां देखा कि बाहर में करीब छह से सात की संख्या में मरीज जहां-तहां छांव में बैठे हुए हैं। अस्पताल के गेट पर ताला लटका हुआ है। मरीजों ने बताया कि सुबह आठ बजे से अस्पताल के खुलने व डॉक्टर के आने का इंतजार कर रहे हैं।
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सुबह 8 बजे से 2 बजे तक संचालित होती है ओपीडी
आयुर्वेदिक अस्पताल के खुलने का इंतजार कर रहे बैरौना निवासी रामप्रवेश विश्वकर्मा, रियाजुद्दीन अंसारी, रामकिशोर भगत, सीताराम ने बताया कि अस्पताल के खुलने का समय आठ बजे निर्धारित है, लेकिन अस्पताल कभी भी आठ बजे नहीं खुलता है। जबकि ओपीडी आठ से दो बजे तक ही चलती है।
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रोजाना दर्जनों मरीज इंतजार कर लौट जाते हैं इलाज कराने आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंचे लोगों का कहना है कि रोजाना अस्पताल विलंब से खुलता है। दर्जनों लोग सुबह में पहुंचते हैं और डेढ़ से दो घंटे इंतजार करने के बाद बैरंग लौट जाते हैं। इसे लेकर कई बार मरीजों की नोकझोंक भी हो चुकी है।
9:45 पर खुला अस्पताल, दवाओं को रखने का नहीं था समुचित इंतजाम
करीब 9:45 पर एक वार्ड बॉय सीधा अस्पताल के मेन गेट पहुंचा। उसने हेलमेट तक नहीं उतारा और सीधा ताला खोलने लगा। उसे किसी के माध्यम से रिपोर्टर के पहुंचने की सूचना मिली तो वह भागता हुआ पहुंचा था। इसके बाद जब टीम ने अंदर जाकर देखा तो आयुर्वेद की महंगी और दुर्लभ दवाओं को रखने का समुचित इंतजाम नहीं था। इन दवाओं को बेतरतीब तरीके से रखा गया था।
अपना भवन बनकर तैयार, फिर भी ग्राम के अतिरिक्त भवन में चलता है अस्पताल
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय का स्वयं का भवन करीब 30 लाख की लागत से कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल ने डेढ़ साल पहले बनाकर कर तैयार कर दिया है। लेकिन, विभागीय उदासीनता के चलते अब तक आयुर्वेदिक अस्पताल को इसमें शिफ्ट नहीं किया गया है। अस्पताल ग्राम पंचायत के अतिरिक्त भवन में संचालित होता है।
यह कहते हैं जिम्मेदार
इस संबंध में क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. विशाल चौधरी ने बताया कि मैं विभागीय कार्य से लखनऊ में हूं। आने पर मामले की जांच कराऊंगा। जो भी दोषी होगा, कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जहां तक रही बनकर तैयार भवन में अस्पताल को शिफ्ट करने की बात तो एक सप्ताह के अंदर अस्पताल को शिफ्ट कराने की पहल करूंगा।