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Deoria News: जांच की सुविधा नहीं, मरीजों की जेब हो रही ढीली
Sat, 09 Mar 2024 12:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 09 Mar 2024 12:56 AM IST
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...फोटो समाचार
बाहर निजी सेंटरों में मरीजों को करानी पड़ रही जांच, देनी पड़ रही अधिक कीमत
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में ओपीजी में जांच की सुविधा नहीं है। इससे मरीजों के डायग्नोसिस में दिक्कत होती है। वहीं, मरीजों को भी परेशानी होती है। इसके लिए बाहर निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है। जहां उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। इससे समय बर्बाद होने के साथ जेब ढीली करनी पड़ रही है। इस सुविधा के होने से काफी सहूलियत होती।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के दंत विभाग की ओपीडी में करीब 100 मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। इसमें दांत में दर्द, इंफेक्शन, सड़न, ट्यूमर, हड्डी टूटने, गलने सहित अन्य बीमारी से पीड़ित लोग होते हैं। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर मरीजों के दांत का रूट केनाल ट्रीटमेंट (आरसीटी) और आर्थो पेंटोग्राफी (ओपीजी) एक्स-रे कराने की सलाह देते हैं। यहां दो माह पहले आरसीटी जांच की सुविधा शुरू कर दी गई, लेकिन यह छोटा एक्स-रे होता है, जो केवल एक से दो दांत का ही होता है। पर ओपीजी बड़ा और महत्वपूर्ण एक्स-रे होता है। इसमें पूरे जबड़े के विभिन्न एंगल की जांच होती है। इससे मर्ज के बारे में जानकारी करने में आसानी होती है, लेकिन यह सुविधा नहीं उपलब्ध नहीं है।
हर रोज करीब 25 से 30 मरीजों को जांच कराने की जरूरत होती है। इस जांच के लिए उन्हें निजी सेंटरों की ओर रुख करना पड़ता है। जहां उन्हें जेब ढीली करनी पड़ती है। 600 से 700 रुपये कीमत चुकानी पड़ती है। इससे मरीजों को परेशानी होती है। यहां जांच की सुविधा होने पर मरीजों की जांच काफी कम शुल्क पर हो जाती। गर्मी के मौसम में दांत के मरीजों की संख्या में इजाफा होता है। दांत में सड़न, दर्द, पायरिया, आरसीटी, हाइपर सेंसटेविटी के मरीज आते हैं।
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ओपीजी जांच पूरे मुंह जबड़े की होती है। यह सामने, दाएं, बाएं एंगिल से होता है। इससे हड्डी के बारे में जानकारी मिलती है। दांत में हड्डी टूटने, हड्डी के अंदर से गलने से इंफेक्शन, सिस्ट, ट्यूमर के बारे में जानकारी के लिए जरूरत होती है। जबड़े के अंतिम दांत न निकलने और टेढ़े-मेढे दांत के ऑपरेशन के लिए यह एक्स-रे कराया जाता है। दुर्घटना के केस में भी लोगों के जबड़े में दिक्कत आ जाती है। इससे पूरे जबड़े के बारे में जानकारी होती है। इससे इलाज करने में सहूलियत होती है। साथ ही अन्य दांतों को खराब होने से बचाया जा सकता है।
कोट
दंत विभाग में आरबीजी तथा आरसीटी की सुविधा शुरू कर दी गई है। इससे मरीजों के इलाज में आसानी हो रही है। ओपीजी न होने से मरीजों को दिक्कत हो रही है। इस एक्स-रे के लिए भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द जगह चिह्नित कर मशीन स्थापित करा दी जाएगी और जांच होने लगेगी।
-डॉ. राजेश कुमार बरनवाल
प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, देवरिया
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बाहर निजी सेंटरों में मरीजों को करानी पड़ रही जांच, देनी पड़ रही अधिक कीमत
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में ओपीजी में जांच की सुविधा नहीं है। इससे मरीजों के डायग्नोसिस में दिक्कत होती है। वहीं, मरीजों को भी परेशानी होती है। इसके लिए बाहर निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है। जहां उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। इससे समय बर्बाद होने के साथ जेब ढीली करनी पड़ रही है। इस सुविधा के होने से काफी सहूलियत होती।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के दंत विभाग की ओपीडी में करीब 100 मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। इसमें दांत में दर्द, इंफेक्शन, सड़न, ट्यूमर, हड्डी टूटने, गलने सहित अन्य बीमारी से पीड़ित लोग होते हैं। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर मरीजों के दांत का रूट केनाल ट्रीटमेंट (आरसीटी) और आर्थो पेंटोग्राफी (ओपीजी) एक्स-रे कराने की सलाह देते हैं। यहां दो माह पहले आरसीटी जांच की सुविधा शुरू कर दी गई, लेकिन यह छोटा एक्स-रे होता है, जो केवल एक से दो दांत का ही होता है। पर ओपीजी बड़ा और महत्वपूर्ण एक्स-रे होता है। इसमें पूरे जबड़े के विभिन्न एंगल की जांच होती है। इससे मर्ज के बारे में जानकारी करने में आसानी होती है, लेकिन यह सुविधा नहीं उपलब्ध नहीं है।
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हर रोज करीब 25 से 30 मरीजों को जांच कराने की जरूरत होती है। इस जांच के लिए उन्हें निजी सेंटरों की ओर रुख करना पड़ता है। जहां उन्हें जेब ढीली करनी पड़ती है। 600 से 700 रुपये कीमत चुकानी पड़ती है। इससे मरीजों को परेशानी होती है। यहां जांच की सुविधा होने पर मरीजों की जांच काफी कम शुल्क पर हो जाती। गर्मी के मौसम में दांत के मरीजों की संख्या में इजाफा होता है। दांत में सड़न, दर्द, पायरिया, आरसीटी, हाइपर सेंसटेविटी के मरीज आते हैं।
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ओपीजी जांच पूरे मुंह जबड़े की होती है। यह सामने, दाएं, बाएं एंगिल से होता है। इससे हड्डी के बारे में जानकारी मिलती है। दांत में हड्डी टूटने, हड्डी के अंदर से गलने से इंफेक्शन, सिस्ट, ट्यूमर के बारे में जानकारी के लिए जरूरत होती है। जबड़े के अंतिम दांत न निकलने और टेढ़े-मेढे दांत के ऑपरेशन के लिए यह एक्स-रे कराया जाता है। दुर्घटना के केस में भी लोगों के जबड़े में दिक्कत आ जाती है। इससे पूरे जबड़े के बारे में जानकारी होती है। इससे इलाज करने में सहूलियत होती है। साथ ही अन्य दांतों को खराब होने से बचाया जा सकता है।
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दंत विभाग में आरबीजी तथा आरसीटी की सुविधा शुरू कर दी गई है। इससे मरीजों के इलाज में आसानी हो रही है। ओपीजी न होने से मरीजों को दिक्कत हो रही है। इस एक्स-रे के लिए भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द जगह चिह्नित कर मशीन स्थापित करा दी जाएगी और जांच होने लगेगी।
-डॉ. राजेश कुमार बरनवाल
प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, देवरिया