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आग लगे तो चालक ढूंढने में ही बीत जाएंगे घंटों
Sun, 02 Jun 2019 11:54 PM IST
राकेश पांडेय
deoria
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Published by: राकेश पांडेय
Updated Sun, 02 Jun 2019 11:54 PM IST
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फायर स्टेशन।
- फोटो : amar ujala
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देवरिया। जिले में कहीं आग लग जाए तो यहां के अग्निशमन विभाग को चालक ढूंढने में ही घंटों लग जाएंगे। दरअसल, छह वाहनों को चलाने के लिए विभाग के पास मात्र तीन चालक है। इन्हीं के भरोसे जिले की पांच तहसीलों में 32 लाख आबादी को आग से बचाव का जिम्मा है। यही कारण है कि जिले में जब भी आग लगने की बड़ी घटनाएं हुईं, पड़ोसी जिलों से मदद लेनी पड़ी है।
जिले में छोटी-बड़ी तमाम फैक्ट्रियां, विद्युत निगम के दर्जनों उपकेंद्र, चीनी मिल और बैतालपुुर में ऑयल डिपो है। अब तो शहर में तमाम मॉल, कोचिंग सेंटर और निजी स्कूल भी खुल गए हैं। जिले की आबादी भी लगभग 32 लाख है। इन सबके सुरक्षा की जिम्मेदारी अग्निशमन विभाग के पास है, लेकिन विभाग ही संसाधन और कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। हालत यह है कि आग लगने की बड़ी घटना को काबू करने में हर बार विभाग नाकाम रहता है। विभाग को गोरखपुर और कुशीनगर जिले से मदद मांगनी पड़ती है। पिछले दिनों इंडस्ट्रियल एरिया में अटैची फैक्ट्री में आग लगी तो गोरखपुर और कुशीनगर से पहुंची अग्निशमन की गाड़ियों ने आग बुझाने में मदद की थी। आठ घंटे की मशक्कत के बाद आग को काबू किया गया था। इस घटना के बाद जिले के आलाधिकारियों ने शासन को पत्र लिखकर यहां वाहनों और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग की, लेकिन इस दिशा में शासन की ओर से अभी तक कोई सकारात्मक काम नहीं हो पाया है। इसके चलते विभाग अपने पास मौजूद संसाधनों से ही आग बुझाने के लिए मशक्कत करता है।
इनसेट में-
विभाग के पास मौजूद है यह संसाधन
अग्निशमन विभाग के पास ढाई हजार लीटर क्षमता की तीन दमकल गाड़ी है। इतनी ही पंप वाली छोटी गाड़ियां भी हैं। 400 लीटर टैंक वाली एक छोटी गाड़ी विभाग के पास है। इसी के भरोसे विभाग जिले में आग की घटनाओं पर काबू पाने का प्रयास करता है। गर्मी के मौसम में एक साथ कई क्षेत्रों में आग लगने की घटना से विभाग को काफी दिक्कत होती है। कई बार नाराज लोग कर्मचारियों पर हमला भी कर देते हैं।
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इनसेट में-
लंबे समय से खाली है एफएसओ का पद
अग्निशमन विभाग में एफएसओ और चालक के पद काफी समय से खाली चल रहे हैं। वर्तमान में विभाग के पास 18 फायरमैन, 6 हवलदार, 3 चालक, 5 एफएसएसओ, एक सीएफओ हैं। इसके साथ आधा दर्जन वाहनों को चलाने के लिए मात्र तीन चालक ही हैं। जरूरत पड़ने पर मात्र तीन ही गाड़ियों का उपयोग हो पाता है। शेष के लिए चालक ढूढ़ना पड़ता है।
वर्जन
सभी सर्किल में एक बड़ी और एक छोटी गाड़ी की व्यवस्था कराने के लिए शासन से पत्राचार किया गया है। इसके लिए अग्निशमन विभाग के डीजी से वार्ता की गई है। विभाग में संसाधनों की कमी को दूर कराने का प्रयास किया जा रहा है।
-शिष्यपाल, एएसपी।
आग से चार झोपड़ियां जलीं
भाटपाररानी। बनकटा थाना क्षेत्र के एकडांगा मिश्र में रविवार की दोपहर अज्ञात कारणों से लगी आग में चार झोपड़ियां जल गई। उनमें रखा घर-गृहस्थी का सामान भी नष्ट हो गया। आग बुझाने की कोशिश में महिला भी झुलस गई। फायर ब्रिगेड की टीम ने ग्रामीणों के अथक प्रयास से आग पर काबू पाया। एकडांगा मिश्र गांव निवासी चंद्रदेव प्रसाद की झोपड़ी में दोपहर करीब एक बजे अचानक आग लग गई। थोड़ी ही देर में आसपास की चार झोपड़ियां भी चपेट में आ गई। आग बुझाते समय चंद्रदेव की पत्नी प्रेमशीला का हाथ जल गया। आग से चंद्रदेव का गेहूं, कपड़ा बिस्तर समेत सभी सामान जल कर नष्ट हो गया। दो गाय, एक बछिया भी झुलस गए। जवाहर प्रसाद की एक झोपड़ी, एक भैंस झुलस गई। कोमल प्रसाद और शिवशंकर की झोपड़ी भी आग की चपेट में आ गई।
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जिले में छोटी-बड़ी तमाम फैक्ट्रियां, विद्युत निगम के दर्जनों उपकेंद्र, चीनी मिल और बैतालपुुर में ऑयल डिपो है। अब तो शहर में तमाम मॉल, कोचिंग सेंटर और निजी स्कूल भी खुल गए हैं। जिले की आबादी भी लगभग 32 लाख है। इन सबके सुरक्षा की जिम्मेदारी अग्निशमन विभाग के पास है, लेकिन विभाग ही संसाधन और कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। हालत यह है कि आग लगने की बड़ी घटना को काबू करने में हर बार विभाग नाकाम रहता है। विभाग को गोरखपुर और कुशीनगर जिले से मदद मांगनी पड़ती है। पिछले दिनों इंडस्ट्रियल एरिया में अटैची फैक्ट्री में आग लगी तो गोरखपुर और कुशीनगर से पहुंची अग्निशमन की गाड़ियों ने आग बुझाने में मदद की थी। आठ घंटे की मशक्कत के बाद आग को काबू किया गया था। इस घटना के बाद जिले के आलाधिकारियों ने शासन को पत्र लिखकर यहां वाहनों और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग की, लेकिन इस दिशा में शासन की ओर से अभी तक कोई सकारात्मक काम नहीं हो पाया है। इसके चलते विभाग अपने पास मौजूद संसाधनों से ही आग बुझाने के लिए मशक्कत करता है।
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विभाग के पास मौजूद है यह संसाधन
अग्निशमन विभाग के पास ढाई हजार लीटर क्षमता की तीन दमकल गाड़ी है। इतनी ही पंप वाली छोटी गाड़ियां भी हैं। 400 लीटर टैंक वाली एक छोटी गाड़ी विभाग के पास है। इसी के भरोसे विभाग जिले में आग की घटनाओं पर काबू पाने का प्रयास करता है। गर्मी के मौसम में एक साथ कई क्षेत्रों में आग लगने की घटना से विभाग को काफी दिक्कत होती है। कई बार नाराज लोग कर्मचारियों पर हमला भी कर देते हैं।
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लंबे समय से खाली है एफएसओ का पद
अग्निशमन विभाग में एफएसओ और चालक के पद काफी समय से खाली चल रहे हैं। वर्तमान में विभाग के पास 18 फायरमैन, 6 हवलदार, 3 चालक, 5 एफएसएसओ, एक सीएफओ हैं। इसके साथ आधा दर्जन वाहनों को चलाने के लिए मात्र तीन चालक ही हैं। जरूरत पड़ने पर मात्र तीन ही गाड़ियों का उपयोग हो पाता है। शेष के लिए चालक ढूढ़ना पड़ता है।
वर्जन
सभी सर्किल में एक बड़ी और एक छोटी गाड़ी की व्यवस्था कराने के लिए शासन से पत्राचार किया गया है। इसके लिए अग्निशमन विभाग के डीजी से वार्ता की गई है। विभाग में संसाधनों की कमी को दूर कराने का प्रयास किया जा रहा है।
-शिष्यपाल, एएसपी।
आग से चार झोपड़ियां जलीं
भाटपाररानी। बनकटा थाना क्षेत्र के एकडांगा मिश्र में रविवार की दोपहर अज्ञात कारणों से लगी आग में चार झोपड़ियां जल गई। उनमें रखा घर-गृहस्थी का सामान भी नष्ट हो गया। आग बुझाने की कोशिश में महिला भी झुलस गई। फायर ब्रिगेड की टीम ने ग्रामीणों के अथक प्रयास से आग पर काबू पाया। एकडांगा मिश्र गांव निवासी चंद्रदेव प्रसाद की झोपड़ी में दोपहर करीब एक बजे अचानक आग लग गई। थोड़ी ही देर में आसपास की चार झोपड़ियां भी चपेट में आ गई। आग बुझाते समय चंद्रदेव की पत्नी प्रेमशीला का हाथ जल गया। आग से चंद्रदेव का गेहूं, कपड़ा बिस्तर समेत सभी सामान जल कर नष्ट हो गया। दो गाय, एक बछिया भी झुलस गए। जवाहर प्रसाद की एक झोपड़ी, एक भैंस झुलस गई। कोमल प्रसाद और शिवशंकर की झोपड़ी भी आग की चपेट में आ गई।