विरोध में शिक्षकों का धरना
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जनगणना में आधार कार्ड संबंधी अभिलेखों को जोड़ने और संशोधन करने के कार्य के विरोध में आकस्मिक अवकाश लेकर शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय पर धरना दिया।
शिक्षकों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर तीन सूत्रीय मांगपत्र दिया।
धरने को संबोधित करते हुए प्रदेशीय प्रचार मंत्री विजय कुमार सिंह ने कहा कि तीन सितंबर 2012 को तत्कालीन मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने आदेश दिया था कि नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधान के अनुसार किसी भी शिक्षक को दशकीय जनगणना, आपदा राहत कर्तव्य अथवा संसद, राज्य विधान मंडल का स्थानीय निकाय संबंधी निर्वाचन कर्त्तव्यों के अतिरिक्त अन्य किसी भी कार्य में नहीं लगाया जा सकता है।
इसके बाद भी शिक्षकों को आधार कार्ड से जोड़ने के कार्य में लगाकर प्राथमिक शिक्षा का बर्बाद किया जा रहा है। संगठन इसका विरोध करता है।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से शिक्षकों की ड्यूटी बीएलओ कार्य में लगाए जाने के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। निर्णय लंबित चल रहा है।
जिलाध्यक्ष अनिल भारती ने कहा कि जिला प्रशासन बार-बार शिक्षकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्य में लगाकर शिक्षा को बर्बाद करने में लगा है।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षकों के ऑनलाइन हाजिरी का फरमान तुगलकी है। प्रदेश भर के शिक्षक इसका विरोध कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक सेवानिवृत्त कल्याण परिषद के अध्यक्ष शार्दूल सिंह, शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष मनोज सिंह चंदेल, सच्चिदानंद राव, वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर सिह ने संगठन की ओर से पूर्ण समर्थन दिया है।
धरने की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अनिल कुमार भारती और संचालन गोविंद सिंह ने किया। इसके बाद सैकड़ों की संख्या में शिक्षक नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और तीन सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया।
इस अवसर पर श्याम नारायण मिश्र, शिवाकांत मिश्र, अवनीश दीक्षित, अशोक सिंह, संजीव दुबे, श्रीनिवास मिश्र, प्रियरंजन राय, विंध्याचल यादव, उमेश दीक्षित, अरविंद तिवारी आदि मौजूद रहे।