{"_id":"69c4353bd25d55256607a105","slug":"pensioners-demonstrated-at-the-collectorate-and-submitted-a-memorandum-deoria-news-c-208-1-deo1009-177881-2026-03-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: पेंशनरों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: पेंशनरों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा
विज्ञापन
देवरिया। संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर बुधवार को पेंशनरों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी सीमा पांडेय को सौंपा। इसमें इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) वैधता अधिनियम को वापस लेने की मांग की गई।
उप्र पेंशनर्स कल्याण संस्था के जिलाध्यक्ष श्रीराम त्रिपाठी ने कहा कि आठवें वेतन आयोग में पेंशन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को 2016 के केंद्रीय वेतन आयोग की तर्ज पर ही लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) वैधता अधिनियम 2025 पेंशनरों के लिए एक काला कानून है। यदि इसे लागू किया गया तो पेंशनभोगी वेतन आयोग की अनुशंसाओं के लाभ से वंचित हो जाएंगे, जिससे उन्हें भारी आर्थिक क्षति होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इसे वापस नहीं लिया, तो निर्णायक आंदोलन छेड़ा जाएगा। मार्कंडेय तिवारी और सुदर्शन कुशवाहा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 2005 से नई पेंशन योजना लागू कर कर्मचारियों को उनके बुढ़ापे के सहारे से वंचित किया गया है। उन्होंने कहा कि पेंशन कोई खैरात नहीं बल्कि एक सामाजिक सुरक्षा है, जिसे छीनना संवैधानिक अन्याय है। इस अवसर पर लालसा यादव, दिग्विजय नाथ सिंह, नथुन राय, विजय बहादुर, अशोक कुमार कुशवाहा सहित भारी संख्या में विभिन्न विभागों के सेवानिवृत्त कर्मचारी और पदाधिकारी मौजूद रहे।
विज्ञापन
उप्र पेंशनर्स कल्याण संस्था के जिलाध्यक्ष श्रीराम त्रिपाठी ने कहा कि आठवें वेतन आयोग में पेंशन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को 2016 के केंद्रीय वेतन आयोग की तर्ज पर ही लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) वैधता अधिनियम 2025 पेंशनरों के लिए एक काला कानून है। यदि इसे लागू किया गया तो पेंशनभोगी वेतन आयोग की अनुशंसाओं के लाभ से वंचित हो जाएंगे, जिससे उन्हें भारी आर्थिक क्षति होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इसे वापस नहीं लिया, तो निर्णायक आंदोलन छेड़ा जाएगा। मार्कंडेय तिवारी और सुदर्शन कुशवाहा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 2005 से नई पेंशन योजना लागू कर कर्मचारियों को उनके बुढ़ापे के सहारे से वंचित किया गया है। उन्होंने कहा कि पेंशन कोई खैरात नहीं बल्कि एक सामाजिक सुरक्षा है, जिसे छीनना संवैधानिक अन्याय है। इस अवसर पर लालसा यादव, दिग्विजय नाथ सिंह, नथुन राय, विजय बहादुर, अशोक कुमार कुशवाहा सहित भारी संख्या में विभिन्न विभागों के सेवानिवृत्त कर्मचारी और पदाधिकारी मौजूद रहे।
विज्ञापन