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Deoria News: टीबी की दवा की किल्लत से मरीज परेशान

Mon, 23 Sep 2024 12:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Mon, 23 Sep 2024 12:26 AM IST
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Patients troubled by shortage of TB medicine
- पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है प्रारंभिक टीबी की थ्री-एफडीसी व फोर-एफडीसी दवा
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। क्षय रोग के मरीजों को दी जाने वाली दवा की कमी है। प्रारंभिक टीबी मरीजों को पर्याप्त दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। मरीजों को चार से एक सप्ताह तक ही एक बार में उपलब्ध हो पा रही है, जबकि पहले एक माह की दी जाती थी। एमडीआर मरीज एक दवा समाप्त हो गई है। जिले में चिह्नित करीब 4023 मरीज हैं जिनकी दवा चल रही है। उनके मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ गया है। यह समस्या राज्य औषधि भंडार से वाराणसी से पूरी सप्लाई न मिलने के कारण आ रही है।
सरकार की ओर जांच और दवा की सुविधा मुफ्त है। जिले में क्षय रोगियों को चिह्नित कर इलाज किया जाता है। मरीजों को वजन के मुताबिक डोज निर्धारित होता है। केंद्रीय रोग प्रभाग नई दिल्ली से राज्य औषधि भंडार वाराणसी से मरीजों के लिए दवा उपलब्ध कराई जाती है। इन दिनों पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति न होने से दवा की किल्लत हो गई है। टीबी क्लीनिक और सीएचसी में टू, थ्री और फोर एफडीसी दवा की कमी है। किसी तरह काम चलाया जा रहा है। मरीजों को दवा के लिए बार-बार ट्रीटमेंट यूनिट जाना पड़ रहा है। नियमित दवा न लेने से शरीर में बैक्टीरिया का लोड बढ़ने का खतरा रहता है। कुछ दिन बाद वह दवा खाने से असर नहीं करने की संभावना बनी रहती है। इसके कारण मरीज एमडीआर टीबी की श्रेणी में चला जाता है। यह जटिल टीबी मानी जाती है। मांग के सापेक्ष आपूर्ति नहीं होने से दवा की किल्लत हुई है।
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दवा चलने तक मरीजों को दो किस्त में दिया जाता है तीन हजार रुपये
- टीबी मरीजों को चिह्नित कर इलाज किया जाता है। जिन मरीजों की दवा चल रही है। उन्हें दो किस्त में तीन हजार रुपये दिए जाते हैं। दवा का कोर्स बढ़ने पर अतिरिक्त पांच सौ रुपये प्रतिमाह दिया जाता है।
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जिले में 18 टीबी ट्रीटमेंट यूनिट स्थापित की गई है। यहां से चिह्नित मरीजों को निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यह सुविधा देवरिया सदर और बरहज में दो-दो स्थानों पर है। टीबी यूनिट बनकटा में 179, बरहज में , बतरौली में 157, भलुअनी में 215, भटनी में 185, भाटपाररानी में 225, टीबी क्लीनिक में 235, गौरीबाजार में 332, लार में 365, महेन में48, महुआडीह में 217, परसिया चंदौर में 193, पथरदेवा में 305, पिपरा दौला कदम में 103, रुद्रपुर में 352, सलेमपुर में 325, सिधुवा में 223 व तरकुलवा केंद्र में 168 मरीज हैं। इन्हें इन केंद्रों से दवा दी जाती है। लेकिन, हर जगह दवा की कमी है। सामान्य मरीजों में वयस्क को थ्री व फोर एफडीसी तथा बच्चों को टू व थ्री एफडीसी दवा दी जाती है, जबकि एमडीआर मरीज के लिए सात तरह की दवा होती है।
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दवा छूटने पर बढ़ सकते हैं एमडीआर के मरीज
टीबी के मरीज को नियमित, समय से वजन के अनुसार दवा दी जाती है। दवा छोड़ना और दो से तीन दिन खाने में गैप करने पर दिक्कत बढ़ने की संभावना रहती है। फिर दवा शुरू करने पर वह दवा के असर नहीं करने की संभावना रहती है और मरीज एमडीआर मरीज की श्रेणी में जा सकता है। इस श्रेणी के मरीज के थूकने, खांसने, छींकने से स्वस्थ व्यक्ति में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।



- जिले में क्षय रोगियों को दवा उपलब्ध कराई जा रही है। सभी जगह दवा है। जिस जगह कमी है वहां पर्याप्त मात्रा में दी जाएगी। दवा को लेकर समीक्षा की जाएगी। जल्द राज्य औषधि भंडार से और दवा मंगाई जाएगी। -डॉ. राजेश झा, सीएमओ
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