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647 ग्राम पंचायतों के बनेंगे भवन
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647 ग्राम पंचायतों के बनेंगे भवन
मनरेगा कन्वर्जेंस से होगा पंचायत भवनों का निर्माण
अब तक 1189 में 542 ग्राम पंचायतों के पास है अपना भवन
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिन ग्राम पंचायतों के पास अपने भवन नहीं हैं, वहां जल्द ही भवन निर्माण कराए जाएंगे। शासन ने मनरेगा कन्वर्जेंस के माध्यम से गांवों में पंचायत भवन बनाने की मंजूरी दी है। इसमें 50 प्रतिशत धनराशि केंद्रीय एवं राज्य वित्त से व 50 प्रतिशत धनराशि मनरेगा से खर्च की जाएगी। ग्राम पंचायत का खाता खाली होने की स्थिति में निर्माण का पूरा खर्च मनरेगा से वहन किया जाएगा।
जिले में कुल 1189 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें 647 के पास अपने भवन नहीं हैं। यहां ग्रामसभा की ज्यादातर बैठकें प्रधान के दरवाजे पर होती हैं। चुनावी रंजिश के चलते तमाम लोग ग्राम प्रधान के दरवाजे पर जाना पसंद नहीं करते। चंद लोगों की मौजूदगी में विकास कार्यक्रमों के प्रस्ताव तैयार कर लिए जाते हैं। पंचायत भवन नहीं होने से गांव में पहुंचे अधिकारियों को विद्यालय में आमसभा की बैठक कराना पड़ता है। इससे बच्चों को पठन-पाठन में परेशानी होती है। बैठने के लिए कुर्सी मेज का भी संकट रहता है।
नहीं मिलते पंचायत सचिव
पंचायत भवन सेक्रेटरी का कार्यालय होता है। जहां वह ग्राम पंचायत से जुड़ी फाइलें रखते हैं। जगह व मिलने का समय निश्चित होने के चलते लोगों को अपने प्रमाण पत्रों के सत्यापन में सहूलियत मिलती है। जिन गांवों में पंचायत भवन नहीं हैं, वहां सेक्रेटरी उपल्ब्ध नहीं रहते। उन्हें खोजने के लिए लोगों को ग्राम प्रधान के दरवाजे का चक्कर काटना पड़ता है।
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जिले में पंचायत भवनों की स्थिति
542 ग्राम पंचायतों के पास है अपना भवन
647 ग्राम पंचायत भवन का होना है निर्माण
416 पंचायत भवनों के स्थल का हुआ है चयन
55 पंचायत भवनों का निर्माण शुरू
231 भवनों के स्थल की तलाश जारी
कोट
मौजूदा वित्तीय वर्ष में 647 पंचायत भवनों का निर्माण कन्वर्जेंस के माध्यम से कराया जाना है। 50 प्रतिशत धनराशि केंद्रीय एवं राज्य वित्त से व 50 प्रतिशत धनराशि मनरेगा से खर्च की जाएगी। ग्राम पंचायत का खाता खाली होने की स्थिति में निर्माण का पूरा खर्च मनरेगा से वहन किया जाएगा।
- गजेंद्र कुमार तिवारी, डीसी मनरेगा।
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मनरेगा कन्वर्जेंस से होगा पंचायत भवनों का निर्माण
अब तक 1189 में 542 ग्राम पंचायतों के पास है अपना भवन
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिन ग्राम पंचायतों के पास अपने भवन नहीं हैं, वहां जल्द ही भवन निर्माण कराए जाएंगे। शासन ने मनरेगा कन्वर्जेंस के माध्यम से गांवों में पंचायत भवन बनाने की मंजूरी दी है। इसमें 50 प्रतिशत धनराशि केंद्रीय एवं राज्य वित्त से व 50 प्रतिशत धनराशि मनरेगा से खर्च की जाएगी। ग्राम पंचायत का खाता खाली होने की स्थिति में निर्माण का पूरा खर्च मनरेगा से वहन किया जाएगा।
जिले में कुल 1189 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें 647 के पास अपने भवन नहीं हैं। यहां ग्रामसभा की ज्यादातर बैठकें प्रधान के दरवाजे पर होती हैं। चुनावी रंजिश के चलते तमाम लोग ग्राम प्रधान के दरवाजे पर जाना पसंद नहीं करते। चंद लोगों की मौजूदगी में विकास कार्यक्रमों के प्रस्ताव तैयार कर लिए जाते हैं। पंचायत भवन नहीं होने से गांव में पहुंचे अधिकारियों को विद्यालय में आमसभा की बैठक कराना पड़ता है। इससे बच्चों को पठन-पाठन में परेशानी होती है। बैठने के लिए कुर्सी मेज का भी संकट रहता है।
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नहीं मिलते पंचायत सचिव
पंचायत भवन सेक्रेटरी का कार्यालय होता है। जहां वह ग्राम पंचायत से जुड़ी फाइलें रखते हैं। जगह व मिलने का समय निश्चित होने के चलते लोगों को अपने प्रमाण पत्रों के सत्यापन में सहूलियत मिलती है। जिन गांवों में पंचायत भवन नहीं हैं, वहां सेक्रेटरी उपल्ब्ध नहीं रहते। उन्हें खोजने के लिए लोगों को ग्राम प्रधान के दरवाजे का चक्कर काटना पड़ता है।
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जिले में पंचायत भवनों की स्थिति
542 ग्राम पंचायतों के पास है अपना भवन
647 ग्राम पंचायत भवन का होना है निर्माण
416 पंचायत भवनों के स्थल का हुआ है चयन
55 पंचायत भवनों का निर्माण शुरू
231 भवनों के स्थल की तलाश जारी
कोट
मौजूदा वित्तीय वर्ष में 647 पंचायत भवनों का निर्माण कन्वर्जेंस के माध्यम से कराया जाना है। 50 प्रतिशत धनराशि केंद्रीय एवं राज्य वित्त से व 50 प्रतिशत धनराशि मनरेगा से खर्च की जाएगी। ग्राम पंचायत का खाता खाली होने की स्थिति में निर्माण का पूरा खर्च मनरेगा से वहन किया जाएगा।
- गजेंद्र कुमार तिवारी, डीसी मनरेगा।