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बर्ड फ्लू को लेकर किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के सजग रहने की जरूरत: डीएम
Thu, 11 Jan 2024 12:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 11 Jan 2024 12:23 AM IST
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देवरिया। एवियन इंफ्लूएन्जा (बर्ड फ्लू) के रोकथाम के लिए आवश्यक सावधानियों को बरतने को लेकर जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में हुई।
जिलाधिकारी अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि अभी बर्ड फ्लू को लेकर किसी भी तरह का खतरा नहीं है, लेकिन हमें इससे जुड़ी किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए सजग रहने की आवश्यकता है। कहा कि आर्द्र भूमि की विशेष निगरानी की जाए, जहां पक्षियों का जमावड़ा होता है, जिससे पक्षियों में किसी भी प्रकार के फ्लू के लक्षणों की सूचना तत्काल प्रशासन को मिले और उससे बचाव कार्य शुरू किया जा सके। वन क्षेत्र व जलाशयों की निगरानी में वनकर्मी तथा पुलिस एवं पशुधन कर्मचारी लगातार आपसी सामंजस्य से कार्य करें।
कहीं पर पक्षियों की अस्वाभाविक मृत्यु होती है तो तत्काल प्रयोगशाला में भेजकर उसकी जांच कराई जाए। पोल्ट्री फार्मों पर विशेष नजर रखी जाए। फार्मों में मुर्गियों के बीट की सफाई कराने के लिए फार्म मालिक को प्रेरित किया जाए। सफाई कराते हुए चूना एवं दवाओं का छिड़काव भी कराए जाएं। कहा कि यदि फार्म में मुर्गियां मरती हैं तो उसकी सूचना दी जाए, जिससे सावधानियों को बरतते हुए आवश्यक उपाय किए जा सकें।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने कहा कि इस रोग में कुक्कुटों की कलंगी नीली, आंखों से लगातार स्राव एवं दोनों पैरों से रक्त स्राव होता है। पक्षियों की अचानक बड़ी संख्या में मृत्यु होती है। कहा कि मुर्गी पालकों व सभी व्यक्तियों का सामाजिक दायित्व है कि ऐसे किसी भी पक्षी की सूचना जिला प्रशासन को दें।
इस दौरान सीडीओ प्रत्यूष पांडेय, सीवीओ अरविंद कुमार वैश्य, एसीएमओ डॉ. संजय कुमार आदि मौजूद रहे।
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जिलाधिकारी अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि अभी बर्ड फ्लू को लेकर किसी भी तरह का खतरा नहीं है, लेकिन हमें इससे जुड़ी किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए सजग रहने की आवश्यकता है। कहा कि आर्द्र भूमि की विशेष निगरानी की जाए, जहां पक्षियों का जमावड़ा होता है, जिससे पक्षियों में किसी भी प्रकार के फ्लू के लक्षणों की सूचना तत्काल प्रशासन को मिले और उससे बचाव कार्य शुरू किया जा सके। वन क्षेत्र व जलाशयों की निगरानी में वनकर्मी तथा पुलिस एवं पशुधन कर्मचारी लगातार आपसी सामंजस्य से कार्य करें।
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कहीं पर पक्षियों की अस्वाभाविक मृत्यु होती है तो तत्काल प्रयोगशाला में भेजकर उसकी जांच कराई जाए। पोल्ट्री फार्मों पर विशेष नजर रखी जाए। फार्मों में मुर्गियों के बीट की सफाई कराने के लिए फार्म मालिक को प्रेरित किया जाए। सफाई कराते हुए चूना एवं दवाओं का छिड़काव भी कराए जाएं। कहा कि यदि फार्म में मुर्गियां मरती हैं तो उसकी सूचना दी जाए, जिससे सावधानियों को बरतते हुए आवश्यक उपाय किए जा सकें।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने कहा कि इस रोग में कुक्कुटों की कलंगी नीली, आंखों से लगातार स्राव एवं दोनों पैरों से रक्त स्राव होता है। पक्षियों की अचानक बड़ी संख्या में मृत्यु होती है। कहा कि मुर्गी पालकों व सभी व्यक्तियों का सामाजिक दायित्व है कि ऐसे किसी भी पक्षी की सूचना जिला प्रशासन को दें।
इस दौरान सीडीओ प्रत्यूष पांडेय, सीवीओ अरविंद कुमार वैश्य, एसीएमओ डॉ. संजय कुमार आदि मौजूद रहे।