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Deoria News: नगर पालिका हर माह सफाई पर खर्च की रही तीस लाख, फिर भी मच्छरों से परेशानी
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दो मशीनों से भगा रहे मच्छर, मलेरिया विभाग की 17 मशीनें खा रही जंग, दवाओं और बजट दोनों का अभाव, हांफ रही है व्यवस्था
- जलभराव वाली जगहों पर पनप रहे मच्छर, रात की नींद कर रहे हराम
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गर्मी के मौसम में गंदगी और नालियों के जाम होने की वजह से शहर में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। कागज में नगर पालिका के अफसर हर रोज फॉगिंग का दावा कर रहे हैं। जबकि सच तो यह है कि सफाई व्यवस्था पर हर माह करीब तीस लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। सबसे गंभीर बात तो यह है कि नगर पालिका के पास साढ़े तीन लाख की आबादी पर दो मशीनों के भरोसे फाॅगिंग है, जबकि मलेरिया विभाग के पास मौजूद 17 मशीन खराब होकर जंग खा रही है। इतना ही नहीं दवा और बजट दोनों का अभाव है। इससे तस्वीर साफ है कि मच्छरों के सामने व्यवस्था हांफ रही है। 33 वार्डों में जगह-जगह गंदगी के कारण शहर के लाखों लोगों का खून मच्छर पी रहे हैं। सफाई पर प्रतिमाह 30 लाख खर्च करने के बाद भी गंदगी है। इस कारण शहरवासी मच्छर के डंक से बचने के लिए क्वायल, बिजली से चलने वाले उपकरण का उपयोग कर रहे हैं। इसमें प्रतिदिन उन्हें रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं, नगर पालिका की ओर से हर रोज करीब दस हजार रुपये का डीजल, पेट्रोल और एक लीटर मैलाथियान फॉगिंग मशीन में उपयोग किया जा रहा है। पर इसका असर धरातल पर नहीं दिख रहा है। हालत यह है कि अधिकारी रात में चैन की नींद सोते हैं और आम जनता रतजगा कर मच्छर भगाती है। फॉगिंग की व्यवस्था मात्र कुछ मोहल्ले तक सीमित है।
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खाली प्लॉट मतलब मच्छरों का बसेरा
शहर के विभिन्न मोहल्लों में जाम नालियों के साथ सबसे बड़ी समस्या खाली प्लॉट भी हैं। एक तो वहां पानी जमा होता है, दूसरे लोग कूड़ा भी फेंकते हैं। इस कारण ये स्थान मच्छरों के प्रजनन का केंद्र बन रहे हैं। इसके आसपास मच्छरजनित रोग फैलने की आशंका रहती है। इस तरफ जिम्मेदार अफसरों का ध्यान नहीं है।
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शहर के करीब 10 से 15 वार्ड ऐसे हैं जहां नालियों का समुचित इंतजाम नहीं है। लोग घरों का पानी खाली प्लाॅटों में फेंक रहे हैं। रामुगलाम टोला पूर्वी, रामनाथ देवरिया दक्षिणी, चटनी गड़ही मोहल्ला, मंगलमपूरम, दानोपुर, नाथ नगर, सोमनाथ नगर, अली नगर, शहीद नगर, शांति नगर, महुआबारी आदि मोहल्लों में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से खाली प्लाॅटों में पूरे साल जलभराव रहता है। नगर पालिका नाला सफाई तो करा रही है, लेकिन नालियों में एंटीलार्वा आदि दवाओं का छिड़काव नहीं करा रही। जबकि नए वार्डों में फॉगिंग कब कराई गई है, इसके बारे में लोगों को याद नहीं।
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इनसेट
दवा और उपकरण की कमी से विभाग लाचार
मलेरिया विभाग दवा और उपकरण की कमी से लाचार है। यहां दो साल से मैलाथियान 95 प्रतिशत शासन की ओर से मुहैया नहीं कराया जा सका है। जबकि जिले को हर साल 1250 किलोग्राम दवा की जरूरत फॉगिंग के लिए होती है। यह दवा मलेरिया विभाग आवश्यकतानुसार नगर व ग्रामीण निकायों को देता है। इधर 28 में 17 फॉगिंग मशीनें खराब पड़ी हैं। बजट के अभाव में इनकी मरम्मत नहीं हो पा रही है। इधर, नगर पालिका समय-समय पर सभी मोहल्लों में फॉगिंग व एंटीलार्वा का छिड़काव कराने का दावा करती है। इसे शहरवासी झुठला रहे हैं। लोगों का कहना है कि सभासद के माध्यम से दबाव बनाने पर नगर पालिका मोहल्लों में फॉगिंग करवाती है।
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याद नहीं कब हुई थी फॉगिंग
मोहल्ले में मच्छरों की भरमार साल के 12 महीने रहती है। बार-बार अनुरोध के बाद नगर पालिका मोहल्ले में एंटीलार्वा का छिड़काव व फॉगिंग कराती है। - विवेक मिश्रा, चटनी गड़ही मोहल्ला
-- -- -- -- -- जलजमाव वाली जगह पर नहीं डालते दवा जलजमाव वाली जगह पर नगर पालिका एंटीलार्वा नहीं डलवा रही। घर के पास भारी तादात में मच्छर पनपते हैं। शाम होते ही घरों में घुस जाते हैं। - संजय गुप्ता, रामगुलाम टोला पूर्वी
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अफसरों की काॅलोनी में होती है नियमित फॉगिंग
नगर पालिका बाकी शहर में फॉगिंग कराए या नहीं अफसरों की काॅलोनी में नियमित फॉगिंग कराती है। स्टेडियम के पास, विकास भवन, नगर पालिका कार्यालय, कलक्ट्रेट आदि जगहों पर अक्सर रात में फॉगिंग की महक आती है।
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मच्छरों के काटने से होती हैं ये बीमारियां
मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफिलाइटिस आदि बीमारियां मच्छरों के काटने से होती हैं।
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एक साल में इतने मिले मरीज
- 93 मरीज डेंगू के मिले हैं।
- 12 मरीज जापानी इंसेफिलाइटिस के मिले हैं।
- 03 मरीज मलेरिया के मिले हैं।
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नगर पालिका के पास फॉगिंग के लिए दो मशीनें हैं।
दो मशीनों से दवा का छिड़काव होता है।
400 सफाई कर्मी सफाई में लगे हैं।
वार्ड 32 में आबादी 3.50 लाख है।
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डॉक्टर की सलाह
मेडिकल कॉलेज के डॉ. एचके मिश्र ने बताया कि मच्छर से मलेरिया, कालाजार और डेंगू होता है। अगर लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक से सलाह लेकर दवा का सेवन करना चाहिए। अपने मकान के आस-पास के क्षेत्र को स्वच्छ रखें और जलभराव न होने दें।
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वर्जन
दो साल से विभाग को मैलाथियान 95 प्रतिशत दवा शासन की ओर से उपलब्ध नहीं हो पाई है। 17 फॉगिंग मशीनें खराब पड़ी हैं। इसके मरम्मत के लिए बजट नहीं है। शासन को डिमांड भेजी गई है।
- आरएस यादव, जिला मलेरिया अधिकारी
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वर्जन
रोस्टर के हिसाब से छिड़काव किया जा रहा है। इस समय नाला सफाई का कार्य चल रहा है। एंटी लार्वा का छिड़काव इसके बाद किया जाएगा। लोगों को मच्छर जनित रोगों को लेकर सजग रहना चाहिए। रोहित सिंह, ईओ
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- जलभराव वाली जगहों पर पनप रहे मच्छर, रात की नींद कर रहे हराम
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गर्मी के मौसम में गंदगी और नालियों के जाम होने की वजह से शहर में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। कागज में नगर पालिका के अफसर हर रोज फॉगिंग का दावा कर रहे हैं। जबकि सच तो यह है कि सफाई व्यवस्था पर हर माह करीब तीस लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। सबसे गंभीर बात तो यह है कि नगर पालिका के पास साढ़े तीन लाख की आबादी पर दो मशीनों के भरोसे फाॅगिंग है, जबकि मलेरिया विभाग के पास मौजूद 17 मशीन खराब होकर जंग खा रही है। इतना ही नहीं दवा और बजट दोनों का अभाव है। इससे तस्वीर साफ है कि मच्छरों के सामने व्यवस्था हांफ रही है। 33 वार्डों में जगह-जगह गंदगी के कारण शहर के लाखों लोगों का खून मच्छर पी रहे हैं। सफाई पर प्रतिमाह 30 लाख खर्च करने के बाद भी गंदगी है। इस कारण शहरवासी मच्छर के डंक से बचने के लिए क्वायल, बिजली से चलने वाले उपकरण का उपयोग कर रहे हैं। इसमें प्रतिदिन उन्हें रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं, नगर पालिका की ओर से हर रोज करीब दस हजार रुपये का डीजल, पेट्रोल और एक लीटर मैलाथियान फॉगिंग मशीन में उपयोग किया जा रहा है। पर इसका असर धरातल पर नहीं दिख रहा है। हालत यह है कि अधिकारी रात में चैन की नींद सोते हैं और आम जनता रतजगा कर मच्छर भगाती है। फॉगिंग की व्यवस्था मात्र कुछ मोहल्ले तक सीमित है।
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खाली प्लॉट मतलब मच्छरों का बसेरा
शहर के विभिन्न मोहल्लों में जाम नालियों के साथ सबसे बड़ी समस्या खाली प्लॉट भी हैं। एक तो वहां पानी जमा होता है, दूसरे लोग कूड़ा भी फेंकते हैं। इस कारण ये स्थान मच्छरों के प्रजनन का केंद्र बन रहे हैं। इसके आसपास मच्छरजनित रोग फैलने की आशंका रहती है। इस तरफ जिम्मेदार अफसरों का ध्यान नहीं है।
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शहर के करीब 10 से 15 वार्ड ऐसे हैं जहां नालियों का समुचित इंतजाम नहीं है। लोग घरों का पानी खाली प्लाॅटों में फेंक रहे हैं। रामुगलाम टोला पूर्वी, रामनाथ देवरिया दक्षिणी, चटनी गड़ही मोहल्ला, मंगलमपूरम, दानोपुर, नाथ नगर, सोमनाथ नगर, अली नगर, शहीद नगर, शांति नगर, महुआबारी आदि मोहल्लों में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से खाली प्लाॅटों में पूरे साल जलभराव रहता है। नगर पालिका नाला सफाई तो करा रही है, लेकिन नालियों में एंटीलार्वा आदि दवाओं का छिड़काव नहीं करा रही। जबकि नए वार्डों में फॉगिंग कब कराई गई है, इसके बारे में लोगों को याद नहीं।
इनसेट
दवा और उपकरण की कमी से विभाग लाचार
मलेरिया विभाग दवा और उपकरण की कमी से लाचार है। यहां दो साल से मैलाथियान 95 प्रतिशत शासन की ओर से मुहैया नहीं कराया जा सका है। जबकि जिले को हर साल 1250 किलोग्राम दवा की जरूरत फॉगिंग के लिए होती है। यह दवा मलेरिया विभाग आवश्यकतानुसार नगर व ग्रामीण निकायों को देता है। इधर 28 में 17 फॉगिंग मशीनें खराब पड़ी हैं। बजट के अभाव में इनकी मरम्मत नहीं हो पा रही है। इधर, नगर पालिका समय-समय पर सभी मोहल्लों में फॉगिंग व एंटीलार्वा का छिड़काव कराने का दावा करती है। इसे शहरवासी झुठला रहे हैं। लोगों का कहना है कि सभासद के माध्यम से दबाव बनाने पर नगर पालिका मोहल्लों में फॉगिंग करवाती है।
याद नहीं कब हुई थी फॉगिंग
मोहल्ले में मच्छरों की भरमार साल के 12 महीने रहती है। बार-बार अनुरोध के बाद नगर पालिका मोहल्ले में एंटीलार्वा का छिड़काव व फॉगिंग कराती है। - विवेक मिश्रा, चटनी गड़ही मोहल्ला
अफसरों की काॅलोनी में होती है नियमित फॉगिंग
नगर पालिका बाकी शहर में फॉगिंग कराए या नहीं अफसरों की काॅलोनी में नियमित फॉगिंग कराती है। स्टेडियम के पास, विकास भवन, नगर पालिका कार्यालय, कलक्ट्रेट आदि जगहों पर अक्सर रात में फॉगिंग की महक आती है।
मच्छरों के काटने से होती हैं ये बीमारियां
मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफिलाइटिस आदि बीमारियां मच्छरों के काटने से होती हैं।
एक साल में इतने मिले मरीज
- 93 मरीज डेंगू के मिले हैं।
- 12 मरीज जापानी इंसेफिलाइटिस के मिले हैं।
- 03 मरीज मलेरिया के मिले हैं।
नगर पालिका के पास फॉगिंग के लिए दो मशीनें हैं।
दो मशीनों से दवा का छिड़काव होता है।
400 सफाई कर्मी सफाई में लगे हैं।
वार्ड 32 में आबादी 3.50 लाख है।
डॉक्टर की सलाह
मेडिकल कॉलेज के डॉ. एचके मिश्र ने बताया कि मच्छर से मलेरिया, कालाजार और डेंगू होता है। अगर लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक से सलाह लेकर दवा का सेवन करना चाहिए। अपने मकान के आस-पास के क्षेत्र को स्वच्छ रखें और जलभराव न होने दें।
वर्जन
दो साल से विभाग को मैलाथियान 95 प्रतिशत दवा शासन की ओर से उपलब्ध नहीं हो पाई है। 17 फॉगिंग मशीनें खराब पड़ी हैं। इसके मरम्मत के लिए बजट नहीं है। शासन को डिमांड भेजी गई है।
- आरएस यादव, जिला मलेरिया अधिकारी
वर्जन
रोस्टर के हिसाब से छिड़काव किया जा रहा है। इस समय नाला सफाई का कार्य चल रहा है। एंटी लार्वा का छिड़काव इसके बाद किया जाएगा। लोगों को मच्छर जनित रोगों को लेकर सजग रहना चाहिए। रोहित सिंह, ईओ