जरूरत के लिए जमा किया था धन, मौत के बाद भी नहीं मिला

Gorakhpur Bureauगोरखपुर ब्यूरो Updated Thu, 29 Oct 2020 11:09 PM IST
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जरूरत के लिए जमा किया था धन, मौत के बाद भी नहीं मिला
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रुद्रपुर (देवरिया)। किसी जमाने में किसानों का सबसे बड़ा बैंक रहा देवरिया-कसया जिला सहकारी बैंक कंगाली से उबर नहीं पा रहा है। पिछले दस साल से बदहाल बैंक के कर्मचारियों को वेतन भी नहीं मिल रहा। बैंक में रुपये जमाकर भुगतान को सालों से चक्कर काट रहे तमाम खाताधारकों की सदमे में मौत हो चुकी है।
रुद्रपुर की देवरिया-कसया जिला सहकारी बैंक की शाखा पर खाताधारकों का आज भी करीब 40 लाख रुपये बकाया है। वहीं बैंक का सहकारी समितियों और किसानों पर करीब 20 लाख रुपये का ऋण बाकी है। बैंक की साख गिरने से अब बैंक में कोई भी खाताधारक रुपये जमा नहीं कर रहा और कर्जदार ऋण वापस भी नहीं कर रहे हैं। तमाम अरमानों को पालकर बैंक की शाखा में रुपये जमा करने वालों की जमापूूंजी लुटने के बाद कई परिवार बर्बाद हो गए।
अकटहां के प्रेम नारायण सिंह शिक्षक थे। उन्होंने अपने वेतन से बचाकर बेटियों की शादी करने के लिए बैंक में रुपये जमा किए थे। सेवानिवृत्ति के बाद सालों बैंक का चक्कर काटते रहे, लेकिन जमाधन में से एक पाई भी नहीं मिला। जमाधन डूबने के सदमे में आखिरकार उनकी मौत हो गई। भरटोला वार्ड की सावित्री त्रिपाठी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता थीं। उन्होंने बैक में तीन लाख रुपये जमा की थी। बैंक की माली हालत खराब होने पर रुपये निकालने के लिए जीवन भर प्रयास करती रहीं। बच्चों की शादी में भी बैंक से जमाधन नहीं मिला। बीच में वह कैंसर से पीड़ित हो गईं।
बैंक उन्हें बीमारी का इलाज कराने को भी उनका रुपये नहीं दिया। आखिरकार उनकी मौत हो गई। अब उनके बच्चे बैंक का चक्कर काट रहे हैं। सहकारी समितियों के माध्यम से जुड़े किसानों ने बैंक पर ऋण भुगतान को जबरन नोटिस भेजने का आरोप लगाया है। बैंक मृतक किसानों को भी नोटिस भेज रहा है। महेंद्र सिंह, मनोरमा देवी, हरेंद्र नारायण, कुबेर यादव आदि ने कहा कि विभिन्न सरकारों की ऋण माफी योजना में किसी भी किसान का बैंक ने ऋण माफ नहीं किया। जबकि सरकार ने ऋण माफी योजना में बैंक को धन भेज दिया था। खाद बीज खरीदने के लिए 1992 में कर्जा लेकर मर चुके किसानों को नोटिस भेजा जा रहा है।
शाखा प्रबंधक पंचम राम ने कहा कि ऋण की वसूली होने पर भुगतान किया जा रहा है। किसानों का वर्ष 1997 के पहले का कर्जा माफ नहीं हुआ है। जिन किसानों का कर्जा माफ नहीं हुआ है सिर्फ उन्हीं को नोटिस भेजा जा रहा है।
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