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मोहन सेतु : रिवाइज एस्टीमेट स्वीकृत न होने से अधर में निर्माण, सांसत बरकरार
Fri, 15 May 2026 12:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 15 May 2026 12:14 AM IST
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बरहज। सरयू नदी पर बन रहे मोहन सेतु के अधूरे कार्यों को पूरा कराने के लिए रिवाइज एस्टीमेट को तीन महीने बाद भी मंजूरी का इंतजार है। स्वीकृति नहीं मिलने की वजह से परियोजना परवान नहीं चढ़ी है। इस पुल के पूरा होने पर ही नदी के कटान पर भी नियंत्रण की उम्मीद है।
वर्ष 2013 में 95 करोड़ की लागत से 39 पिलर पर पुल बनाने का कार्य शुरू किया गया। जिसे 2017 में पूर्ण करा लेने की योजना थी। 70 फीसदी कार्य पूर्ण करा लिया गया है। लेकिन उस अवधि में नदी की धारा में परिवर्तन के बाद पुल का काम रुक गया।
इसके लिए संशोधित बजट 157 करोड़ की लागत से दोबारा पुल का निर्माण कार्य शुरू कराया गया लेकिन धारा के दक्षिण तरफ जाने के बाद अब इसे नए सिरे से प्लानिंग की जरूरत पड़ी।
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जानकारों के अनुसार, नदी की धारा में परिवर्तन के कारण दक्षिण तरफ अंतिम खंभे से करीब 10 मीटर आगे तक पानी बहने लगा। सेतु निगम ने इसके लिए आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ जुल्फिकार अली के नेतृत्व में मॉडल स्टडी किया गया। इस अध्ययन में पाया गया कि निर्माणाधीन पुल को नदी की बढ़ती चौड़ाई के अनुपात में बढ़ाना होगा। इसके अलावा पुल के साथ-साथ एप्रोच मार्ग को भी पहले से अधिक मजबूत बनाना होगा।
साथ ही नदी की धारा को और दक्षिण जाने से रोकने के लिए भी कार्य कराना होगा। इन सबको जोड़ते हुए 192 करोड़ का नया एस्टीमेट भेजा गया।
उम्मीद थी कि मार्च के अंतरिम बजट में इस एस्टीमेट को अनुमति मिल जाएगी, लेकिन आधा मई बीतने के बाद भी मामला जस का तस पड़ा हुआ है।
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वर्ष 2013 में 95 करोड़ की लागत से 39 पिलर पर पुल बनाने का कार्य शुरू किया गया। जिसे 2017 में पूर्ण करा लेने की योजना थी। 70 फीसदी कार्य पूर्ण करा लिया गया है। लेकिन उस अवधि में नदी की धारा में परिवर्तन के बाद पुल का काम रुक गया।
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इसके लिए संशोधित बजट 157 करोड़ की लागत से दोबारा पुल का निर्माण कार्य शुरू कराया गया लेकिन धारा के दक्षिण तरफ जाने के बाद अब इसे नए सिरे से प्लानिंग की जरूरत पड़ी।
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जानकारों के अनुसार, नदी की धारा में परिवर्तन के कारण दक्षिण तरफ अंतिम खंभे से करीब 10 मीटर आगे तक पानी बहने लगा। सेतु निगम ने इसके लिए आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ जुल्फिकार अली के नेतृत्व में मॉडल स्टडी किया गया। इस अध्ययन में पाया गया कि निर्माणाधीन पुल को नदी की बढ़ती चौड़ाई के अनुपात में बढ़ाना होगा। इसके अलावा पुल के साथ-साथ एप्रोच मार्ग को भी पहले से अधिक मजबूत बनाना होगा।
साथ ही नदी की धारा को और दक्षिण जाने से रोकने के लिए भी कार्य कराना होगा। इन सबको जोड़ते हुए 192 करोड़ का नया एस्टीमेट भेजा गया।
उम्मीद थी कि मार्च के अंतरिम बजट में इस एस्टीमेट को अनुमति मिल जाएगी, लेकिन आधा मई बीतने के बाद भी मामला जस का तस पड़ा हुआ है।