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Deoria News: कॉल पर तत्काल पहुंची मोबाइल वेटनरी यूनिट, मिली मदद

Tue, 16 May 2023 12:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Tue, 16 May 2023 12:00 AM IST
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Mobile veterinary unit reached immediately on call
मोबाइल वेटनरी यूनिट का वाहन।संवाद
- गंभीर रूप से बीमार पशुओं के लिए प्रदेश सरकार ने शुरू की है मोबाइल वेटनरी यूनिट
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- टोल फ्री नंबर 1962 पर फोन करते ही घर पहुंच जाते हैं चिकित्सक
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। भाटपाररानी ब्लॉक के भठवा पांडेय गांव निवासी गिरधारी की गाय बच्चा दे रही थी। उसी दौरान बछड़ा फंस गया। नजदीक में कोई पशु डॉक्टर नहीं था। पड़ोस के जागरूक पशुपालक से उन्होंने सलाह ली तो उसने 1962 पर कॉल करने का सुझाव दिया। करीब एक घंटे के अंदर मोबाइल वेटनरी यूनिट दरवाजे पर पहुंच गई। गाय और बछड़े को सुरक्षित बचा लिया गया।
दरअसल यह सेवा प्रदेश सरकार ने इसी सत्र में एक अप्रैल से शुरू की है। इसकी जानकारी ज्यादातर पशुपालकों को अभी नहीं मिल पाई है। अप्रैल माह में महज 268 लोगों ने कंट्रोल रूम की मदद से अपने पशुओं का इलाज कराया है। हर तहसील मुख्यालय पर एक-एक मोबाइल वेटनरी यूनिट की तैनाती की गई है। कंट्रोल रूम से सूचना प्राप्त होने के एक घंटे के भीतर मोबाइल वेटनरी यूनिट पशुपालक के यहां पहुंच जाती है। जरूरत पड़ने पर पशु को नजदीक के अस्पताल भी लाया जाता है। इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ होने पर पशु को घर भेजा जाता है, इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता।
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इनसेट
इन परिस्थितियों में लें कंट्रोल रूम की मदद
- गाय या भैंस का बछड़ा फंसने पर।
- गलाघोंटू रोग होने पर।
- पेट फूलने (अफरा होने) पर।
- बच्चेदानी बाहर निकलने पर।
- पशु दुर्घटना होने पर।
- बाढ़ की स्थिति में।
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इनसेट
पशु अस्पताल से दो किमी दूर पशुपालकों के लिए है यह सुविधा
टोल फ्री नंबर 1962 पर कॉल करने से एक घंटे के भीतर मोबाइल वेटनरी यूनिट पशुपालक के दरवाजे पर पहुंच जाती है। तत्काल उपचार के बाद पशु को स्थानीय अस्पताल के निगरानी में रखा जाता है। यह सुविधा पशु अस्पताल से दो किमी दूर के पशु पालकों के लिए उपलब्ध कराई जाती है।
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इनसेट
पांच रुपये में होता है पशुओं का इलाज
कंट्रोल रूम की मदद से पशु का इलाज कराने वाले पशुपालकों को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ता। महज पांच रुपये के पंजीकरण शुल्क में ही इंजेक्शन और जरूरत भर की दवाई हो जाती है।
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जिले में पशुपालन
- 478737 दुधारू पशु हैं जिले में।
- 2.50 लाख पशुपालक हैं जिले में।
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सराहनीय पहल है
सरकार की ओर से तहसीलवार मोबाइल वेटनरी यूनिट तैनात करने की पहल अच्छी है। इससे हर साल सैकड़ो पशु मौत के मुंह से बाहर निकलेंगे।
- सुभाष पाठक, पशुपालक जलुआ पठखौली
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ब्लाॅकवार तैनात हो मोबाइल वेटनरी यूनिट
मोबाइल वेटनरी यूनिट का विस्तार कर इसकी तैनाती ब्लाकवार की जानी चाहिए। क्योंकि बीमार पशुओं को अस्पताल ले जाने में कठिनाई होती है। नजदीक से चिकित्सक जल्दी पहुंच जाएंगे।

- रामइकबाल कुशवाहा, पशुपालक बसडीला मैनुद्दीन
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कोट
प्रदेश सरकार की ओर से गंभीर पशुओं के इलाज के लिए मोबाइल वेटनरी सेवा शुरू की गई है। 1962 टोल फ्री नंबर पर कॉल कर पशुपालक इस सेवा का लाभ ले सकते हैं। अप्रैल में 268 लोगों ने कंट्रोल रूम को फोन कर बीमार पशु का इलाज कराया है। - एके वैश्य, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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