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मेडिकल कॉलेज में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज का इंतजाम नहीं

Sun, 14 Nov 2021 11:24 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 14 Nov 2021 11:24 PM IST
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medical collage
मेडिकल कॉलेज में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज का इंतजाम नहीं
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बर्न वार्ड न होने से जाना पड़ता है अन्यत्र, स्टाफ की कमी व संसाधन का भी है अभाव
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज का इंतजाम नहीं है। अस्पताल में बर्न वार्ड न होने से यहां सिर्फ मामूली रूप से झुलसे मरीजों का इलाज हो पाता है। गंभीर मरीजों को अन्यत्र उपचार के लिए ले जाना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज की स्थापना से लोगों को उम्मीद जगी है कि अब उन्हें हर बीमारी के इलाज की बेहतर सुविधा मिलेगी, लेकिन झुलसे लोगों के उपचार की यहां व्यवस्था नहीं हो सकी है। यहां प्रशिक्षित स्टाफ है और न ही संसाधन हैं। अस्पताल में चाय, गर्म पानी, दूध व अन्य तरह से मामूली रूप से झुलसे लोगों का ही उपचार हो पाता है। मामूली रूप से झुलसे पुरुष को मेल सर्जिकल और महिला को फीमेल सर्जिकल वार्ड के गलियारे में स्थित बेड पर भर्ती कर किसी तरह इलाज किया जाता है। रविवार को चाय से झुलसे कठिनईया निवासी एक बालक को लेकर परिजन इमरजेंसी में लेकर पहुंचे, जहां मरहम लगाकर वार्ड में भेज दिया गया। इसके बाद परिजन मरीज को लेकर परेशान रहे। बर्न वार्ड न होने से उन्हें दिक्कत हुई। किसी तरह दवा लिखकर मरीज को ओपीडी में सर्जन को दिखाने की सलाह दी गई। इसके बाद परिजन बालक को लेकर चले गए, लेकिन आग की दुर्घटना तथा करंट की चपेट में आने से गंभीर रूप से झुलसे लोगों को लेकर पहुंचे तीमारदारों को निराशा हाथ लगती है। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सक रेफर कर देते हैं तो तीमारदार स्वयं अपने मरीज को लेकर दूसरे स्थान पर बेहतर इलाज कराने के लिए चले जाते हैं।
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बर्न वार्ड में यह रहती है व्यवस्था
झुलसे लोगों के इलाज में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इन्हें संक्रमण फैलने की अधिक संभावना है। इस तरह के मरीजों के इलाज के लिए अलग से वार्ड बनाया जाता है, जिसमें सेपरेट या अलग-अलग कमरे रहते हैं। यहां प्लास्टिक सर्जरी के चिकित्सक, जनरल सर्जन, फिजीशियन, ट्रेंड स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाय की तैनाती होती है। सेकेंड्री संक्रमण में बैक्टीरिया के फैलने की ज्यादा संभावना होती है, इससे बचाव भी व्यवस्था रहती है।
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अस्पताल में झुलसे मरीज कम आते हैं। मामूली रूप से झुलसे मरीजों का इलाज अस्पताल में किया जाता है, लेकिन गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है। यहां भी आने वाले दिनों में बर्न वार्ड स्थापित हो जाएगा।
- डॉ. एचके मिश्रा, चिकित्सा अधीक्षक
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