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Deoria News: बिना उपयोग किए ही खराब हो गए तमाम वेंटिलेटर
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मेडिकल कॉलेज में पड़े वेंटिलेटर।
देवरिया। जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल या महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में आईसीयू की सुविधा नहीं है। इसका नतीजा यह है कि गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है। इससे मरीजों के रिकवरी की संभावना कम हो जाती है। कई बार हायर सेंटर पर वेंटिलेटर नहीं मिलने पर मरीज की मौत हो जाती है। इधर मेडिकल कॉलेज में कोविड के समय तत्कालीन जिला अस्पताल को मिले बहुत से वेंटिलेटर खराब हो गए। जो ठीक हैं, उनका उपयोग कर आईसीयू शुरू नहीं किया गया।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल काॅलेज में करीब 400 बेड का अस्पताल है। यहां इमरजेंसी में रोजाना दो से तीन सौ मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें से पांच से सात मरीज गंभीर होते हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टर हायर सेंटर के लिए रेफर कर देते हैं। इन मरीजों को एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम वाले एंबुलेंस के माध्यम से हायर सेंटर भेजा जाता है। जिन्हें बीआरडी गोरखपुर मेडिकल काॅलेज में शिफ्ट किया जाता है। बीआरडी पर पूरे गोरखपुर मंडल के गंभीर मरीजों को भेजा जाता है। ऐसे में वहां वेंटिलेटर मिलना आसान नहीं होता है। इस तरह मरीज फिर आगे एम्स गोरखपुर या लखनऊ के लिए भेज दिए जाते हैं। ऐसे में कई बार इस भागदौड़ में मरीज की सांस बीच रास्ते में टूट जाती है। अगर मेडिकल कालेज में आईसीयू होता तो अधिकांश मरीजों को यहीं पर इलाज मिल सकता था, पर यह अभी इसके पूरा होने की सूरत नहीं दिखाई पड़ रही है। काॅलेज प्रशासन बीते करीब छह महीने से आईसीयू शुरू करने की योजना पर काम कर रहा है। पर अभी तक इसे शुरू नहीं किया जा सका है।
बिना उपयोग के ही खराब हो गए वेंटिलेटर
- महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कालेज बनने से पूर्व तत्कालीन जिला अस्पताल को कोविड के समय करीब सौ वेंटिलेटर मिले थे। इनका उपयोग नहीं कर गोदाम में रख दिया गया। इस बीच जिला अस्पताल मेडिकल काॅलेज में उच्चीकृत हो गया। फिर भी वेंटिलेटर्स का उपयोग नहीं किया। प्राचार्य डॉ. रजनी पटेल ने कार्यभार संभालने के बाद वेंटिलेटर्स की जांच कराई तो महज 48 वेंटिलेटर्स सही मिले। बाकी उपयोग लायक नहीं बचे हैं।
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जिला अस्पताल के समय था आईसीयू
- मेडिकल काॅलेज बनने से पूर्व तत्कालीन जिला अस्पताल में ब्लड बैंक के बगल में आईसीयू की सुविधा थी। डॉक्टर भी तैनात थे। इससे हार्ट के पेशेंट को तत्काल इलाज मिल जाता था। पर मेडिकल काॅलेज के निर्माण के समय आईसीसीयू का भवन तोड़ दिया गया। इसके बाद से यहां आईसीसीयू की सुविधा नहीं मिल सकी है।
देवरिया के मरीज की लखनऊ में चली गई थी जान
- देवरिया निवासी पारसनाथ पांडेय सांस की गंभीर बीमारी व पीलिया से पीड़ित थे। परिजन उनको गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से केजीएमयू ट्रामा सेंटर भेज दिया गया। जहां वेंटिलेटर नहीं मिला तो परिजन बलरामपुर हॉस्पिटल ले गए। वहां पर इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई। अगर जिले आईसीयू की सुविधा रहती तो संभवत: मरीज के इलाज के लिए अधिक समय मिला होता और जान बच सकती थी।
- मेडिकल काॅलेज में अच्छी क्वालिटी के शिलर वेंटिलेटर हैं। इनको ओपीडी बिल्डिंग के तृतीय तल पर आईसीयू बनाकर लगाया गया है। तकनीशियन की कमी है। इसकी व्यवस्था की जा रही है। इस महीने के अंत तक या अगले महीने के शुरू में आईसीयू शुरू कर लिया जाएगा। इसमें 10 बेड होंंगे, जिससे अधिक से अधिक मरीजों को लाभ मिल सकेगा।
- प्रो. (डॉ.) रजनी पांडेय, प्राचार्य, महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल काॅलेज
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महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल काॅलेज में करीब 400 बेड का अस्पताल है। यहां इमरजेंसी में रोजाना दो से तीन सौ मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें से पांच से सात मरीज गंभीर होते हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टर हायर सेंटर के लिए रेफर कर देते हैं। इन मरीजों को एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम वाले एंबुलेंस के माध्यम से हायर सेंटर भेजा जाता है। जिन्हें बीआरडी गोरखपुर मेडिकल काॅलेज में शिफ्ट किया जाता है। बीआरडी पर पूरे गोरखपुर मंडल के गंभीर मरीजों को भेजा जाता है। ऐसे में वहां वेंटिलेटर मिलना आसान नहीं होता है। इस तरह मरीज फिर आगे एम्स गोरखपुर या लखनऊ के लिए भेज दिए जाते हैं। ऐसे में कई बार इस भागदौड़ में मरीज की सांस बीच रास्ते में टूट जाती है। अगर मेडिकल कालेज में आईसीयू होता तो अधिकांश मरीजों को यहीं पर इलाज मिल सकता था, पर यह अभी इसके पूरा होने की सूरत नहीं दिखाई पड़ रही है। काॅलेज प्रशासन बीते करीब छह महीने से आईसीयू शुरू करने की योजना पर काम कर रहा है। पर अभी तक इसे शुरू नहीं किया जा सका है।
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बिना उपयोग के ही खराब हो गए वेंटिलेटर
- महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कालेज बनने से पूर्व तत्कालीन जिला अस्पताल को कोविड के समय करीब सौ वेंटिलेटर मिले थे। इनका उपयोग नहीं कर गोदाम में रख दिया गया। इस बीच जिला अस्पताल मेडिकल काॅलेज में उच्चीकृत हो गया। फिर भी वेंटिलेटर्स का उपयोग नहीं किया। प्राचार्य डॉ. रजनी पटेल ने कार्यभार संभालने के बाद वेंटिलेटर्स की जांच कराई तो महज 48 वेंटिलेटर्स सही मिले। बाकी उपयोग लायक नहीं बचे हैं।
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जिला अस्पताल के समय था आईसीयू
- मेडिकल काॅलेज बनने से पूर्व तत्कालीन जिला अस्पताल में ब्लड बैंक के बगल में आईसीयू की सुविधा थी। डॉक्टर भी तैनात थे। इससे हार्ट के पेशेंट को तत्काल इलाज मिल जाता था। पर मेडिकल काॅलेज के निर्माण के समय आईसीसीयू का भवन तोड़ दिया गया। इसके बाद से यहां आईसीसीयू की सुविधा नहीं मिल सकी है।
देवरिया के मरीज की लखनऊ में चली गई थी जान
- देवरिया निवासी पारसनाथ पांडेय सांस की गंभीर बीमारी व पीलिया से पीड़ित थे। परिजन उनको गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से केजीएमयू ट्रामा सेंटर भेज दिया गया। जहां वेंटिलेटर नहीं मिला तो परिजन बलरामपुर हॉस्पिटल ले गए। वहां पर इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई। अगर जिले आईसीयू की सुविधा रहती तो संभवत: मरीज के इलाज के लिए अधिक समय मिला होता और जान बच सकती थी।
- मेडिकल काॅलेज में अच्छी क्वालिटी के शिलर वेंटिलेटर हैं। इनको ओपीडी बिल्डिंग के तृतीय तल पर आईसीयू बनाकर लगाया गया है। तकनीशियन की कमी है। इसकी व्यवस्था की जा रही है। इस महीने के अंत तक या अगले महीने के शुरू में आईसीयू शुरू कर लिया जाएगा। इसमें 10 बेड होंंगे, जिससे अधिक से अधिक मरीजों को लाभ मिल सकेगा।
- प्रो. (डॉ.) रजनी पांडेय, प्राचार्य, महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल काॅलेज