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Deoria News: बिना पक्ष सुने दिया आदेश निरस्त, दोबारा होगी सुनवाई
Thu, 24 Sep 2026 01:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 24 Sep 2026 01:01 AM IST
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देवरिया। सलेमपुर क्षेत्र के धनौती राय गांव में भूमि और रास्ते के विवाद में बिना संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर दिए पारित आदेश को अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या एक की अदालत ने निरस्त कर दिया है। अदालत ने मामले को सलेमपुर के उप जिला मजिस्ट्रेट न्यायिक की अदालत भेजते हुए दोनों पक्षों को दोबारा साक्ष्य और सुनवाई का अवसर देकर विधि के अनुसार आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं। धनौती राय निवासी उमाशंकर ने राज्य सरकार और गांव के ओमप्रकाश दूबे को विपक्षी बनाते हुए आपराधिक निगरानी दाखिल की थी। मामला आराजी संख्या 272, रकबा 0.0280 हेक्टेयर से संबंधित है। इससे जुड़े वाद ओमप्रकाश आदि बनाम केदार आदि में सलेमपुर के उप जिला मजिस्ट्रेट न्यायिक ने 30 नवंबर 2024 को आदेश पारित किया था। उमाशंकर ने इस आदेश को चुनौती दी थी।
निगरानी में कहा गया कि उनके पिता रामनरेश मामले की पैरवी करते थे मगर 25 अगस्त 2021 को उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उमाशंकर और उनके भाइयों को केस में पक्षकार नहीं बनाया गया।
अदालत ने भी पाया कि रामनरेश की मृत्यु के बाद उनके बच्चों को पक्षकार बनाए जाने और उन पर समन तामील होने का उल्लेख नहीं है। इसके बावजूद उनकी अनुपस्थिति में आदेश पारित कर दिया गया। अदालत ने कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक पक्ष को सुनवाई का अवसर दिया जाना जरूरी है।
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अपर सत्र न्यायाधीश अभय कृष्ण तिवारी ने 19 सितंबर को निगरानी स्वीकार करते हुए 30 नवंबर 2024 का आदेश निरस्त कर दिया।
उप जिला मजिस्ट्रेट न्यायिक सलेमपुर को दोनों पक्षों को पुनः साक्ष्य और सुनवाई का अवसर देकर विधिसंगत आदेश पारित करने को कहा गया है। पत्रावली सात अक्तूबर को मजिस्ट्रेट न्यायालय में पेश करने और दोनों पक्षों को उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
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निगरानी में कहा गया कि उनके पिता रामनरेश मामले की पैरवी करते थे मगर 25 अगस्त 2021 को उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उमाशंकर और उनके भाइयों को केस में पक्षकार नहीं बनाया गया।
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अदालत ने भी पाया कि रामनरेश की मृत्यु के बाद उनके बच्चों को पक्षकार बनाए जाने और उन पर समन तामील होने का उल्लेख नहीं है। इसके बावजूद उनकी अनुपस्थिति में आदेश पारित कर दिया गया। अदालत ने कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक पक्ष को सुनवाई का अवसर दिया जाना जरूरी है।
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अपर सत्र न्यायाधीश अभय कृष्ण तिवारी ने 19 सितंबर को निगरानी स्वीकार करते हुए 30 नवंबर 2024 का आदेश निरस्त कर दिया।
उप जिला मजिस्ट्रेट न्यायिक सलेमपुर को दोनों पक्षों को पुनः साक्ष्य और सुनवाई का अवसर देकर विधिसंगत आदेश पारित करने को कहा गया है। पत्रावली सात अक्तूबर को मजिस्ट्रेट न्यायालय में पेश करने और दोनों पक्षों को उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।