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Deoria News: गड़ेर में मखाना की हुई रोपाई, उत्पादक क्षेत्र बना देवरिया

Sat, 16 Mar 2024 12:02 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 16 Mar 2024 12:02 AM IST
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Makhana planted in Gader, Deoria becomes productive area
- स्वर्ण वैदेही प्रजाति के मखाना के पौध की हुई रोपाई
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले के लिए शुक्रवार का दिन अविस्मरणीय रहा। डीएम की पहल पर एक नई शुरूआत हुई। गड़ेर स्थित संकर्षण शाही के मत्स्यपालन केंद्र में मखाना के पौधे की रोपाई हुई। इसके साथ ही देवरिया मखाना की खेती करने वाले क्षेत्रों के राष्ट्रीय फलक में शुमार हो गया।
डीएम अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि गड़ेर में मखाना की रोपाई के साथ ही नए अध्याय की शुरुआत हुई है। जनपद मखाना की खेती करने वाले क्षेत्रों के राष्ट्रीय मानचित्र पर आ गया है। यह जिले की आर्थिक तरक्की का आधार बनेगा। जनपद की भौगोलिक प्रोफाइल में लगभग 30 हजार हेक्टेयर भूमि लो-लैंड एवं जलमग्न क्षेत्र चिह्नित है। इन क्षेत्रों के लिए मखाना की खेती वरदान सिद्ध होगी।
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देवरिया की जलवायु में मिथिला जैसी उत्पादकता देने का सामर्थ्य है। उन्होंने बताया कि आज मखाना के जिस पौध की रोपाई हुई है, वह स्वर्ण वैदेही प्रजाति की है, जिसे काला हीरा नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने किसानों से व्यापक पैमाने पर मखाना की खेती प्रारंभ करने की अपील की।
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सीडीओ प्रत्यूष पांडेय ने जिले में हो रहे अभिनव प्रयोग पर प्रसन्नता व्यक्त की और मखाना कल्चर करने वाले मत्स्य पालकों को हर संभव सहयोग के लिए आश्वस्त किया। कहा कि इस नई शुरुआत से युवाओं को प्रेरणा मिलेगी।
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हरैया में मत्स्य पालन केंद्र पर स्थापित तैयार हुई मखाना की नर्सरी
मत्स्य विभाग के सेवानिवृत्त सहायक निदेशक एवं मखाना खेती के विशेषज्ञ डॉ. डीएन पांडेय ने बताया कि नवंबर माह में तरकुलवा ब्लॉक के हरैया में प्रगतिशील मत्स्य पालक गंगा शरण श्रीवास्तव के मत्स्य पालन केंद्र पर मखाना की नर्सरी स्थापित की गई थी। नर्सरी में पौध तैयार होने के बाद उसकी रोपाई की गई है। मखाना के दो पौधों के मध्य दो मीटर की दूरी होनी चाहिए, क्योंकि इसके पत्ते का आकार लगभग एक मीटर तक होता है। मई माह के उत्तरार्ध में फूल आ जाएंगे और सितंबर तक फसल तैयार हो जाएगी। उन्होंने बताया कि मखाना को तालाब में मछली के साथ उगाया जा सकता है। इसके साथ देशी मांगुर प्रजाति की मछली का उत्पादन संभव है, जिसका बाजार मूल्य अच्छा है। बताया कि तालाब के अतिरिक्त सामान्य खेत में भी मखाना का उत्पादन संभव है।

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मखाना की खेती के लिए आठ मत्स्य पालक चिह्नित, डेढ़ हेक्टेयर जल क्षेत्र में होगी खेती
प्रभारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य विभाग रितेश शाही ने बताया कि प्रथम चरण में जिले के आठ मत्स्यपालकों को चिह्नित किया गया है। करीब डेढ़ हेक्टेयर जल क्षेत्र में मखाना की खेती प्रारंभ की जा रही है। कहा कि इससे किसानों को दोहरा लाभ मिलेगा और मछली के साथ मखाना का मूल्य भी मिलेगा। प्रगतिशील मत्स्य पालक संकर्षण शाही ने बताया कि उनके लगभग आधा एकड़ आकार के तालाब में मखाना की रोपाई की गई। यदि फसल अच्छी होगी तो अगले सीजन में व्यापक पैमाने पर मखाना की खेती करेंगे। इस दौरान जिला उद्यान अधिकारी रामसिंह यादव, मत्स्य निरीक्षक वेंकटेश त्रिपाठी, प्रगतिशील मत्स्यपालक विनय गुप्ता, विक्की गुप्ता, प्रगतिशील किसान कमलेश मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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