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Deoria News: मंत्री की शिकायत पर जांच, सलेमपुर ब्लॉक के नए भवन का टेंडर निरस्त
Sat, 20 Sep 2025 11:48 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 20 Sep 2025 11:48 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। ब्लाॅक के नए भवन के निर्माण के लिए हुए टेंडर को शासन के आदेश पर जांच के बाद तीन सदस्यीय टीम ने निरस्त कर दिया है। जांच में टेंडर डालने वाली दो फर्में निमार्ण कार्य के लिए अर्ह नहीं पाई गईं।
राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम की शिकायत पर शासन ने ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों की गठित हुई त्रिसदस्यीय समिति से इसकी जांच कराई थी। ब्लॉक के नए भवन के निर्माण के लिए अब नए सिरे से टेंडर डाले जाएंगे। इसके लिए विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है।
सलेमपुर ब्लॉक क्षेत्र में 92 ग्राम पंचायतें आती हैं। ब्लॉक मुख्यालय पर जगह कम होने के चलते लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। लोगों की परेशानी को देखते हुए राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम की पहल पर सोहनाग धाम के तपोभूमि से सटे ग्राम पंचायत तिलौली में नए ब्लॉक के लिए भूमि चिह्नित किया गया है। शासन से मंजूरी के बाद ग्राम्य विकास विभाग ने टेंडर निकाला।
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इसमें जेपीएस कन्स्ट्रक्शन एवं जय बजरंग इंटरप्राइजेज ने हिस्सा लिया। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद जय बजरंग इंटरप्राइजेज को निर्माण कार्य का जिम्मा मिल गया। जब इसकी जानकारी राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम को हुई तो उन्होंने 26 अगस्त को शासन को पत्र लिखकर फर्म और विभाग के कई बड़े अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए जांच कराने की मांग की।
उनके पत्र को शासन ने गंभीरता से लेते हुए 28 अगस्त को प्रकरण में जांच के लिए ग्राम्य विकास के विशेष सचिव जयनाथ यादव की अध्यक्षता में ग्राम्य विकास आयुक्त वित्त नियंत्रक मंजय कुमार सिंह एवं मुख्य प्राविधिक परीक्षक, टीएसी एसपी सिंह ग्राम्य विकास विभाग की सदस्यता में ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों की त्रि-सदस्यीय समिति गठित की गई।
जांच समिति द्वारा प्रश्नगत आवासीय एवं अनावासीय भवन के निर्माण की दोनों कार्यों की निविदा में तकनीकी बिड में रिस्पांसिव पाये गये। जेपीएस कन्स्ट्रक्शन एवं जय बजरंग इण्टरप्राइजेज द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रपत्रों में कतिपय कमियों को इंगित करते हुए यह पाया गया कि उक्त दोनों फर्मे भी नॉन रिस्पांसिव श्रेणी की हैं।
ब्लॉक में निर्मित किये गये जाने वाले आवासीय/अनावासीय भवनों के संबंध में प्राप्त तीनों फर्मों की निविदाएं नॉन रिस्पांसिव श्रेणी की होने के कारण जांच समिति द्वारा किसी भी फर्म का चयन किया जाना उचित नहीं पाया गया है।
जांच रिपोर्ट भेजे जाने के बाद शासन ने टेंडर को निरस्त कर अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी। इसको लेकर विभाग में हड़कंप मच गया। सूत्रों की माने तो जांच में दोषी पाए जाने वाला एक फर्म दुबारा निकलने वाली निविदा में हिस्सा लेने की जुगत में लगा हुआ है।
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सलेमपुर। ब्लाॅक के नए भवन के निर्माण के लिए हुए टेंडर को शासन के आदेश पर जांच के बाद तीन सदस्यीय टीम ने निरस्त कर दिया है। जांच में टेंडर डालने वाली दो फर्में निमार्ण कार्य के लिए अर्ह नहीं पाई गईं।
राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम की शिकायत पर शासन ने ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों की गठित हुई त्रिसदस्यीय समिति से इसकी जांच कराई थी। ब्लॉक के नए भवन के निर्माण के लिए अब नए सिरे से टेंडर डाले जाएंगे। इसके लिए विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है।
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सलेमपुर ब्लॉक क्षेत्र में 92 ग्राम पंचायतें आती हैं। ब्लॉक मुख्यालय पर जगह कम होने के चलते लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। लोगों की परेशानी को देखते हुए राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम की पहल पर सोहनाग धाम के तपोभूमि से सटे ग्राम पंचायत तिलौली में नए ब्लॉक के लिए भूमि चिह्नित किया गया है। शासन से मंजूरी के बाद ग्राम्य विकास विभाग ने टेंडर निकाला।
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इसमें जेपीएस कन्स्ट्रक्शन एवं जय बजरंग इंटरप्राइजेज ने हिस्सा लिया। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद जय बजरंग इंटरप्राइजेज को निर्माण कार्य का जिम्मा मिल गया। जब इसकी जानकारी राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम को हुई तो उन्होंने 26 अगस्त को शासन को पत्र लिखकर फर्म और विभाग के कई बड़े अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए जांच कराने की मांग की।
उनके पत्र को शासन ने गंभीरता से लेते हुए 28 अगस्त को प्रकरण में जांच के लिए ग्राम्य विकास के विशेष सचिव जयनाथ यादव की अध्यक्षता में ग्राम्य विकास आयुक्त वित्त नियंत्रक मंजय कुमार सिंह एवं मुख्य प्राविधिक परीक्षक, टीएसी एसपी सिंह ग्राम्य विकास विभाग की सदस्यता में ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों की त्रि-सदस्यीय समिति गठित की गई।
जांच समिति द्वारा प्रश्नगत आवासीय एवं अनावासीय भवन के निर्माण की दोनों कार्यों की निविदा में तकनीकी बिड में रिस्पांसिव पाये गये। जेपीएस कन्स्ट्रक्शन एवं जय बजरंग इण्टरप्राइजेज द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रपत्रों में कतिपय कमियों को इंगित करते हुए यह पाया गया कि उक्त दोनों फर्मे भी नॉन रिस्पांसिव श्रेणी की हैं।
ब्लॉक में निर्मित किये गये जाने वाले आवासीय/अनावासीय भवनों के संबंध में प्राप्त तीनों फर्मों की निविदाएं नॉन रिस्पांसिव श्रेणी की होने के कारण जांच समिति द्वारा किसी भी फर्म का चयन किया जाना उचित नहीं पाया गया है।
जांच रिपोर्ट भेजे जाने के बाद शासन ने टेंडर को निरस्त कर अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी। इसको लेकर विभाग में हड़कंप मच गया। सूत्रों की माने तो जांच में दोषी पाए जाने वाला एक फर्म दुबारा निकलने वाली निविदा में हिस्सा लेने की जुगत में लगा हुआ है।