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कैसे होगा गेनू का इलाज, पहले ही बिक चुका है खेत
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कैसे होगा गेनू का इलाज, पहले ही बिक चुका है खेत
देसही देवरिया (देवरिया)। कृषि मंत्री से जान बचाने की गुहार लगा चुके गेनू मद्धेशिया की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। अब तो उनके घर का चूल्हा भी समय से नहीं जल पा रहा। उन्हें सूझ नहीं रहा की क्या करें? एकमात्र आय का जरिया अपना ठेला भी बृहस्पतिवार को बेच दिया। उनके इलाज की चिंता अब परिवार को भी सता जा रही है। कृषि मंत्री ने हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। उनकी मदद के लिए आगे आए कुछ लोगों ने दरियादिली जरूर दिखाई, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
देसही देवरिया क्षेत्र के बरवां मीरछापर गांव के गेनू मद्धेशिया स्थानीय चौराहे पर ठेला लगाकर पकौड़ी बेंचकर अपना और परिवार का भरण-पोषण करते थे। करीब एक माह पहले उनकी तबीयत खराब हो गई। रेफर होने के बाद लखनऊ के एसजीपीजीआई में हृदय रोग की बीमारी पता चली। चिकित्सकों ने तीन मार्च को ऑपरेशन का समय दिया है। इसके लिए उसे करीब तीन लाख रुपये की आवश्यकता है। पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के सामने अब कुछ सूझ नहीं रहा कि क्या करें। कुछ खेत था जो लड़की की शादी और इलाज में पहले ही बिक चुका है। शुक्रवार को उनके घर का चूल्हा भी नहीं जला। क्षेत्र के एक गांव में पिछले सप्ताह एक लोकार्पण कार्यक्रम में आए कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही से मिलकर गेनू ने अपनी जान बचाने की गुहार लगाई। हालांकि कृषि मंत्री ने हर संभव मदद का भरोसा तो जरूर दिया है, लेकिन ऑपरेशन का समय नजदीक होने की वजह से गेनू के साथ ही उनके परिवार को इलाज को लेकर चिंता बढ़ गई है। ‘अमर उजाला’ में खबर प्रकाशित होने के बाद गेनू की मदद के लिए क्षेत्रीय लोगों के हाथ आगे जरूर बढ़े हैं, लेकिन यह नाकाफी है।
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देसही देवरिया (देवरिया)। कृषि मंत्री से जान बचाने की गुहार लगा चुके गेनू मद्धेशिया की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। अब तो उनके घर का चूल्हा भी समय से नहीं जल पा रहा। उन्हें सूझ नहीं रहा की क्या करें? एकमात्र आय का जरिया अपना ठेला भी बृहस्पतिवार को बेच दिया। उनके इलाज की चिंता अब परिवार को भी सता जा रही है। कृषि मंत्री ने हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। उनकी मदद के लिए आगे आए कुछ लोगों ने दरियादिली जरूर दिखाई, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
देसही देवरिया क्षेत्र के बरवां मीरछापर गांव के गेनू मद्धेशिया स्थानीय चौराहे पर ठेला लगाकर पकौड़ी बेंचकर अपना और परिवार का भरण-पोषण करते थे। करीब एक माह पहले उनकी तबीयत खराब हो गई। रेफर होने के बाद लखनऊ के एसजीपीजीआई में हृदय रोग की बीमारी पता चली। चिकित्सकों ने तीन मार्च को ऑपरेशन का समय दिया है। इसके लिए उसे करीब तीन लाख रुपये की आवश्यकता है। पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के सामने अब कुछ सूझ नहीं रहा कि क्या करें। कुछ खेत था जो लड़की की शादी और इलाज में पहले ही बिक चुका है। शुक्रवार को उनके घर का चूल्हा भी नहीं जला। क्षेत्र के एक गांव में पिछले सप्ताह एक लोकार्पण कार्यक्रम में आए कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही से मिलकर गेनू ने अपनी जान बचाने की गुहार लगाई। हालांकि कृषि मंत्री ने हर संभव मदद का भरोसा तो जरूर दिया है, लेकिन ऑपरेशन का समय नजदीक होने की वजह से गेनू के साथ ही उनके परिवार को इलाज को लेकर चिंता बढ़ गई है। ‘अमर उजाला’ में खबर प्रकाशित होने के बाद गेनू की मदद के लिए क्षेत्रीय लोगों के हाथ आगे जरूर बढ़े हैं, लेकिन यह नाकाफी है।
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