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खरोह बॉर्डर पर 130 लोगों की हुई थर्मल स्क्रीनिंग
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जनपद की सीमा खरोह कोविड केंद्र पर प्रवासी मजदूरों का स्क्रीनिंग करते स्वास्थ्यकर्मी
- फोटो : DEORIA
खरोह बॉर्डर पर 130 लोगों की हुई थर्मल स्क्रीनिंग
प्रवासी मजदूरों के आने का सिलसिला जारी, पांच बसें मेहरौना तक र्गइं
संवाद न्यूज एजेंसी
गौरी बाजार। शहरों में फंसे मजदूरों का घर वापस आने का सिलसिला जारी है। नौवें दिन पांच बसों से 130 लोग जिले में आए। खरोह बॉर्डर पर मौजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सभी का थर्मल स्क्रीनिंग की। इसमें सिवान जिले के भी लोग शामिल रहे। इनको बसों से मेहरौना बॉर्डर तक छोड़ा गया। नौ दिनों में अब तक 2930 लोग जिले में आ चुके हैं।
हरियाणा, गुजरात, मुंबई, दिल्ली समेत अन्य शहरों में फंसे लोगों को घरों तक सरकार की ओर से भेजा जा रहा है। घर आने से पूर्व इनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। शनिवार को जिले की सीमा खरोह में सुबह पांच बजे तक 112 लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी थी। शाम तक कुल पांच बसों से 131 लोग आ गए। सभी की थर्मल स्क्रीनिंग कर होम क्वारंटीन के लिए भेज दिया गया। आरआई अरविंद तिवारी एवं विजय प्रताप मौर्य ने बताया कि ज्यादातर लोग ट्रेन से गोरखपुर लाए जा रहे हैं। वहां से बसों के माध्यम से उन्हें देवरिया लाया जा रहा है। एसडीएम दिनेश मिश्र ने बताया कि बॉर्डर पर तीन टीमें लगाई गई हैं।
क्वारंटीन को लेकर असमंजस बरकरार
गौरी बाजार। जिले की सीमा पर थर्मल स्क्रीनिंग के बाद गांव पहुंच रहे प्रवासियों के क्वारंटीन में रहने को लेकर असमंजस बना हुआ है। मठिया गांव के प्रधान वीरेंद्र भारती ने बताया कि ग्रामीणों के विरोध के बाद बाहर से आए लोगों को जूनियर हाईस्कूल में रखा गया है। भटौली बुजुर्ग के ग्राम प्रधान महेंद्र निषाद ने बताया कि आधा दर्जन लोग तो होम क्वारंटीन हैं, अन्य लोगों को परिजनों के एतराज के बाद गांव के स्कूल में रखा गया है।
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कपरवार बॉर्डर पर साइकिल से पहुंचे कामगार मजदूर
बरहज। क्षेत्र के कपरवार पुलिस चौकी बॉर्डर पर आधा दर्जन से अधिक कामगार साइकिल से पहुंचे। जो सूरत से कुशीनगर आदि जगहों के लिए निकले हैं। प्रशासन ने स्वास्थ्य परीक्षण और नाश्ता कराने के उपरांत सभी से शपथ पत्र भरवाया।
शनिवार की दोपहर में बड़हलगंज के रास्ते करीब आधा दर्जन कामगार साइकिल से पुलिस चौकी पर पहुंचे। जिन्हें कुशीनगर, मेहियवां, डुमरी मिश्र, परसियां, उसरा बाजार, लाखोपार, रुद्रपुर, बैतालपुर, सेवरही आदि जगहों को जाना था। लगातार साइकिल चलाकर लंबी दूरी तय करने से सभी थके हुए थे। मजदूरों का कहना था कि हालात को देखते हुए चंदा जुटाकर किसी तरह साइकिल खरीद घर के लिए निकले हैं। सेक्टर मजिस्ट्रेट सुरेंद्र राय, चौकी इंचार्ज राजेश प्रसाद, कानूनगो विशाल नाथ यादव आदि ने प्रवासी कामगारों को भोजन कराने के उपरांत उन्हें गंतव्य को रवाना किया।
मोपेड से की 900 किलोमीटर की यात्रा
रुद्रपुर। रुद्रपुर नगर के तीर्थ पुरोहितों की देश के विभिन्न तीर्थ स्थलों से रोज घर वापसी हो रही है। शनिवार को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से 12 तीर्थ पुरोहित मोपेड से 900 किलोमीटर की दूरी तय कर रुद्रपुर पहुंचे। उन्हें सतासी इंटर कॉलेज के क्वारंटीन सेंटर पर थर्मल स्क्रीनिंग के बाद होम क्वारंटीन में भेज दिया गया।
महाकाल के सदृश्य दुग्धेश्वरनाथ मे पौराणिक महत्व के मंदिर के कारण रुद्रपुर को पुराणों में हंस तीर्थ स्थल की संज्ञा दी गई है। यहां तीर्थ पुरोहितों का एक हजार परिवार रहता है। ये तीर्थ पुरोहित देश के कोने-कोने में धर्मिक अनुष्ठान और यज्ञ आदि कराते हैं। इनके परिवार का भरण-पोषण यजमानी से होता है। कोरोना संकट गहराने के बाद विभिन्न प्रांतों में पुरोहिती करने वाले पंडितों की वापसी हो रही है। रुद्रपुर में अब तक 100 पुरोहित लौट चुके हैं। शनिवार को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में यजमानी करने वाले 12 लोग छह मोपेड पर सवार होकर घर लौटे। उन्हें वापसी में तीन दिन लग गए। एक मोपेड पर सवार दो लोगों को घर तक पहुंचने में 1500 रुपये का तेल खर्च करना पड़ा। तीर्थ पुरोहित ब्रजेश पांडेय, भवानी शंकर, अभिनंदन, पुरुषोत्तम, विकास पांडेय, आकाश कुमार, त्रिभुनेश्वर पांडेय, चारोधाम पांडेय, गजानन, नर्वदा पांडेय, शिवधनी और प्रमोद पांडेय ने कहा कि लॉकडाउन में तीर्थ स्थलों पर तालाबंदी से यजमानों का धर्म कार्य पूरी तरह ठप हो गया है। ऐसे में तीर्थ पुरोहित तीर्थ स्थलों से लौट रहे हैं। गैर प्रांतों से वापसी में कागजी कार्रवाई पूरी करने में काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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प्रवासी मजदूरों के आने का सिलसिला जारी, पांच बसें मेहरौना तक र्गइं
संवाद न्यूज एजेंसी
गौरी बाजार। शहरों में फंसे मजदूरों का घर वापस आने का सिलसिला जारी है। नौवें दिन पांच बसों से 130 लोग जिले में आए। खरोह बॉर्डर पर मौजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सभी का थर्मल स्क्रीनिंग की। इसमें सिवान जिले के भी लोग शामिल रहे। इनको बसों से मेहरौना बॉर्डर तक छोड़ा गया। नौ दिनों में अब तक 2930 लोग जिले में आ चुके हैं।
हरियाणा, गुजरात, मुंबई, दिल्ली समेत अन्य शहरों में फंसे लोगों को घरों तक सरकार की ओर से भेजा जा रहा है। घर आने से पूर्व इनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। शनिवार को जिले की सीमा खरोह में सुबह पांच बजे तक 112 लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी थी। शाम तक कुल पांच बसों से 131 लोग आ गए। सभी की थर्मल स्क्रीनिंग कर होम क्वारंटीन के लिए भेज दिया गया। आरआई अरविंद तिवारी एवं विजय प्रताप मौर्य ने बताया कि ज्यादातर लोग ट्रेन से गोरखपुर लाए जा रहे हैं। वहां से बसों के माध्यम से उन्हें देवरिया लाया जा रहा है। एसडीएम दिनेश मिश्र ने बताया कि बॉर्डर पर तीन टीमें लगाई गई हैं।
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क्वारंटीन को लेकर असमंजस बरकरार
गौरी बाजार। जिले की सीमा पर थर्मल स्क्रीनिंग के बाद गांव पहुंच रहे प्रवासियों के क्वारंटीन में रहने को लेकर असमंजस बना हुआ है। मठिया गांव के प्रधान वीरेंद्र भारती ने बताया कि ग्रामीणों के विरोध के बाद बाहर से आए लोगों को जूनियर हाईस्कूल में रखा गया है। भटौली बुजुर्ग के ग्राम प्रधान महेंद्र निषाद ने बताया कि आधा दर्जन लोग तो होम क्वारंटीन हैं, अन्य लोगों को परिजनों के एतराज के बाद गांव के स्कूल में रखा गया है।
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कपरवार बॉर्डर पर साइकिल से पहुंचे कामगार मजदूर
बरहज। क्षेत्र के कपरवार पुलिस चौकी बॉर्डर पर आधा दर्जन से अधिक कामगार साइकिल से पहुंचे। जो सूरत से कुशीनगर आदि जगहों के लिए निकले हैं। प्रशासन ने स्वास्थ्य परीक्षण और नाश्ता कराने के उपरांत सभी से शपथ पत्र भरवाया।
शनिवार की दोपहर में बड़हलगंज के रास्ते करीब आधा दर्जन कामगार साइकिल से पुलिस चौकी पर पहुंचे। जिन्हें कुशीनगर, मेहियवां, डुमरी मिश्र, परसियां, उसरा बाजार, लाखोपार, रुद्रपुर, बैतालपुर, सेवरही आदि जगहों को जाना था। लगातार साइकिल चलाकर लंबी दूरी तय करने से सभी थके हुए थे। मजदूरों का कहना था कि हालात को देखते हुए चंदा जुटाकर किसी तरह साइकिल खरीद घर के लिए निकले हैं। सेक्टर मजिस्ट्रेट सुरेंद्र राय, चौकी इंचार्ज राजेश प्रसाद, कानूनगो विशाल नाथ यादव आदि ने प्रवासी कामगारों को भोजन कराने के उपरांत उन्हें गंतव्य को रवाना किया।
मोपेड से की 900 किलोमीटर की यात्रा
रुद्रपुर। रुद्रपुर नगर के तीर्थ पुरोहितों की देश के विभिन्न तीर्थ स्थलों से रोज घर वापसी हो रही है। शनिवार को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से 12 तीर्थ पुरोहित मोपेड से 900 किलोमीटर की दूरी तय कर रुद्रपुर पहुंचे। उन्हें सतासी इंटर कॉलेज के क्वारंटीन सेंटर पर थर्मल स्क्रीनिंग के बाद होम क्वारंटीन में भेज दिया गया।
महाकाल के सदृश्य दुग्धेश्वरनाथ मे पौराणिक महत्व के मंदिर के कारण रुद्रपुर को पुराणों में हंस तीर्थ स्थल की संज्ञा दी गई है। यहां तीर्थ पुरोहितों का एक हजार परिवार रहता है। ये तीर्थ पुरोहित देश के कोने-कोने में धर्मिक अनुष्ठान और यज्ञ आदि कराते हैं। इनके परिवार का भरण-पोषण यजमानी से होता है। कोरोना संकट गहराने के बाद विभिन्न प्रांतों में पुरोहिती करने वाले पंडितों की वापसी हो रही है। रुद्रपुर में अब तक 100 पुरोहित लौट चुके हैं। शनिवार को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में यजमानी करने वाले 12 लोग छह मोपेड पर सवार होकर घर लौटे। उन्हें वापसी में तीन दिन लग गए। एक मोपेड पर सवार दो लोगों को घर तक पहुंचने में 1500 रुपये का तेल खर्च करना पड़ा। तीर्थ पुरोहित ब्रजेश पांडेय, भवानी शंकर, अभिनंदन, पुरुषोत्तम, विकास पांडेय, आकाश कुमार, त्रिभुनेश्वर पांडेय, चारोधाम पांडेय, गजानन, नर्वदा पांडेय, शिवधनी और प्रमोद पांडेय ने कहा कि लॉकडाउन में तीर्थ स्थलों पर तालाबंदी से यजमानों का धर्म कार्य पूरी तरह ठप हो गया है। ऐसे में तीर्थ पुरोहित तीर्थ स्थलों से लौट रहे हैं। गैर प्रांतों से वापसी में कागजी कार्रवाई पूरी करने में काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।