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Deoria News: प्रधानाध्यापक के हाईस्कूल व इंटर के शैक्षिक अभिलेख मिले फर्जी, बर्खास्त
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प्रधानाध्यापक के हाईस्कूल व इंटर के शैक्षिक अभिलेख मिले फर्जी, बर्खास्त
पिछले पांच सालों में बेसिक कार्यालय ने फर्जीवाड़े में 66वें शिक्षक को किया सेवा से बाहर
गौरी बाजार के प्रा वि. जगदीशपुर में तैनात शिक्षक की विभागीय जांच के बाद हुई कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गौरीबाजार क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय जगदीशपुर में तैनात प्रधानाध्यापक दीपक को फर्जीवाड़े की पुष्टि के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। एसटीएफ की ओर से उसके प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जा रहा था। साथ ही खंड शिक्षा अधिकारी को उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। वह जुलाई 2010 में नियुक्त हुआ था।
शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर जनपद लगातार शासन के रडार पर रहा है। पिछले पांच सालों के अंदर अब तक जिले के 16 ब्लॉकों के परिषदीय विद्यालयों में तैनात 65 शिक्षकों को कूटरचित प्रमाणपत्रों के आधार पर सेवा से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका था।
बृहस्पतिवार को बीएसए हरिश्चंद्र नाथ ने बताया कि गौरीबाजार के प्राथमिक विद्यालय जगदीशपुर में तैनात प्रधानाध्यापक दीपक पुत्र रामसमुझ के हाईस्कूल व इंटर के शैक्षिक प्रमाणपत्र जांच में फर्जी मिले हैं। शैक्षिक दस्तावेजों के अनुसार दीपक ने माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से आयोजित यूपी बोर्ड की हाईस्कूल वर्ष 1998 अनुक्रमांक 1263979 एवं इंटर वर्ष 2000 अनुक्रमांक 0669864 से प्रताप नारायन सिंह जनता इंटर कॉलेज बरही सोनबरसा, गोरखपुर से उत्तीर्ण किया है।
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सत्यापन प्रक्रिया के दौरान प्रधानाचार्य, प्रताप नारायन सिंह जनता इंटर कॉलेज, बरही सोनबरसा ने अवगत कराया है कि दीपक पुत्र रामसमुझ के हाईस्कूल व इंटर के अंक व प्रमाणपत्र का विवरण विद्यालय के सारणीयन पंजिका अभिलेखों में दर्ज नहीं है। साथ ही इनके स्थानांतरण प्रमाणपत्र तथा अभिलेखों में अंकित कोई भी विवरण अंकित नहीं है।
संस्था के अभिलेखों, क्रॉस लिस्ट, स्कॉलर रजिस्टर में भी उनका नाम अंकित नहीं है। न ही कक्षा नौ में कोई स्थानांतरण प्रमाणपत्र जमा है। ऐसे में यह पुष्टि हुई है कि उक्त शिक्षक ने हाईस्कूल व इंटर के कूटरचित अंक एवं प्रमाणपत्रों के सहारे षडयंत्र करते हुए चयनित होकर नौकरी हासिल की है। उन्हें कई बार इस संबंध में नोटिस भी जारी किया गया। ऐसे में अध्यापक सेवा नियमावली एवं विभागीय नियमों के तहत दीपक को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही बीईओ गौरीबाजार को उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
बर्खास्त शिक्षकों से वेतन की रिकवरी बन रही चुनौती
सेवा से बाहर किए गए शिक्षकों से वेतन की रिकवरी कर पाना बेसिक शिक्षा कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों के लिए चुनौती है। पिछले पांच वर्षों में विभाग को आरोपी शिक्षकों ने 30 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगाई है। कई मामले ऐसे हैं, जिसमें संबंधित शिक्षक न्यायालय में चले गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश शिक्षकों के कोर्ट में जाने से रिकवरी कर पाने में मुश्किलें आ रहीं हैं।
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पिछले पांच सालों में बेसिक कार्यालय ने फर्जीवाड़े में 66वें शिक्षक को किया सेवा से बाहर
गौरी बाजार के प्रा वि. जगदीशपुर में तैनात शिक्षक की विभागीय जांच के बाद हुई कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गौरीबाजार क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय जगदीशपुर में तैनात प्रधानाध्यापक दीपक को फर्जीवाड़े की पुष्टि के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। एसटीएफ की ओर से उसके प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जा रहा था। साथ ही खंड शिक्षा अधिकारी को उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। वह जुलाई 2010 में नियुक्त हुआ था।
शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर जनपद लगातार शासन के रडार पर रहा है। पिछले पांच सालों के अंदर अब तक जिले के 16 ब्लॉकों के परिषदीय विद्यालयों में तैनात 65 शिक्षकों को कूटरचित प्रमाणपत्रों के आधार पर सेवा से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका था।
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बृहस्पतिवार को बीएसए हरिश्चंद्र नाथ ने बताया कि गौरीबाजार के प्राथमिक विद्यालय जगदीशपुर में तैनात प्रधानाध्यापक दीपक पुत्र रामसमुझ के हाईस्कूल व इंटर के शैक्षिक प्रमाणपत्र जांच में फर्जी मिले हैं। शैक्षिक दस्तावेजों के अनुसार दीपक ने माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से आयोजित यूपी बोर्ड की हाईस्कूल वर्ष 1998 अनुक्रमांक 1263979 एवं इंटर वर्ष 2000 अनुक्रमांक 0669864 से प्रताप नारायन सिंह जनता इंटर कॉलेज बरही सोनबरसा, गोरखपुर से उत्तीर्ण किया है।
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सत्यापन प्रक्रिया के दौरान प्रधानाचार्य, प्रताप नारायन सिंह जनता इंटर कॉलेज, बरही सोनबरसा ने अवगत कराया है कि दीपक पुत्र रामसमुझ के हाईस्कूल व इंटर के अंक व प्रमाणपत्र का विवरण विद्यालय के सारणीयन पंजिका अभिलेखों में दर्ज नहीं है। साथ ही इनके स्थानांतरण प्रमाणपत्र तथा अभिलेखों में अंकित कोई भी विवरण अंकित नहीं है।
संस्था के अभिलेखों, क्रॉस लिस्ट, स्कॉलर रजिस्टर में भी उनका नाम अंकित नहीं है। न ही कक्षा नौ में कोई स्थानांतरण प्रमाणपत्र जमा है। ऐसे में यह पुष्टि हुई है कि उक्त शिक्षक ने हाईस्कूल व इंटर के कूटरचित अंक एवं प्रमाणपत्रों के सहारे षडयंत्र करते हुए चयनित होकर नौकरी हासिल की है। उन्हें कई बार इस संबंध में नोटिस भी जारी किया गया। ऐसे में अध्यापक सेवा नियमावली एवं विभागीय नियमों के तहत दीपक को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही बीईओ गौरीबाजार को उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
बर्खास्त शिक्षकों से वेतन की रिकवरी बन रही चुनौती
सेवा से बाहर किए गए शिक्षकों से वेतन की रिकवरी कर पाना बेसिक शिक्षा कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों के लिए चुनौती है। पिछले पांच वर्षों में विभाग को आरोपी शिक्षकों ने 30 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगाई है। कई मामले ऐसे हैं, जिसमें संबंधित शिक्षक न्यायालय में चले गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश शिक्षकों के कोर्ट में जाने से रिकवरी कर पाने में मुश्किलें आ रहीं हैं।