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Deoria News: परिवार नियोजन के प्रति सजग है आधी आबादी

Mon, 06 Nov 2023 12:15 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 06 Nov 2023 12:15 AM IST
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Half the population is aware of family planning
-साल दर साल बढ़ रही महिला नसबंदी के लाभार्थियों की संख्या
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। परिवार नियोजन के प्रति आधी आबादी सजग है। पुरुषों की तुलना में महिला नसबंदी अपनाने वालों की संख्या बढ़ी है। परिवार कल्याण कार्यक्रमों में छोटा परिवार सुखी परिवार के संदेश के कारण जागरूकता बढ़ी है।
वित्तीय वर्ष 2020-21 में जिले में महिला नसबंदी की संख्या 4307 थी, जो 2021-22 में बढ़कर 4513 और इसके बाद वर्ष 2022-23 में 4584 हो गई। जिले में हर माह करीब चार बार और मेडिकल काॅलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में प्रतिदिन नसबंदी की सुविधा है। सीएमओ डॉ. राजेश झा ने बताया कि जागरूकता के चलते परिवार कल्याण कार्यक्रम को गति दी जा रही है। सास, बहू, बेटा सम्मेलन और परिवार नियोजन की नियमित योजनाओं के माध्यम से छोटा परिवार का संदेश दिया जा रहा है।
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हर शुक्रवार को अंतराल दिवस और हर महीने की 21 तारीख को खुशहाल परिवार दिवस मनाए जा रहे हैं। साथ ही समय-समय पर आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लोगों को परिवार नियोजन की महत्ता बता रही हैं। इसके अलावा माह के एक, नौ, सोलह और चौबीस तारीख को आयोजित होने वाले पीएमएसए-डे पर भी आने वाले लाभार्थियों को जागरूक किया जाता है। जिले में तीन सर्जन डॉ. अजय शाही, डॉ. मसूद आलम और डॉ. अजीत सिंह गौतम द्वारा महिला और पुरुष नसबंदी की सेवा दी जा रही है। इन तीन चिकित्सकों के माध्यम से जिले के 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्धारित सेवा दिवसों के जरिये नसबंदी की सेवाएं दी जा रही हैं। इन सभी प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
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लाभार्थी को मिलता है तीन हजार

प्रसव के बाद महिला नसबंदी पर लाभार्थी को तीन हजार रुपये और पुरुष नसबंदी करवाने पर लाभार्थी को तीन हजार रुपये की धनराशि दी जाती है। वहीं आशा कार्यकर्ता को पुरुष नसबंदी के लिए प्रेरित करने पर चार सौ रुपये और महिला नसबंदी के लिए प्रेरित करने पर तीन सौ रुपये की धनराशि दी जाती है।


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नसबंदी दूरबीन विधि से आसान

जिले में सर्वाधिक नसबंदी करने वाले चिकित्सक डॉ. मसूद आलम ने बताया कि महिला नसबंदी के लिए दो विधियां प्रमुख हैं। नसबंदी लेप्रोस्कोपिक प्रक्रियाएं (दूरबीन विधि) और चीरा विधि के माध्यम से होती है। लेप्रोस्कोपिक प्रक्रिया में छोटा छेद कर सर्जरी की जाती है। इसके लाभार्थी तेजी से ठीक हो सकते हैं और अपनी सामान्य गतिविधियों में जल्दी लौट सकते हैं। इस विधि में न्यूनतम घाव होता है, दर्द और असुविधा को कम करता है, अस्पताल में कम समय तक रहना पड़ता है । यह विधि काम पर जल्दी लौटने की अनुमति देती है और जटिलताओं का जोखिम भी कम रहता है।
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