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Deoria News: पूर्व एमएलसी रामू द्विवेदी को नहीं मिली राहत

Sun, 05 Mar 2023 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Sun, 05 Mar 2023 12:11 AM IST
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Former MLC Ramu Dwivedi did not get relief
संजीव उर्फ रामू द्विवेदी, पूर्व एमएलसी
पूर्व एमएलसी सहित आठ पर चलेगा जानलेवा हमले व रंगदारी वसूलने का मामला
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देवरिया। कोतवाली थाना क्षेत्र के भुजौली कॉलोनी में नौ वर्ष पहले हुए गोलीकांड व रंगदारी मांगने के मामले में पूर्व एमएलसी संजीव उर्फ रामू द्विवेदी सहित आठ आरोपियों को अदालत ने राहत देने से इंकार कर दिया है। अपर जिला जज संजय सिंह की अदालत ने सुनवाई के बाद आरोपियों की तरफ से दिए तर्कों को सिरे से खारिज करते हुए मुकदमा चलाए जाने का आदेश दिया।
17 फरवरी 2014 को रात में 9.40 बजे शराब व्यवसायी संजय केडिया ने जानलेवा हमले व रंगदारी मांगने का मुकदमा संजीव उर्फ रामू द्विवेदी सहित आठ लोगों के खिलाफ सदर कोतवाली में दर्ज कराया था। तत्कालीन विवेचक ने विवेचना में जानलेवा हमले व रंगदारी मांगने का अपराध नहीं पाए जाने पर आरोप पत्र से 307 व 384 आईपीसी की धारा निकालकर 147, 148, 338, 504, 506 आईपीसी में आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया।
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इस पर न्यायालय ने संज्ञान लेकर आरोपियों को सम्मन जारी किया। न्यायालय के संज्ञान लेने के पांच वर्ष बाद वादी मुकदमा ने पुलिस अधीक्षक से मिलकर आनन-फानन में पुन: विवेचना का आदेश ले लिया।
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न्यायालय से आदेश मिलने के 16 दिन के अंदर ही तत्कालीन निरीक्षक राजू सिंह ने आरोप पत्र में 307 व 384, 120 बी आईपीसी की बढ़ोतरी करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।
जमानत कराने के बाद आरोपियों ने न्यायालय में डिस्चार्ज प्रार्थना पत्र देकर मांग की कि आरोपियों के कब्जे से किसी हथियार की बरामदगी नहीं हुई है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी पत्रावली पर नहीं है। घटना के गवाह शराब व्यवसायी संजय केडिया के यहां नौकरी करते हैं, जो निष्पक्ष व स्वतंत्र साक्षी नहीं हैं। ऐसे में उनके विरुद्ध कोई आरोप नहीं बनता है।

दोनों पक्ष के तर्कों व साक्ष्यों को देखने के बाद अदालत ने सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश कुमार शुक्ला के तर्कों में मजबूती पाई। कहा कि जब दोनों पक्षों की तरफ से क्रॉस केस दर्ज कराया गया है। ऐसे में घटना को कैसे इंकार किया जा सकता है। अदालत ने आरोपियों का तर्क बलहीन होने के कारण निरस्त कर दिया और उन्हें राहत देने से इंकार कर दिया।
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