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Deoria News: बाढ़ आश्रय बनने के बाद बाढ़ प्रभावितों को नहीं लगाना पड़ेगा टेंट
Tue, 16 Apr 2024 02:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 16 Apr 2024 02:19 AM IST
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फोटो समाचार
तीन करोड़ 95 लाख 41 हजार की लागत से आश्रय भवन का होगा निर्माण
सच्चिदा नंद पांडेय
बरहज। क्षेत्र के यमुना मठ में बाढ़ आश्रय भवन बनाए जाने की योजना है। इसकी स्वीकृति मिल गई है। तीन करोड़ 95 लाख 41 हजार की लागत से बाढ़ आश्रय भवन के बनाए जाने से बरसात के मौसम में नदी से प्रभावित होने वाले गांवों के लोगों को निजात मिलेगी। बाढ़ पीड़ितों को बंधों और ऊंचाई वाले स्थानों पर टेंट में दिन-रात नहीं गुजारना पड़ेगा।
बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों की दुश्वारियों को देखते हुए शासन-प्रशासन की ओर से बाढ़ आश्रय भवन बनाया जाएगा। इसे यमुना मठ में 303 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जाना है। निर्माण कार्य के लिए गोरखपुर की एक संस्था को जिम्मेदारी दी गई है। बाढ़ आश्रय भवन बनाए जाने की योजना को लेकर लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें कुछ कम हो गई हैं।
सरयू तट पर नगर सहित क्षेत्र का अधिकांश गांव बसा है। बरसात में बाढ़ के कारण प्रभावित गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। नदी में बाढ़ से परसियां-विशुनपुर देवार के करीब 52 टोलों के अलावा मईल क्षेत्र के बकुची, मईल चौराहा, नरियांव, देवसियां, तेलियां कला, तेलियां शुक्ल, बरेजी, मऊ जनपद के चक्की मूसाडोही सहित दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से घिर जाते हैं। वहीं, भदिला प्रथम गांव बाढ़ के पानी में डूब जाता है।
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मऊ जनपद के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए श्रीराम इंटर काॅलेज में बाढ़ राहत कैंप लगाया जाता है। जबकि अधिकांश लोग घरों को छोड़कर नात-रिश्तेदारी और बंधों आदि जगहों पर टेंट लगाकर जीवन यापन करते हैं। बाढ़ के पानी के हटने का इंतजार करते हैं।
इंसेट में-
बाढ़ आश्रय भवन में एक साथ रह सकेंगे 150 लाेग
तहसील क्षेत्र के यमुना मठ में बाढ़ आश्रय भवन बनाया जाना है। इसके लिए मंजूरी मिल गई है। जिसे बनाने के लिए एक कार्यदायी संस्था को भी जिम्मेदारी दे दी गई है। विभागीय लोगों के अनुसार, 303 हेक्टेयर भूमि में तीन करोड़ 95 लाख 41 हजार की लागत से बड़ा भवन बनाया जाएगा। जिसे शौचालय, स्नान घर के अलावा एक साथ 150 लोगों के रहने के लिए मूलभूत सुविधाओं से लैस किया जाएगा। बाढ़ आश्रय भवन पर जल्द ही अमलीजामा पहनाया जाएगा।
स्पीक अप-
बरसात के मौसम में सरयू नदी उफान पर होती है। इसके कारण बाढ़ का पानी गांवों का रुख कर लेता है। प्रत्येक वर्ष बाढ़ के दरम्यान घरों को छोड़कर उचित ठौर बनाना मजबूरी हो जाती है। बाढ़ के समय महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। बाढ़ आश्रय भवन बनने से समस्याओं से निजात मिलेगी। -उदयराज चौरसिया अधिवक्ता, तहसील बरहज
बाढ़ के समय परसियां-विशुनपुर देवार में सबसे ज्यादा तबाही आती है। अधिकारियों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिम्मेदारों द्वारा उठाया गया यह कदम सराहनीय है। बाढ़ जैसे आपात संकट में आश्रय भवन के बनने से हम प्रभावितों को काफी राहत मिलेगी।
-छाेटेलाल, ग्रामीण परसियां देवार
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तीन करोड़ 95 लाख 41 हजार की लागत से आश्रय भवन का होगा निर्माण
सच्चिदा नंद पांडेय
बरहज। क्षेत्र के यमुना मठ में बाढ़ आश्रय भवन बनाए जाने की योजना है। इसकी स्वीकृति मिल गई है। तीन करोड़ 95 लाख 41 हजार की लागत से बाढ़ आश्रय भवन के बनाए जाने से बरसात के मौसम में नदी से प्रभावित होने वाले गांवों के लोगों को निजात मिलेगी। बाढ़ पीड़ितों को बंधों और ऊंचाई वाले स्थानों पर टेंट में दिन-रात नहीं गुजारना पड़ेगा।
बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों की दुश्वारियों को देखते हुए शासन-प्रशासन की ओर से बाढ़ आश्रय भवन बनाया जाएगा। इसे यमुना मठ में 303 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जाना है। निर्माण कार्य के लिए गोरखपुर की एक संस्था को जिम्मेदारी दी गई है। बाढ़ आश्रय भवन बनाए जाने की योजना को लेकर लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें कुछ कम हो गई हैं।
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सरयू तट पर नगर सहित क्षेत्र का अधिकांश गांव बसा है। बरसात में बाढ़ के कारण प्रभावित गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। नदी में बाढ़ से परसियां-विशुनपुर देवार के करीब 52 टोलों के अलावा मईल क्षेत्र के बकुची, मईल चौराहा, नरियांव, देवसियां, तेलियां कला, तेलियां शुक्ल, बरेजी, मऊ जनपद के चक्की मूसाडोही सहित दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से घिर जाते हैं। वहीं, भदिला प्रथम गांव बाढ़ के पानी में डूब जाता है।
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मऊ जनपद के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए श्रीराम इंटर काॅलेज में बाढ़ राहत कैंप लगाया जाता है। जबकि अधिकांश लोग घरों को छोड़कर नात-रिश्तेदारी और बंधों आदि जगहों पर टेंट लगाकर जीवन यापन करते हैं। बाढ़ के पानी के हटने का इंतजार करते हैं।
इंसेट में-
बाढ़ आश्रय भवन में एक साथ रह सकेंगे 150 लाेग
तहसील क्षेत्र के यमुना मठ में बाढ़ आश्रय भवन बनाया जाना है। इसके लिए मंजूरी मिल गई है। जिसे बनाने के लिए एक कार्यदायी संस्था को भी जिम्मेदारी दे दी गई है। विभागीय लोगों के अनुसार, 303 हेक्टेयर भूमि में तीन करोड़ 95 लाख 41 हजार की लागत से बड़ा भवन बनाया जाएगा। जिसे शौचालय, स्नान घर के अलावा एक साथ 150 लोगों के रहने के लिए मूलभूत सुविधाओं से लैस किया जाएगा। बाढ़ आश्रय भवन पर जल्द ही अमलीजामा पहनाया जाएगा।
स्पीक अप-
बरसात के मौसम में सरयू नदी उफान पर होती है। इसके कारण बाढ़ का पानी गांवों का रुख कर लेता है। प्रत्येक वर्ष बाढ़ के दरम्यान घरों को छोड़कर उचित ठौर बनाना मजबूरी हो जाती है। बाढ़ के समय महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। बाढ़ आश्रय भवन बनने से समस्याओं से निजात मिलेगी। -उदयराज चौरसिया अधिवक्ता, तहसील बरहज
बाढ़ के समय परसियां-विशुनपुर देवार में सबसे ज्यादा तबाही आती है। अधिकारियों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिम्मेदारों द्वारा उठाया गया यह कदम सराहनीय है। बाढ़ जैसे आपात संकट में आश्रय भवन के बनने से हम प्रभावितों को काफी राहत मिलेगी।
-छाेटेलाल, ग्रामीण परसियां देवार