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नहीं थम रही बाढ़ की तबाही, दूसरे दिन भी पलायन को मजबूर हुए परिवार

Sat, 13 Jul 2019 10:51 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jul 2019 10:51 PM IST
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शहर के कुर्ना नाले पर निर्मित पुराना पुल को छूने को बेताब है कुर्ना का पानी। - फोटो : DEORIA
लगातार बारिश से बिगड़े हालात, 200 परिवारों ने छोड़ा घर
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अलीनगर, शहीदनगर के बाद शांतिनगर, सोमनाथ वार्ड, सिंधी मिल कॉलोनी, महुआबारी, अहमदनगर, छोटी बभनी में भी भरा पानी
कुर्ना नाला चोक होने से बढ़ रही समस्या, समाधान में विफल अफसर
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। छह दिनों से लगातार हो रही बारिश से शहर के सीमावर्ती मोहल्लों में हालात बेकाबू हो रहे हैं। पहले से ही जलभराव से जूझ रहे इलाकों में शुक्रवार की पूरी रात हुई बारिश के बाद पानी का स्तर ऊपर उठ गया। अलीनगर, शहीदनगर के बाद शांतिनगर, अहमद नगर, सोमनाथ मंदिर वार्ड, महुआबारी, छोटी बभनी में बाढ़ जैसे हालात हैं। इन इलाकों में अब तक 200 से अधिक परिवार पलायन कर चुके हैं। टायर-ट्यूब और रस्सी के सहारे जान जोखिम में डालकर मोहल्लों से आ रहे लोग सगे संबंधियों के यहां शरण तलाश रहे हैं। सड़कों पर कहीं कमर भर तो कहीं कंधे से ऊपर पानी धार बह रही है। शाम छह बजे तक पुरवा विद्युत उपकेंद्र तक पानी पहुंच गया था। उपकेंद्र में पानी घुसा तो सैकड़ों गांवों की बिजली भी अनिश्चितकाल के लिए ठप हो सकती है।
सिविल लाइंस रोड, राघवनगर, सीसी रोड, सोमनाथ नगर, स्टेशन रोड, कोतवाली रोड समेत आधे शहर का पानी कुर्ना नाले में गिरता है। बरसात शुरू होने पर नगर पालिका ने नगर में नालों की सफाई तो करा दी लेकिन कुर्ना नाला जस का तस सिल्ट से पटा रहा। छह दिन से हो रही बारिश में कुर्ना नाला पूरी तरह जाम हो गया है। जल निकासी नहीं हो पाने से नाले के आसपास के मोहल्लों में बाढ़ के हालात हैं। शुक्रवार को अलीनगर व शहीद नगर के 100 से अधिक परिवार पलायन कर गए। शांतिनगर, अहमद नगर, सिंधी मिल कॉलोनी, महुआबारी में भी लोगों के चौखट तक पानी पहुंच चुका था। रात में हुई जोरदार बारिश ने इन्हें भी दूसरी जगह शरण लेने पर मजबूर कर दिया। 200 से अधिक घरों में शाम तक ताले लग गए। शांतिनगर स्थित मदरसा में रहकर पढ़ाई कर रहे करीब 250 बच्चे हास्टल में पानी भरने से घर चले गए। पुरवा गांव में भी पानी भर गया है। यहां सड़क पर रस्सी बांधकर लोग आ-जा रहे हैं।
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इंतजार के बाद पलायन को मजबूर हुए लोग
बाढ़ की तबाही झेल रहे मोहल्लेवासियों को जिला प्रशासन से उम्मीद थी कि जिस तरह बीच शहर में जलभराव को लेकर अधिकारियों ने सख्ती दिखाई वैसे ही वह उनके लिए भी जरूरी इंतजाम करेंगे। अलीनगर व शहीद नगर में सैकड़ों परिवारों के पलायन के बावजूद शांतिनगर, महुआबारी, अहमद नगर, छोटी बभनी में रह रहे परिवार जिला प्रशासन से मदद मिलने का इंतजार कर रहे थे। शुक्रवार की रात आई बारिश के बाद यहां जलस्तर अचानक बढ़ गया। दो सौ से अधिक परिवार पलायन को मजबूर हुए।
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जायजा लेने आए डीएम, गाड़ी से ही नहीं उतरे
कुर्ना नाले में उफान से मची तबाही के बाद डीएम अमित किशोर शनिवार को शहर का हाल जानने निकले। दावा था कि पानी निकासी का ठोस इंतजाम कराकर क्षेत्रवासियों को राहत दिलाई जाएगी। इंतजार में बैठे लोगों को तब मायूसी लगी, जब डीएम बंद गाड़ी से नीचे भी नहीं उतरे। ओवरब्रिज के पास से ही बाढ़ का जायजा लेकर डीएम चलते बने। हालांकि बाद में एडीएम, नगर पालिका अध्यक्ष सहित कई अफसरों ने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दूर से ही जायजा लेकर पानी निकासी के लिए संबंधितों को निर्देशित किया। जिला प्रशासन की बेरुखी से स्थानीय लोगों में गुस्सा है।
पीड़ित बोले: कब चेतेगा महकमा
शांतिनगर निवासी नसीर अहमद का कहना है कि जिला प्रशासन बाढ़ से होने वाले मौत का इंतजार कर रहा है। सड़कों पर कमर से ऊपर तक पानी भर गया है। राहगीरों को सड़क व नाले का अंदाजा नहीं लग पा रहा है। नाले में गिरने से किसी की मौत हो सकती है। स्थानीय निवासी बीरबल यादव का कहना है कि दो दिन से लोग ट्यूब के सहारे घरों का सामान बाहर निकाल रहे हैं। जिला प्रशासन को नागरिकों की तनिक भी परवाह होती तो ऐसे हालात में छोटे से नाव लगवा दिए होते। मुन्ना सिद्दीकी का कहना है कि बाढ़ जैसे हालात में प्रशासन ने अपनी निष्क्रियता दिखा दी। पानी हटने के बाद तमाम तरह की बीमारी फैलेगी। यही सुस्ती आगे भी बरकरार रही तो यहां रहना जान जोखिम में डालने जैसा होगा। इबारत खां का कहना है कि 20 साल से शहर में रह रहा हूं। यहां ऐसे हालत कभी नहीं हुए। कुर्ना नाले की सफाई हुई होती तो आज यह मंजर देखने को नहीं मिलता।

कलेक्ट्रेट, पीडब्लूडी सहित तमाम दफ्तरों में जलभराव
शहर के अलावा सरकारी परिसरों में भी पानी भर गया। कलेक्ट्रेट में एक फीट तक पानी जमा होने से शनिवार को यहां होने वाली समीक्षा बैठक का स्थान बदल दिया गया। बैठक में शामिल होने आए अफसरों को अचानक विकास भवन जाना पड़ा। यहां पंपिंग सेट लगाकर पानी निकासी की कोशिश होती रही। पीडब्लूडी, कृषि भवन के अलावा अफसरों के आवास परिसर में भी पानी भर गया है। नगर पालिका के ज्यादातर संसाधन अफसरों के बंगले और दफ्तरों से पानी निकालने में ही लगा द िए गए हैं, जबकि आधा शहर बाढ़ से त्राहि-त्राहि कर रहा है।
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