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Deoria News: हर साल बाढ़ से तबाही... फिर भी इंतजाम न काफी
Mon, 12 May 2025 12:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 12 May 2025 12:26 AM IST
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बरहज के कटइलवा में बाढ़ से बचाव के लिए ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया नवीन बांध
बाढ़ से जूझेंगे दियारा क्षेत्र के लोग, भदिला प्रथम गांव टापू में हो जाता है तब्दील
टापू में तब्दील हो जाते हैं गांव, बाढ़ के कारण महीनों कट जाता है संपर्क
संंवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। सरयू नदी तट पर बरहज क्षेत्र के अधिकतर गांव बसे हैं। बरसात के मौसम में नदी में बाढ़ आने पर दर्जनों गांव बाढ़ की जद में आ जाते हैं। बाढ़ खंड विभाग की ओर से इस बार भी समूचित प्रबंध नहीं किए गए हैं। इससे नदी पार परसियां-विशुनपुर देवार, भदिला प्रथम सहित अन्य गांवों के लोगों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं।
हालांकि, बाढ़ के दौरान भदिला प्रथम गांव के टापू में तब्दील हो जाने के कारण महीनों लोगों से संपर्क कट जाता है। इस बार उम्मीद थी कि प्रशासन इन गांवों के बारे में कुछ सोचेगा और करेगा, मगर वहीं ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। न तो शासन ने और न ही प्रशासन ने इसके लिए कोई कार्य किया। वर्षों से बाढ़ की विभीषिका तटवर्ती गांवों के लोगों के लिए त्रासदी बन जाती है। लोग गांव छोड़कर पलायन करने पर मजबूर हो जाते हैं।
कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड विभाग की ओर से ड्रीम प्रोजेक्ट के जरिये कटइलवा से कपरवार संगम तट सहित अन्य नवीन बांध का निर्माण कराया है। हालांकि, लोग बाढ़ के संकट से पूरी तरह उबरना चाहते हैं, मगर सरकारी अमला और मातहत सरकार के प्रयासों को जनता तक पहुंचाने में बाधक बन जाते हैं। इससे उनकी चिंता बढ़ जाती है।
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लोगों के अनुसार यदि अफसर ईमानदारी से कार्य करें तो बाढ़ से होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। राप्ती नदी तट के मुहाने पर बसा भदिला प्रथम, धनया कुंड महाल बरसात के मौसम में टापू बन जाता है। यहां के लोगों के आवागमन के लिए पुल न होने के कारण नाव ही सहारा बनती है। स्कूली छात्र, नौकरीपेशा, जरूरतमंद लोग जान जोखिम में डालकर नाव से सफर करने पर मजबूर होते हैं। वहीं परसियां-विशुनपुर देवार के अधिकतर टोले और मजरे बाढ़ के पानी से घिर जाते हैं।
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रुखा-सूखा खाकर घर लौटने का इंतजार करते हैं बाढ़ प्रभावित
सरयू नदी में बाढ़ आने से प्रत्येक वर्ष परसियां-विशुनपुर देवार के अलावा भदिला प्रथम और गोरखपुर जनपद का कोलखास गांव बाढ़ से प्रभावित होता है। घरों में पानी घुसने पर लोग सड़क के किनारे और बांध पर प्लास्टिक डालकर जीवन-यापन करते हैं। लोग रुखा-सूखा खाकर बाढ़ के हटने और घर जाने का इंतजार करते हैं। कोलखास की मिंता देवी, दिव्यांग पन्नेलाल, अशोक, राजेश का कहना है कि शुरू में प्रशासन सुधि नहीं लेता है। बाढ़ आने और घरों तक पानी पहुंचने के बाद अधिकारियों की गाड़ियों का तांता लगने लगता है।
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नदी में विलीन हो चुका है कुरह परसियां और कोलखास गांव
2007 से सरयू के रुख बदलने से नदी में बेतहाशा कटान शुरू हो गया था, जो 2014 तक चला था। भीषण कटान में कुरह परसियां और गोरखपुर जनपद के कोलखास गांव का अस्तित्व भौगोलिक नक्शे से समाप्त हो गया। विस्थापितों को पटना पुलिस चौकी के पास, कपरवार नई बस्ती, कोटपुर पिपरा, बरहज आदि जगहों पर सरकार की ओर से कुछ जमीन देकर बसाया गया है।
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58.83 करोड़ से ड्रीम प्रोजेक्ट के जरिये बनाया गया है नवीन बांध
कपरवार संगम तट से भागलपुर तक डेंजर घोषित किया गया है। सिंचाई विभाग ने 58.83 करोड़ से ड्रीम प्रोजेक्ट के जरिये कटइलवा से संगम तट तक नवीन बांध बनाया है। इससे करीब आधा दर्जन गांव सुरक्षित हो गए हैं। वहीं दो करोड़ 92 लाख की लागत से कपरवार स्थित उग्रसेन सेतु से बिनोवापुरी और महेन पयहारी महाराज अंत्येष्टि स्थल तक कटान रोधी कार्य कराया जा रहा है।
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बाढ़ के समय नदी का पानी खेतों के रास्ते गांवाें तक पहुंच जाता है। फसलों की बर्बादी के साथ-साथ जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। बाढ़ से बचाव के लिए विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इससे प्रत्येक वर्ष समस्या बरकरार रहती है।
-शंकर प्रसाद, परसियां देवार
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दो साल पहल बरसात के मौसम में केंद्रीय जांच टीम ने अधिकारियों के साथ गांव का दौरा किया था। इससे भदिला प्रथम गांव में पुल बनने की उम्मीद जगी थी। अधिकारियों के जाने के बाद प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया। प्रत्येक वर्ष चारों ओर पानी लग जाने से जीवन असामान्य हो जाता है।
-विंध्यवासिनी देवी, भदिला प्रथम
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कोट-
नदी तट पर जगह-जगह कटानरोधी कार्य कराए जा रहे हैं। कुछ जगहों पर बांध पर लोग पिच कराने की मांग कर रहे हैं। इससे अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। फिलहाल खतरे वाली जगहों पर कटानरोधी कार्य चल रहा है।
-अशोक द्विवेदी, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड विभाग, देवरिया
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टापू में तब्दील हो जाते हैं गांव, बाढ़ के कारण महीनों कट जाता है संपर्क
संंवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। सरयू नदी तट पर बरहज क्षेत्र के अधिकतर गांव बसे हैं। बरसात के मौसम में नदी में बाढ़ आने पर दर्जनों गांव बाढ़ की जद में आ जाते हैं। बाढ़ खंड विभाग की ओर से इस बार भी समूचित प्रबंध नहीं किए गए हैं। इससे नदी पार परसियां-विशुनपुर देवार, भदिला प्रथम सहित अन्य गांवों के लोगों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं।
हालांकि, बाढ़ के दौरान भदिला प्रथम गांव के टापू में तब्दील हो जाने के कारण महीनों लोगों से संपर्क कट जाता है। इस बार उम्मीद थी कि प्रशासन इन गांवों के बारे में कुछ सोचेगा और करेगा, मगर वहीं ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। न तो शासन ने और न ही प्रशासन ने इसके लिए कोई कार्य किया। वर्षों से बाढ़ की विभीषिका तटवर्ती गांवों के लोगों के लिए त्रासदी बन जाती है। लोग गांव छोड़कर पलायन करने पर मजबूर हो जाते हैं।
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कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड विभाग की ओर से ड्रीम प्रोजेक्ट के जरिये कटइलवा से कपरवार संगम तट सहित अन्य नवीन बांध का निर्माण कराया है। हालांकि, लोग बाढ़ के संकट से पूरी तरह उबरना चाहते हैं, मगर सरकारी अमला और मातहत सरकार के प्रयासों को जनता तक पहुंचाने में बाधक बन जाते हैं। इससे उनकी चिंता बढ़ जाती है।
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लोगों के अनुसार यदि अफसर ईमानदारी से कार्य करें तो बाढ़ से होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। राप्ती नदी तट के मुहाने पर बसा भदिला प्रथम, धनया कुंड महाल बरसात के मौसम में टापू बन जाता है। यहां के लोगों के आवागमन के लिए पुल न होने के कारण नाव ही सहारा बनती है। स्कूली छात्र, नौकरीपेशा, जरूरतमंद लोग जान जोखिम में डालकर नाव से सफर करने पर मजबूर होते हैं। वहीं परसियां-विशुनपुर देवार के अधिकतर टोले और मजरे बाढ़ के पानी से घिर जाते हैं।
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रुखा-सूखा खाकर घर लौटने का इंतजार करते हैं बाढ़ प्रभावित
सरयू नदी में बाढ़ आने से प्रत्येक वर्ष परसियां-विशुनपुर देवार के अलावा भदिला प्रथम और गोरखपुर जनपद का कोलखास गांव बाढ़ से प्रभावित होता है। घरों में पानी घुसने पर लोग सड़क के किनारे और बांध पर प्लास्टिक डालकर जीवन-यापन करते हैं। लोग रुखा-सूखा खाकर बाढ़ के हटने और घर जाने का इंतजार करते हैं। कोलखास की मिंता देवी, दिव्यांग पन्नेलाल, अशोक, राजेश का कहना है कि शुरू में प्रशासन सुधि नहीं लेता है। बाढ़ आने और घरों तक पानी पहुंचने के बाद अधिकारियों की गाड़ियों का तांता लगने लगता है।
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नदी में विलीन हो चुका है कुरह परसियां और कोलखास गांव
2007 से सरयू के रुख बदलने से नदी में बेतहाशा कटान शुरू हो गया था, जो 2014 तक चला था। भीषण कटान में कुरह परसियां और गोरखपुर जनपद के कोलखास गांव का अस्तित्व भौगोलिक नक्शे से समाप्त हो गया। विस्थापितों को पटना पुलिस चौकी के पास, कपरवार नई बस्ती, कोटपुर पिपरा, बरहज आदि जगहों पर सरकार की ओर से कुछ जमीन देकर बसाया गया है।
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58.83 करोड़ से ड्रीम प्रोजेक्ट के जरिये बनाया गया है नवीन बांध
कपरवार संगम तट से भागलपुर तक डेंजर घोषित किया गया है। सिंचाई विभाग ने 58.83 करोड़ से ड्रीम प्रोजेक्ट के जरिये कटइलवा से संगम तट तक नवीन बांध बनाया है। इससे करीब आधा दर्जन गांव सुरक्षित हो गए हैं। वहीं दो करोड़ 92 लाख की लागत से कपरवार स्थित उग्रसेन सेतु से बिनोवापुरी और महेन पयहारी महाराज अंत्येष्टि स्थल तक कटान रोधी कार्य कराया जा रहा है।
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बाढ़ के समय नदी का पानी खेतों के रास्ते गांवाें तक पहुंच जाता है। फसलों की बर्बादी के साथ-साथ जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। बाढ़ से बचाव के लिए विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इससे प्रत्येक वर्ष समस्या बरकरार रहती है।
-शंकर प्रसाद, परसियां देवार
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दो साल पहल बरसात के मौसम में केंद्रीय जांच टीम ने अधिकारियों के साथ गांव का दौरा किया था। इससे भदिला प्रथम गांव में पुल बनने की उम्मीद जगी थी। अधिकारियों के जाने के बाद प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया। प्रत्येक वर्ष चारों ओर पानी लग जाने से जीवन असामान्य हो जाता है।
-विंध्यवासिनी देवी, भदिला प्रथम
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कोट-
नदी तट पर जगह-जगह कटानरोधी कार्य कराए जा रहे हैं। कुछ जगहों पर बांध पर लोग पिच कराने की मांग कर रहे हैं। इससे अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। फिलहाल खतरे वाली जगहों पर कटानरोधी कार्य चल रहा है।
-अशोक द्विवेदी, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड विभाग, देवरिया