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नगर पालिका : सीमा विस्तार पर फिर लगा ग्रहण, विशेष सचिव ने मांगा 90 साल पुराना रिकॉर्ड
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नगर पालिका : सीमा विस्तार पर फिर लगा ग्रहण, विशेष सचिव ने मांगा 90 साल पुराना रिकॉर्ड
देवरिया। नगर पालिका परिषद देवरिया के सीमा विस्तार में आए दिन पेंच फंस रहे हैं। पिछले साल प्रस्तावित गांवों का विस्तृत विवरण नहीं होने से प्रस्ताव अटक गया था। इस साल भी कुछ वैसा ही पेंच फंसता नजर आ रहा है। विशेष सचिव ने 90 साल पहले नगर का हिस्सा बने गांवों का गाटा संख्या सहित विस्तृत ब्योरा मांगा है। नौ दशक पुराना रिकॉर्ड तलाशना जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
शहर के सीमा विस्तार के लिए वर्ष 2008 में तत्कालीन चेयरमैन बसंत लाल श्रीवास्तव की अध्यक्षता में प्रस्ताव पास हुआ। डीएम के माध्यम से यह प्रस्ताव शासन को भेजा गया। तबसे चेयरमैन, ईओ और डीएम बीच-बीच में शासन को रिमाइंडर भेजते रहे। 11 दिसंबर 2019 को शासन से मिले दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुविचारित आख्या प्रमुख सचिव नगर विकास अनुभाग छह को भेजा गया। जिसमें प्रस्तावित गांवों का गाटा संख्या आदि विवरण तो उपलब्ध करा दिया गया, लेकिन नगर में पहले से शामिल गांवों के बारे में जानकारी देने में नगर पालिका ने असमर्थता जाहिर कर दी। यही कमी नगर पालिका के सीमा विस्तार में रुकावट की वजह बन गई है।
यहां फंसा है पेच
वर्ष 1930 में नगर पंचायत देवरिया का गठन किया गया। 1943-44 में उसी सीमा के साथ नगर पालिका के रूप में परिवर्तित हुआ। नगर पालिका सीमा विस्तार के लिए शासन ने नगर पंचायत गठन के दौरान जारी अधिसूचना की प्रति मांगी है। इसमें नगर का हिस्सा बने गांवों का संपूर्ण विवरण मौजूद होता है।
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सीमा विस्तार के लिए बची है 24 दिन की मोहलत
नगर निकायों के सीमा विस्तार के लिए शासन ने 31 दिसंबर तक का समय दिया है। इस दौरान जो नगर निकाय दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए आख्या उपलब्ध करा देंगे उनके सीमा का विस्तार हो जाएगा। इस अवसर को चूकने के बाद फिर पांच साल के लिए नगर पालिका के सीमा विस्तार का प्रस्ताव अटक सकता है।
विशेष सचिव ने फोन कर 1930 में गठित देवरिया नगर पंचायत के अधिसूचना की प्रति मांगी है। उस दौरान गोरखपुर जिला था। देवरिया और गोरखपुर दोनों जगह विवरण तलाशे जा रहे हैं। सूचना जल्द उपलब्ध करा दी जाएगी।
- रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका परिषद देवरिया
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देवरिया। नगर पालिका परिषद देवरिया के सीमा विस्तार में आए दिन पेंच फंस रहे हैं। पिछले साल प्रस्तावित गांवों का विस्तृत विवरण नहीं होने से प्रस्ताव अटक गया था। इस साल भी कुछ वैसा ही पेंच फंसता नजर आ रहा है। विशेष सचिव ने 90 साल पहले नगर का हिस्सा बने गांवों का गाटा संख्या सहित विस्तृत ब्योरा मांगा है। नौ दशक पुराना रिकॉर्ड तलाशना जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
शहर के सीमा विस्तार के लिए वर्ष 2008 में तत्कालीन चेयरमैन बसंत लाल श्रीवास्तव की अध्यक्षता में प्रस्ताव पास हुआ। डीएम के माध्यम से यह प्रस्ताव शासन को भेजा गया। तबसे चेयरमैन, ईओ और डीएम बीच-बीच में शासन को रिमाइंडर भेजते रहे। 11 दिसंबर 2019 को शासन से मिले दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुविचारित आख्या प्रमुख सचिव नगर विकास अनुभाग छह को भेजा गया। जिसमें प्रस्तावित गांवों का गाटा संख्या आदि विवरण तो उपलब्ध करा दिया गया, लेकिन नगर में पहले से शामिल गांवों के बारे में जानकारी देने में नगर पालिका ने असमर्थता जाहिर कर दी। यही कमी नगर पालिका के सीमा विस्तार में रुकावट की वजह बन गई है।
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यहां फंसा है पेच
वर्ष 1930 में नगर पंचायत देवरिया का गठन किया गया। 1943-44 में उसी सीमा के साथ नगर पालिका के रूप में परिवर्तित हुआ। नगर पालिका सीमा विस्तार के लिए शासन ने नगर पंचायत गठन के दौरान जारी अधिसूचना की प्रति मांगी है। इसमें नगर का हिस्सा बने गांवों का संपूर्ण विवरण मौजूद होता है।
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सीमा विस्तार के लिए बची है 24 दिन की मोहलत
नगर निकायों के सीमा विस्तार के लिए शासन ने 31 दिसंबर तक का समय दिया है। इस दौरान जो नगर निकाय दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए आख्या उपलब्ध करा देंगे उनके सीमा का विस्तार हो जाएगा। इस अवसर को चूकने के बाद फिर पांच साल के लिए नगर पालिका के सीमा विस्तार का प्रस्ताव अटक सकता है।
विशेष सचिव ने फोन कर 1930 में गठित देवरिया नगर पंचायत के अधिसूचना की प्रति मांगी है। उस दौरान गोरखपुर जिला था। देवरिया और गोरखपुर दोनों जगह विवरण तलाशे जा रहे हैं। सूचना जल्द उपलब्ध करा दी जाएगी।
- रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका परिषद देवरिया