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Deoria News: घाटों पर विसर्जन के दौरान मूर्तियों की बेकद्री, पोशाक और आभूषणों की लूट

Sat, 04 Oct 2025 12:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Sat, 04 Oct 2025 12:59 AM IST
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During immersion at the ghats, idols were disrespected, and their clothing and jewelry were stolen.
कपरवार में प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद सामान निकालते लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
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बरहज। विजयदशमी पर्व पर बृहस्पतिवार को घाटों पर मूर्ति विसर्जन के दौरान बेकद्री का मंजर देखने को मिला। आलम यह था कि मूर्तियों के विसर्जन दौरान पोशाक के अलावा आभूषण और सजावटी सामान लूटने की होड़ मची थी।
वहीं पुल पर फेंकी गई पूजन सामग्रियों को लोग रौंद रहे थे। नदी घाटों पर मूर्तियों की भावभीनी विदाई की जगह लोगों के मन का लालच, हुड़दंगई और मादक पदार्थों का सेवन आस्था पर धब्बा लगा रहा था।
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विजय दशमी पर्व पर नगर स्थित थाना घाट, कपरवार उग्रसेन सेतु से मूर्ति विसर्जन किया गया। उग्रसेन सेतु पर शुक्रवार की देर शाम तक विसर्जन के लिए मूर्तियों के आने का क्रम जारी था। उग्रसेन सेतु से नगरक्षेत्र के अलावा अगल-बगल के जगहों की भी मूर्तियां विसर्जित की जाती हैं। पहले दिन करीब 250 मूर्तियों का विसर्जन किया गया।
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विसर्जन के दौरान उग्रसेन पुल से नदी की बीच धारा में मूर्तियों को गिराने के बाद नाव लगाकर मौजूद लोग उसे खींचकर किनारे ले जा रहे थे। इसके बाद छीना-झपटी की भी नौबत आ जा रही थी।
मूर्ति विसर्जन के बाद पुल सहित नदी घाट के किनारे जगह-जगह गंदगी का अंबार लग गया है। देवी मूर्तियों के वस्त्र, आभूषण सहित अन्य महंगे सामान निकाल लिए जाते हैं, जबकि अवशेष को कचरे में फेंक दिया जा रहा था। वहीं जगह-जगह बिखरे पूजन सामग्रियों को लोग रौंदते दिखे।

बटोरी जा रही थीं मूर्तियों में लगी बांस की फट्टियां ः दुर्गा मूर्ति बनाने के लिए बांस की फट्टियों से ढांचा तैयार किया जाता है।
मूर्ति विसर्जन के दौरान जहां सामानों की लूट मची हुई थी, वहीं कुछ लोग बांस की फट्टियों को एकत्रित कर रहे थे। नदी घाट पर सामानों को समेट रहे लोगों का कहना था कि बांस की फट्टियां काम आती हैं। इससे छप्पर छाजन बनाने में आसानी रहती हैै। ू
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