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Deoria News: पारा बढ़ने से मेडिकल कॉलेज में बढ़े नकसीर से पीड़ित मरीज, गर्मी में बरतें सावधानी

Fri, 26 Apr 2024 01:32 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 26 Apr 2024 01:32 AM IST
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Due to increase in mercury, patients suffering from nosebleeds increased in medical college, be careful in summer
मेडिकल कॉलेज में मरीज की जांच करते डॉ प्रदीप कुमार  गुप्ता।संवाद
- गर्मी बढ़ने से नकसीर की हो सकती है दिक्कत, रहें सतर्क, जैसे-जैसे बढ़ रहा पारा, मरीजों में हो रहा इजाफा
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- बच्चों के साथ बड़ों, बुजुर्गों को भी हो रही दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। पारा बढ़ने के साथ ही लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा है। गर्मी के चलते नकसीर (इपिप्टैक्सिक्स) की समस्या हो जा रही है। नाक में सूखापन होने के कारण लोगों को यह दिक्कत हो रही है, और ब्लड आने लग रहा है। मेडिकल कॉलेज में इस बीमारी के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। बच्चों से लेकर बूढ़े तक इसकी चपेट में आ रहे हैं। हर रोज 25 से 30 मरीज पहुंच रहे हैं। करीब तीन से पांच मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। बीपी, एलर्जी के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। अप्रैल में तापमान तेजी से बढ़ा है। इससे लोगों की दिनचर्या और स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ ही लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ रही है। नकसीर (इपिप्टैक्सिक्स) से लोग पीड़ित हो रहे हैं। इस मौसम में उच्च रक्तचाप वाले मरीजों में भी यह परेशानी अक्सर देखने को मिलती है। मेडिकल कॉलेज में नकसीर के मरीजों की संख्या बढ़ी है। आने वाले मरीजों में करीब 25 प्रतिशत से अधिक इस बीमारी से पीड़ित पहुंच रहे हैं।
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इनमें बच्चों की संख्या अधिक रहती है। हर रोज गंभीर तीन से पांच मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ संख्या बढ़ भी सकती है। तापमान बढ़ने पर नाक में नमी नहीं रहती है वह शुष्क हो जाती है। नाक में बार-बार अंगुली डालने और तापमान के कारण नसें फट जाती हैं, जिससे खून आने लगता है। डॉक्टर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
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तापमान बढ़ने के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे नाक में रुखापन व सूखापन आ जाता है। नाक सूख जाती है और नाक से खून आने लगता है। नाक के पर्दे के अगले हिस्से में लिटिल एरिया होता है, जहां खून की चार नसें होती हैं। इनके फट जाने से नाक से तेजी से ब्लड आने लगता है। नाक से ब्लड आने पर घबराना नहीं चाहिए। अंगूठे व बगल की अंगुली से नाक को करीब 5 से 7 मिनट तक दबाने से ब्लड आना रुक जाता है। बंद न होने पर बर्फ से नाक की सेकाई भी जा सकती है। इसके बाद भी आने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। तत्काल ईएनटी विशेषज्ञ को दिखाएं और उनकी सलाह पर दवा लें। मरीज को भर्ती कर इलाज भी करना पड़ सकता है। यह बीमारी किसी में हो सकती है, लेकिन ज्यादातर बच्चों व बीपी के मरीजों में देखने को मिलती है। एलर्जी के मरीजों को यह दिक्कत होने की संभावना रहती है। इस मौसम में सावधानी बरतनी चाहिए।
-डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता, विभागाध्यक्ष ईएनटी, मेडिकल कॉलेज
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यह बरतें सावधानी
- धूप में निकलने से बचें।
- धूप में निकलना जरूरी हो तो समय सिर, नाक, मुंह ढक कर रखें।
- नाक में हल्का वैसलीन लगाएं।
- घर से खूब पानी पीकर निकलें।
- नाक बार-बार अंगुली से में टच न करें।
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